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Mahendragarh-Narnaul News: कहीं अधिकारी नहीं पहुंचे तो कहीं गुणवत्ता का हवाला, 2240 में बेचना पड़ा बाजरा
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फोटो नंबर- 15नई अनाज मंडी में ट्रैक्टर के साथ फोटो खिंचवाकर गेटपास जारी करवाते किसान। संवाद
नारनौल। बाजरा खरीद की घोषणा के पांच दिन बाद मंगलवार से अटेली मंडी में खरीद शुरू हो गई लेकिन किसानों को 2900 रुपये का निर्धारित एमएसपी नहीं मिल पा रहा है। हैफेड की सरकारी खरीद अब भी शून्य है। कुछ मंडियों में हैफेड के कर्मचारी और अधिकारी पहुंच ही नहीं रहे और जहां पहुंच रहे हैं वहां गुणवत्ता में कमी बताकर बाजरा नहीं खरीदा जा रहा।
सरकारी खरीद न होने से व्यापारी जे-फार्म पर 2100 से 2240 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बाजरा खरीद रहे हैं। सरकार भावांतर के 600 रुपये प्रति क्विंटल किसानों के खाते में डालेगी लेकिन बाजार भाव कम होने से इसे जोड़कर भी पूरा एमएसपी नहीं मिल रहा। कोई और विकल्प न होने से किसानों को मजबूरी में कम भाव पर फसल बेचनी पड़ रही है।
2500 तक पहुंच गया था भाव
सितंबर के आखिरी दिनों में बाजार भाव 2200 से 2400 रुपये था। 1 अक्तूबर से खरीद की घोषणा शुरू होने के बाद यह 2300 से 2500 रुपये तक पहुंच गया था लेकिन भावांतर की घोषणा और सरकारी खरीद न होने से भाव अब 2100 से 2240 रुपये पर है। आने वाले दिनों में आवक बढ़ने की संभावना है, ऐसे में भाव और गिर सकते हैं।
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इलेक्ट्रिक झरने से सफाई की शर्त हो रहा घाटा
हैफेड बाजरा तभी खरीद रही है जब उसकी इलेक्ट्रिक झरने से सफाई हो। इस सफाई पर प्रति क्विंटल 150 रुपये तक मजदूरी लगती है जबकि सामान्य खरीद में यह खर्च सिर्फ 10 रुपये आता है। यानी एमएसपी पर बेचने के बाद भी किसान के हाथ में 2700 से 2750 रुपये ही आएंगे जो 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान है।
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बोली में सिर्फ 1-1 रुपये की बढ़ोतरी
व्यापारी बोली में सिर्फ 1-1 रुपये बढ़ा रहे थे। मेरा 40 क्विंटल बाजरा 2241 रुपये में बिका। विकल्प नहीं है, इसलिए कम दाम पर बेचना मजबूरी है।-किशन छक्कर, किसान, मोहल्ला नलापुर
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हैफेड अधिकारी नहीं मिले
हैफेड को खरीद के निर्देश के बाद भी खरीद नहीं हो रही। गेटपास कटवाने के बाद अधिकारियों को ढूंढता रहा, कहीं नहीं मिले। फिर व्यापारी को जे-फार्म पर 2240 रुपये में बाजरा बेचा।-शिव कुमार, किसान, गांव दनचौली
नारनौल में 245, नांगल चौधरी में 8 गेटपास
मंगलवार को नारनौल में 245 और नांगल चौधरी में 8 गेटपास जारी हुए। नारनौल में करीब 6500 क्विंटल और नांगल चौधरी में 210 क्विंटल बाजरे की आवक हुई। अब तक नांगल चौधरी में 240 और नारनौल में करीब 1500 क्विंटल की खरीद हो चुकी है।
वर्जन
सरकारी खरीद के लिए गुणवत्ता के मापदंड तय हैं। उन्हीं के आधार पर मंडी में आने वाले बाजरे की जांच हो रही है। किसानों से अपील है कि बाजरा मंडी में लाने से पहले अच्छी तरह साफ कर लें।-प्रवीण भारद्वाज, जिला प्रबंधक, हैफेड, नारनौल
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सरकारी खरीद न होने से व्यापारी जे-फार्म पर 2100 से 2240 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बाजरा खरीद रहे हैं। सरकार भावांतर के 600 रुपये प्रति क्विंटल किसानों के खाते में डालेगी लेकिन बाजार भाव कम होने से इसे जोड़कर भी पूरा एमएसपी नहीं मिल रहा। कोई और विकल्प न होने से किसानों को मजबूरी में कम भाव पर फसल बेचनी पड़ रही है।
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2500 तक पहुंच गया था भाव
सितंबर के आखिरी दिनों में बाजार भाव 2200 से 2400 रुपये था। 1 अक्तूबर से खरीद की घोषणा शुरू होने के बाद यह 2300 से 2500 रुपये तक पहुंच गया था लेकिन भावांतर की घोषणा और सरकारी खरीद न होने से भाव अब 2100 से 2240 रुपये पर है। आने वाले दिनों में आवक बढ़ने की संभावना है, ऐसे में भाव और गिर सकते हैं।
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इलेक्ट्रिक झरने से सफाई की शर्त हो रहा घाटा
हैफेड बाजरा तभी खरीद रही है जब उसकी इलेक्ट्रिक झरने से सफाई हो। इस सफाई पर प्रति क्विंटल 150 रुपये तक मजदूरी लगती है जबकि सामान्य खरीद में यह खर्च सिर्फ 10 रुपये आता है। यानी एमएसपी पर बेचने के बाद भी किसान के हाथ में 2700 से 2750 रुपये ही आएंगे जो 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान है।
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बोली में सिर्फ 1-1 रुपये की बढ़ोतरी
व्यापारी बोली में सिर्फ 1-1 रुपये बढ़ा रहे थे। मेरा 40 क्विंटल बाजरा 2241 रुपये में बिका। विकल्प नहीं है, इसलिए कम दाम पर बेचना मजबूरी है।-किशन छक्कर, किसान, मोहल्ला नलापुर
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हैफेड अधिकारी नहीं मिले
हैफेड को खरीद के निर्देश के बाद भी खरीद नहीं हो रही। गेटपास कटवाने के बाद अधिकारियों को ढूंढता रहा, कहीं नहीं मिले। फिर व्यापारी को जे-फार्म पर 2240 रुपये में बाजरा बेचा।-शिव कुमार, किसान, गांव दनचौली
नारनौल में 245, नांगल चौधरी में 8 गेटपास
मंगलवार को नारनौल में 245 और नांगल चौधरी में 8 गेटपास जारी हुए। नारनौल में करीब 6500 क्विंटल और नांगल चौधरी में 210 क्विंटल बाजरे की आवक हुई। अब तक नांगल चौधरी में 240 और नारनौल में करीब 1500 क्विंटल की खरीद हो चुकी है।
वर्जन
सरकारी खरीद के लिए गुणवत्ता के मापदंड तय हैं। उन्हीं के आधार पर मंडी में आने वाले बाजरे की जांच हो रही है। किसानों से अपील है कि बाजरा मंडी में लाने से पहले अच्छी तरह साफ कर लें।-प्रवीण भारद्वाज, जिला प्रबंधक, हैफेड, नारनौल