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Mahendragarh-Narnaul News: अस्पताल में इलाज के लिए आएं तो मरहम-पट्टी साथ लाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़। प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि नागरिक अस्पताल में मरहम और पट्टी तक भी उपलब्ध नहीं है। मरीजों को चोट लगने या हड्डियां आदि टूट जाने पर बाजार से ही स्वयं खरीदकर लानी पड़ रही है। ऐसा लगभग डेढ़-दो माह से चल रहा है।
वहीं अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से एक्सरे मशीन से जुड़ा यूपीएस भी खराब है, जिससे एक्सरे भी नहीं हो पा रहे। अस्पताल के पास बजट नहीं होने की वजह से उधार में सामान भी नहीं आ रहा। अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ जैसे-तैसे इमरजेंसी में काम चला रहे हैं। हालात यह हैं कि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर केवल औपचारिकता हो रही है। लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ रहीं मिल रहा।
नागरिक अस्पताल के अंतर्गत लगभग 104 गांव और 25 ढाणियां आती हैं। कनीना क्षेत्र के कुछ गांवों के लोग भी इसी अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। पिछले काफी दिनों से अस्पताल के हड्डी व जोड़ विभाग के पास मरहम-पट्टी तक नहीं है। हड्डी जोड़ने के लिए उपयोग में आने वाला प्लास्टर का सामान भी उपलब्ध नहीं है। सूजन कम करने की दवाइयां, सूजन पर लगाने वाला मरहम सहित कुछ अन्य दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को बाहर से ही सामान खरीदकर लाना पड़ रहा है।
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संसाधनों के अभाव में मरीजों की संख्या भी घट गई है। पांच-छह महीने पहले अस्पताल के अंदर हड्डी और जोड़ विभाग के चिकित्सकों के पास 100 से 125 मरीजों की ओपीडी होती थी, लेकिन संसाधनों के अभाव में यह ओपीडी मात्र 30 से 35 रह गई है। अगर हालात यही बने रहे तो अस्पताल में इस ओपीडी की संख्या 10 से 15 ही रह जाएगी। मरीजों को चिकित्सकों का लाभ नहीं मिल पाएगा।
बाहर से कराने पड़ रहे एक्सरे
पिछले एक सप्ताह से अस्पताल के अंदर एक्सरे रूम में लगा यूपीएस खराब हो गया है, जिस वजह से अस्पताल में एक्सरे मशीन बंद पड़ी है। मरीजों को अपने निजी खर्च पर बाहर से 300 रुपये में एक्सरे करवाकर लाना पड़ रहा है।
फोटो खींचकर व्हाट्स एप ग्रुप पर डाला जाता है एक्सरे
अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से एक्सरे की फिल्म नहीं है। एक सप्ताह पूर्व तक रेडियोग्राफर पर्ची पर ही रिपोर्ट लिखकर देते थे। सूत्रों के अनुसार अस्पताल में आर्थो चिकित्सकों एवं संबंधित स्टाफ का व्हाट्स एप ग्रुप बनाया हुआ है। डिजिटल एक्सरे मशीन से एक्सरे कर उसका फोटो खींचकर ग्रुप में डाल दिया जाता और चिकित्सक उस ग्रुप से ही एक्सरे को देखकर उसकी रिपोर्ट बताता।
यह बोले मरीज
मैं 20 किलोमीटर धनौंदा गांव से अस्पताल में पैर की टूटी अंगुली के इलाज के लिए आया था। यहां एक्सरे मशीन खराब बताई जा रही है। अब मैं बाहर से 300 रुपये में एक्सरे करवाकर लाया हूं। सरकारी अस्पताल में मरीजों को सामान्य सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं, फिर यह कैसा अस्पताल है।
- मनदीप सिंह
25 किलोमीटर दूर सतनाली से आया हूं। पोते के हाथ में फ्रैक्चर है, उसके इलाज के लिए आया हूं। एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। पोते का एक्सरे बाजार से करवाकर लाया हूं। सरकारी अस्पताल में गरीब तबके के लोग आते हैं। सरकार को अस्पताल में सुविधाएं बढ़ानी चाहिए, ताकि मरीज परेशान न हो।
-मुरारी लाल
गिरने से मेरे हाथ में चोट लगी है। चिकित्सक ने प्लास्टर करवाने की सलाह दी है। अस्पताल में प्लास्टर के लिए पट्टी, रूई आदि की सुविधा नहीं है और एक्सरे मशीन भी खराब पड़ी है। एक्सरे और प्लास्टर पर लगभग 800 रुपये का खर्च आया है। इतने बड़े अस्पताल में मरहम-पट्टी नहीं तो यह बड़ी हैरानी की बात है।
- अनूप, निवासी खायरा।
हमने अस्पताल की दवाइयां और पट्टी आदि सामान के लिए वेयरहाउस को रिमाइंडर भेजा हुआ है। स्थानीय स्तर पर दवाइयां खरीद ले, इतना हमारे पास बजट नहीं है। एक्सरे मशीन का यूपीएस खराब हो गया है, उसको कल तक ठीक करवा दिया जाएगा। हमने एक्सरे की फिल्म मंगवा ली है।
- डॉ. मोनू यादव, प्रवर चिकित्सा प्रभारी।
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महेंद्रगढ़। प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि नागरिक अस्पताल में मरहम और पट्टी तक भी उपलब्ध नहीं है। मरीजों को चोट लगने या हड्डियां आदि टूट जाने पर बाजार से ही स्वयं खरीदकर लानी पड़ रही है। ऐसा लगभग डेढ़-दो माह से चल रहा है।
वहीं अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से एक्सरे मशीन से जुड़ा यूपीएस भी खराब है, जिससे एक्सरे भी नहीं हो पा रहे। अस्पताल के पास बजट नहीं होने की वजह से उधार में सामान भी नहीं आ रहा। अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ जैसे-तैसे इमरजेंसी में काम चला रहे हैं। हालात यह हैं कि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर केवल औपचारिकता हो रही है। लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ रहीं मिल रहा।
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नागरिक अस्पताल के अंतर्गत लगभग 104 गांव और 25 ढाणियां आती हैं। कनीना क्षेत्र के कुछ गांवों के लोग भी इसी अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। पिछले काफी दिनों से अस्पताल के हड्डी व जोड़ विभाग के पास मरहम-पट्टी तक नहीं है। हड्डी जोड़ने के लिए उपयोग में आने वाला प्लास्टर का सामान भी उपलब्ध नहीं है। सूजन कम करने की दवाइयां, सूजन पर लगाने वाला मरहम सहित कुछ अन्य दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को बाहर से ही सामान खरीदकर लाना पड़ रहा है।
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संसाधनों के अभाव में मरीजों की संख्या भी घट गई है। पांच-छह महीने पहले अस्पताल के अंदर हड्डी और जोड़ विभाग के चिकित्सकों के पास 100 से 125 मरीजों की ओपीडी होती थी, लेकिन संसाधनों के अभाव में यह ओपीडी मात्र 30 से 35 रह गई है। अगर हालात यही बने रहे तो अस्पताल में इस ओपीडी की संख्या 10 से 15 ही रह जाएगी। मरीजों को चिकित्सकों का लाभ नहीं मिल पाएगा।
बाहर से कराने पड़ रहे एक्सरे
पिछले एक सप्ताह से अस्पताल के अंदर एक्सरे रूम में लगा यूपीएस खराब हो गया है, जिस वजह से अस्पताल में एक्सरे मशीन बंद पड़ी है। मरीजों को अपने निजी खर्च पर बाहर से 300 रुपये में एक्सरे करवाकर लाना पड़ रहा है।
फोटो खींचकर व्हाट्स एप ग्रुप पर डाला जाता है एक्सरे
अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से एक्सरे की फिल्म नहीं है। एक सप्ताह पूर्व तक रेडियोग्राफर पर्ची पर ही रिपोर्ट लिखकर देते थे। सूत्रों के अनुसार अस्पताल में आर्थो चिकित्सकों एवं संबंधित स्टाफ का व्हाट्स एप ग्रुप बनाया हुआ है। डिजिटल एक्सरे मशीन से एक्सरे कर उसका फोटो खींचकर ग्रुप में डाल दिया जाता और चिकित्सक उस ग्रुप से ही एक्सरे को देखकर उसकी रिपोर्ट बताता।
यह बोले मरीज
मैं 20 किलोमीटर धनौंदा गांव से अस्पताल में पैर की टूटी अंगुली के इलाज के लिए आया था। यहां एक्सरे मशीन खराब बताई जा रही है। अब मैं बाहर से 300 रुपये में एक्सरे करवाकर लाया हूं। सरकारी अस्पताल में मरीजों को सामान्य सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं, फिर यह कैसा अस्पताल है।
- मनदीप सिंह
25 किलोमीटर दूर सतनाली से आया हूं। पोते के हाथ में फ्रैक्चर है, उसके इलाज के लिए आया हूं। एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। पोते का एक्सरे बाजार से करवाकर लाया हूं। सरकारी अस्पताल में गरीब तबके के लोग आते हैं। सरकार को अस्पताल में सुविधाएं बढ़ानी चाहिए, ताकि मरीज परेशान न हो।
-मुरारी लाल
गिरने से मेरे हाथ में चोट लगी है। चिकित्सक ने प्लास्टर करवाने की सलाह दी है। अस्पताल में प्लास्टर के लिए पट्टी, रूई आदि की सुविधा नहीं है और एक्सरे मशीन भी खराब पड़ी है। एक्सरे और प्लास्टर पर लगभग 800 रुपये का खर्च आया है। इतने बड़े अस्पताल में मरहम-पट्टी नहीं तो यह बड़ी हैरानी की बात है।
- अनूप, निवासी खायरा।
हमने अस्पताल की दवाइयां और पट्टी आदि सामान के लिए वेयरहाउस को रिमाइंडर भेजा हुआ है। स्थानीय स्तर पर दवाइयां खरीद ले, इतना हमारे पास बजट नहीं है। एक्सरे मशीन का यूपीएस खराब हो गया है, उसको कल तक ठीक करवा दिया जाएगा। हमने एक्सरे की फिल्म मंगवा ली है।
- डॉ. मोनू यादव, प्रवर चिकित्सा प्रभारी।