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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि ने रेडी-टू-सर्व ड्रिंक के लिए किया तकनीकी लाइसेंस समझौता
Fri, 01 Aug 2025 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 01 Aug 2025 11:53 PM IST
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फोटो संख्या:64- तकनीकी करार को हस्तांतरित करते कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व संजय जाखड़--स्रोत-
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने कचरी आधारित रेडी-टू-सर्व (आरटीएस) पेय उत्पाद की तकनीक के लिए मेसर्स आरसीआईसीओ लिवेबल सेवन ब्लू रिफॉर्म फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड झज्जर के साथ समझौता किया है।
दोनों संस्थानों के बीच टेक्नोलाॅजी लाइसेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। एग्रीमेंट पर हकेंवि की ओर से विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने तथा कंपनी की ओर से निदेशक संजय जाखड़ ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी नवीन और सतत खाद्य तकनीक को समाज और उद्योग तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय द्वारा अनुसंधान आधारित समाधान को व्यावहारिक स्वरूप में लाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पोषण जीवविज्ञान विभाग द्वारा विकसित यह कचरी आधारित रेडी-टू-सर्व पेय उत्पाद न केवल किसानों को लाभ देगा, बल्कि उद्यमियों को भी इससे नया उत्पाद विकसित करने का अवसर उपलब्ध कराएगा।
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विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने वाली फसल का इस तरह से उपयोग एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इस पहल से किसानों एवं उद्यमियों के लिए उत्पादन और मूल्य संवर्धन के नए अवसर उपलब्ध होंगे। संजय जाखड़ ने कहा कि हकेंवि के साथ सांझेदारी कर प्रयोगशाला से बाजार तक इस नवाचार को लाने का अवसर मिला है। कचरी जैसी फसल जो अक्सर बर्बाद हो जाती है, उसे वैज्ञानिक रूप से उपयोग कर पेय उत्पाद बनाना खाद्य उद्योग के लिए एक वरदान साबित होगा।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि यह समझौता इस बात का साक्ष्य है कि कैसे विश्वविद्यालयों की शोध क्षमता व्यवहारिक जरूरतों की पूर्ति में मददगार हो सकती है। डाॅ. अनीता कुमारी व सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग के प्रो. सुरेंद्र सिंह, डाॅ. दीपिका ने इस तकनीक का आविष्कार किया है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने के कारण फंक्शनल फूड और वैल्यू एडेड उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है।
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दोनों संस्थानों के बीच टेक्नोलाॅजी लाइसेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। एग्रीमेंट पर हकेंवि की ओर से विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने तथा कंपनी की ओर से निदेशक संजय जाखड़ ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी नवीन और सतत खाद्य तकनीक को समाज और उद्योग तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय द्वारा अनुसंधान आधारित समाधान को व्यावहारिक स्वरूप में लाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पोषण जीवविज्ञान विभाग द्वारा विकसित यह कचरी आधारित रेडी-टू-सर्व पेय उत्पाद न केवल किसानों को लाभ देगा, बल्कि उद्यमियों को भी इससे नया उत्पाद विकसित करने का अवसर उपलब्ध कराएगा।
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विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने वाली फसल का इस तरह से उपयोग एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इस पहल से किसानों एवं उद्यमियों के लिए उत्पादन और मूल्य संवर्धन के नए अवसर उपलब्ध होंगे। संजय जाखड़ ने कहा कि हकेंवि के साथ सांझेदारी कर प्रयोगशाला से बाजार तक इस नवाचार को लाने का अवसर मिला है। कचरी जैसी फसल जो अक्सर बर्बाद हो जाती है, उसे वैज्ञानिक रूप से उपयोग कर पेय उत्पाद बनाना खाद्य उद्योग के लिए एक वरदान साबित होगा।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि यह समझौता इस बात का साक्ष्य है कि कैसे विश्वविद्यालयों की शोध क्षमता व्यवहारिक जरूरतों की पूर्ति में मददगार हो सकती है। डाॅ. अनीता कुमारी व सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग के प्रो. सुरेंद्र सिंह, डाॅ. दीपिका ने इस तकनीक का आविष्कार किया है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने के कारण फंक्शनल फूड और वैल्यू एडेड उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है।