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कैंसर अस्पताल की घोषणा कर भूली सरकार
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क्षेत्र में तीन वर्ष पहले की गई कैंसर अस्पताल खोलने की घोषणा कर सरकार भूल गई। अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई। हकीकत तो यह है कि प्रशासन, विधायक एवं पूर्व मंत्री को इस घोषणा के बारे में नहीं बता। यही कारण रहा है कि तीन वर्षों में कैंसर अस्पताल को लेकर कोई पत्राचार शुरू नहीं हो पाया। कैंसर का कोई अस्पताल पास नहीं होने से मरीजों को 150 से 200 किलोमीटर दूर जाकर इलाज करवाना पड़ता था। इससे उनको आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रही है। अब प्रदेश सरकार ने टोहाना और अंबाला में कैंसर अस्पताल खोलने की घोषणा कर दी है। इस घोषणा से महेंद्रगढ़ कैंसर अस्पताल पर संकट के बादल मंडारा रहे हैं। अगर नेताओं ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की तो यह अस्पताल महेंद्रगढ़ में देखने को नहीं मिलेेगा। बता दें कि 29 जुलाई 2017 को भिवानी में मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी थी। इस मौके पर तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा (वर्तमान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने 45-45 करोड़ रुपये से महेंद्रगढ़ और मेवात में कैंसर अस्पताल खोलने की घोषणा की थी। उस समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी उनके साथ थे। ये दोनों ही अस्पताल केंद्र सरकार की ओर से खोले जाने थे। इस घोषणा को तीन वर्ष का समय बीत गया है, अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही किसी सांसद एवं विधायक ने इस संबंध में कभी जिक्र किया। हालांकि यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा बनाया जाना है। सांसद ने भी अभी तक किसी बजट सत्र या फिर सदन में इस मामले को नहीं उठाया। केंद्र सरकार की ओर से झज्जर के गांव बाढ़सा में पहले खोला जा चुका है। महेंद्रगढ़ और मेवात में इसकी घोषणा पहले हो चुकी है और अंबाला और टोहाना की घोषणा हो गई है। एक छोटे से प्रदेश में पांच-पांच कैंसर अस्पताल खोलना संभव नहीं है। इससे महेंद्रगढ़ और मेवात के अस्पतालों पर संशय पैदा हो गया है।
150 से 200 किलोमीटर दूर जाकर करवाना पड़ता है इलाज:
बता दें कि जिला महेंद्रगढ़ में कैंसर के मरीज बहुत हैं। इन मरीजों को इलाज के लिए 150 से 200 किलोमीटर दूर दिल्ली या जयपुर इलाज करवाने के लिए जाना पड़ता है। वैसे भी कैंसर का इलाज बहुत महंगा होता है। एक मरीज पर आठ से दस लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। सबसे अधिक परेशानी तो गरीब तबके मरीजों को होती है जो पैसों के अभाव में इतनी दूर जाकर इलाज नहीं करवा पाते। इलाज के अभाव में उनके मरीज की मौत हो जाती है। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़ का यह एक बड़ी सौगात दी थी ताकि यहां के मरीजों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े।
न तो प्रशासन, न ही जन प्रतिनिधियों को घोषणा के बारे में जानकारी:
इस घोषणा के बारे में न तो यहां के जन प्रतिनिधियों को और न ही प्रशासन को इसकी जानकारी। उपायुक्त और सीएमओ से इस संबंध में बात की गई तो उनको भी इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी नहीं है। सांसद एवं विधायकों को इसकी जानकारी थी। इसी वजह से प्रोजेक्ट पर विधायक एवं सांसद ने आज तक कोई पैरवी नहीं की। अगर इनको पता होता तो 2017 के बाद जिले में मुख्यमंत्री चार रैली हो चुकी हैं उनमें इसकी पैरवी की जा सकती थी। एक रैली तो 16 फरवरी को ही दौंगड़ा में की गई है। नेताओं की पैरवी नहीं की गई।
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मैं इस संबंध में गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से बात करूंगा। बृहस्पतिवार को भी मैंने फोन किया था लेकिन बजट सत्र चलने के कारण उनसे बात नहीं हो पाई। कैंसर अस्पताल को महेंद्रगढ़ स्थापित करवाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा। - रामबिलास शर्मा, पूर्व शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री।
महेंद्रगढ़ में कैंसर अस्पताल की घोषणा का मुझे कोई ध्यान नहीं है। इस संबंध में कभी कोई दस्तावेज भी हमारे पास नहीं आया है। -जगदीश शर्मा, उपायुक्त महेंद्रगढ़।
कैंसर अस्पताल के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। हमारे पास अभी तक कोई कागज भी नहीं आया है। इसलिए इसके बारे में कुछ नहीं बता सकता। -अशोक कुमार, सीएमओ, महेंद्रगढ़।
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150 से 200 किलोमीटर दूर जाकर करवाना पड़ता है इलाज:
बता दें कि जिला महेंद्रगढ़ में कैंसर के मरीज बहुत हैं। इन मरीजों को इलाज के लिए 150 से 200 किलोमीटर दूर दिल्ली या जयपुर इलाज करवाने के लिए जाना पड़ता है। वैसे भी कैंसर का इलाज बहुत महंगा होता है। एक मरीज पर आठ से दस लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। सबसे अधिक परेशानी तो गरीब तबके मरीजों को होती है जो पैसों के अभाव में इतनी दूर जाकर इलाज नहीं करवा पाते। इलाज के अभाव में उनके मरीज की मौत हो जाती है। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़ का यह एक बड़ी सौगात दी थी ताकि यहां के मरीजों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े।
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न तो प्रशासन, न ही जन प्रतिनिधियों को घोषणा के बारे में जानकारी:
इस घोषणा के बारे में न तो यहां के जन प्रतिनिधियों को और न ही प्रशासन को इसकी जानकारी। उपायुक्त और सीएमओ से इस संबंध में बात की गई तो उनको भी इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी नहीं है। सांसद एवं विधायकों को इसकी जानकारी थी। इसी वजह से प्रोजेक्ट पर विधायक एवं सांसद ने आज तक कोई पैरवी नहीं की। अगर इनको पता होता तो 2017 के बाद जिले में मुख्यमंत्री चार रैली हो चुकी हैं उनमें इसकी पैरवी की जा सकती थी। एक रैली तो 16 फरवरी को ही दौंगड़ा में की गई है। नेताओं की पैरवी नहीं की गई।
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मैं इस संबंध में गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से बात करूंगा। बृहस्पतिवार को भी मैंने फोन किया था लेकिन बजट सत्र चलने के कारण उनसे बात नहीं हो पाई। कैंसर अस्पताल को महेंद्रगढ़ स्थापित करवाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा। - रामबिलास शर्मा, पूर्व शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री।
महेंद्रगढ़ में कैंसर अस्पताल की घोषणा का मुझे कोई ध्यान नहीं है। इस संबंध में कभी कोई दस्तावेज भी हमारे पास नहीं आया है। -जगदीश शर्मा, उपायुक्त महेंद्रगढ़।
कैंसर अस्पताल के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। हमारे पास अभी तक कोई कागज भी नहीं आया है। इसलिए इसके बारे में कुछ नहीं बता सकता। -अशोक कुमार, सीएमओ, महेंद्रगढ़।