{"_id":"5de6b16a8ebc3e54fd32ecb7","slug":"four-arrested-narnol-news-rtk5306306184","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयुष्मान भारत में नाम जोड़ने में धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के चार सदस्य काबू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आयुष्मान भारत में नाम जोड़ने में धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के चार सदस्य काबू
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आयुष्मान भारत की एंट्री फ्रॉड यूनिट ने आयुष्मान भारत के नाम जोड़ने वाले गिरोह के चार सदस्यों को मंगलवार को काबू किया है। आरोपियों के पास से 3900 रुपये, फार्म समेत अन्य सामान बरामद हुआ है। टीम ने चारों को आरोपियों को अटेली थाना पुलिस के हवाले कर दिया है। जिले में आयुष्मान के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का यह पहला मामला सामने आया है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान भारत के फर्जी गोल्डन कार्ड बनाने की एक शिकायत ट्विटर पर रवि नामक के युवक से विभाग को मिली थी। शिकायत को मद्देनजर रखते हुए विभाग सर्तक था। इसी दौरान विभाग को मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे एक गुप्त सूचना मिली। जिसमें तुर्कीयावास गांव में कार्ड बनाने की बात बताई गई। इस पर सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आयुष्मान भारत योजना की एंटी फ्रॉड टीम के सदस्य उप सिविल सर्जन डॉ. धर्मंश कुमार सैनी व जिला सूचना प्रबंधक उमेश सैनी को कार्रवाई करने के आदेश दिए। सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने बताया कि एंटी फ्रॉड टीम ने गांव तुर्कीयावास में फर्जी गोल्डन कार्ड बनाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को दोपहर 12 बजे पकड़ा।
सीएमओ ने बताया कि आरोपी आयुष्मान भारत योजना में नाम जोडने के नाम पर गांव के करीब 130 लोगों से 30 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से लगभग 3900 रुपये एकत्रित कर चुके थे। उप सिविल सर्जन डॉ. धर्मेश कुमार सैनी ने आरोपियों से सरकार द्वारा दी गई अनुमति पत्र दिखाने के लिए कहा। जिस पर उन लोगों के पास कोई भी अनुमति पत्र नहीं मिले। इसके बाद गांव के सरपंच व अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति में पुलिस बुलाकर फर्जी तरीके से नाम जोड़वाने व गोल्डन कार्ड बनाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सिविल सर्जन ने बताया कि इसमें एसईसीसी - 2011 के सर्वे के आधार पर ही लाभार्थी सूची बनाई गई है जो आयुष्मान भारत योजना के सॉफ्टवेयर पर उपलब्ध है।
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इसके अलावा किसी भी व्यक्ति एवं परिवार का नाम नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि इस तरह की जालसाजी से बचें। ऐसी किसी भी गतिविधि होने पर तुरंत आयुष्मान भारत के जिला सूचना प्रबंधक के मोबाइल नंबर 7340033670 पर फोन कर सूचित करें। थाना प्रभारी राजेंद्र ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद केस दर्ज किया जाएगा। आरोपी 30 नवंबर से कार्य कर रहे थे।
ऐसे चल रहा था खेल, मुख्य आरोपी बादशापुर का
अटेली थाना प्रभारी राजेंद्र कौशल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस प्रकार का मामला कई गांवों में चल रहा है। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि इस कार्य का मुख्य आरोपी बादशाहपुर (गुरुग्राम) का कोई नरेंद्र है। आरोपी ने आगे कार्य किसी और को ठेका दिया है। दूसरे ठेकेदार ने तीसरे को काम दे दिया। तीसरे ने युवकों को गांव में जाकर आयुष्मान भारत में नाम जोड़ने का कार्य सौंप दिया। इसके बाद युवक इस कार्य में चल गए। युवकों से पूछताछ की जा रही है।
युवकों को एक फार्म के तीन रुपये मिलते थे
पुलिस के अनुसार आरोपी एक व्यक्ति से 39 रुपये लेते थे। इसमें से फार्म भरवाने वाले को तीन रुपये, सुपरवाइजर को दो रुपये व ठेकेदार पांच रुपये लेता था। ऐसे में बीस रुपये आगे के ठेकेदार को देने पड़ते थे। थाना प्रभारी ने बताया कि मुख्य आरोपी के बारे में जानकरी जुटाई जा रही है। इसके उपर भी कोई या नहीं। दूसरी गडियार व बजाड़ गांव में भी ऐसी शिकायत मिली है। यहां पर आरोपी योजना से संबंधित पंपलेट बांट रहे थे। कुछ लोगों ने बताया कि आरोपी 50 रुपये एक व्यक्ति से ले रहे थे।
मुनादी के लिए फोन करते थे
पूछताछ में पता चला है कि आरोपी सरकारी एजेंसी का हवाला देते थे। आरोपियों ने लोगों से कहा था कि आवेदन भरने के बाद पंचकूला से कार्ड बनकर आएगा। इसे लेकर सलीमपुर गांव के सरपंच के पास फोन आया था कि आयुष्मान योजना में नाम जोड़ने वाली टीम आने वाली है। गांव में मुनादी कराब ें। दूसरी गडियार व बजाड़ गांव में भी ऐसी शिकायत मिली है।
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आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान भारत के फर्जी गोल्डन कार्ड बनाने की एक शिकायत ट्विटर पर रवि नामक के युवक से विभाग को मिली थी। शिकायत को मद्देनजर रखते हुए विभाग सर्तक था। इसी दौरान विभाग को मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे एक गुप्त सूचना मिली। जिसमें तुर्कीयावास गांव में कार्ड बनाने की बात बताई गई। इस पर सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आयुष्मान भारत योजना की एंटी फ्रॉड टीम के सदस्य उप सिविल सर्जन डॉ. धर्मंश कुमार सैनी व जिला सूचना प्रबंधक उमेश सैनी को कार्रवाई करने के आदेश दिए। सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने बताया कि एंटी फ्रॉड टीम ने गांव तुर्कीयावास में फर्जी गोल्डन कार्ड बनाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को दोपहर 12 बजे पकड़ा।
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सीएमओ ने बताया कि आरोपी आयुष्मान भारत योजना में नाम जोडने के नाम पर गांव के करीब 130 लोगों से 30 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से लगभग 3900 रुपये एकत्रित कर चुके थे। उप सिविल सर्जन डॉ. धर्मेश कुमार सैनी ने आरोपियों से सरकार द्वारा दी गई अनुमति पत्र दिखाने के लिए कहा। जिस पर उन लोगों के पास कोई भी अनुमति पत्र नहीं मिले। इसके बाद गांव के सरपंच व अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति में पुलिस बुलाकर फर्जी तरीके से नाम जोड़वाने व गोल्डन कार्ड बनाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सिविल सर्जन ने बताया कि इसमें एसईसीसी - 2011 के सर्वे के आधार पर ही लाभार्थी सूची बनाई गई है जो आयुष्मान भारत योजना के सॉफ्टवेयर पर उपलब्ध है।
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इसके अलावा किसी भी व्यक्ति एवं परिवार का नाम नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि इस तरह की जालसाजी से बचें। ऐसी किसी भी गतिविधि होने पर तुरंत आयुष्मान भारत के जिला सूचना प्रबंधक के मोबाइल नंबर 7340033670 पर फोन कर सूचित करें। थाना प्रभारी राजेंद्र ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद केस दर्ज किया जाएगा। आरोपी 30 नवंबर से कार्य कर रहे थे।
ऐसे चल रहा था खेल, मुख्य आरोपी बादशापुर का
अटेली थाना प्रभारी राजेंद्र कौशल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस प्रकार का मामला कई गांवों में चल रहा है। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि इस कार्य का मुख्य आरोपी बादशाहपुर (गुरुग्राम) का कोई नरेंद्र है। आरोपी ने आगे कार्य किसी और को ठेका दिया है। दूसरे ठेकेदार ने तीसरे को काम दे दिया। तीसरे ने युवकों को गांव में जाकर आयुष्मान भारत में नाम जोड़ने का कार्य सौंप दिया। इसके बाद युवक इस कार्य में चल गए। युवकों से पूछताछ की जा रही है।
युवकों को एक फार्म के तीन रुपये मिलते थे
पुलिस के अनुसार आरोपी एक व्यक्ति से 39 रुपये लेते थे। इसमें से फार्म भरवाने वाले को तीन रुपये, सुपरवाइजर को दो रुपये व ठेकेदार पांच रुपये लेता था। ऐसे में बीस रुपये आगे के ठेकेदार को देने पड़ते थे। थाना प्रभारी ने बताया कि मुख्य आरोपी के बारे में जानकरी जुटाई जा रही है। इसके उपर भी कोई या नहीं। दूसरी गडियार व बजाड़ गांव में भी ऐसी शिकायत मिली है। यहां पर आरोपी योजना से संबंधित पंपलेट बांट रहे थे। कुछ लोगों ने बताया कि आरोपी 50 रुपये एक व्यक्ति से ले रहे थे।
मुनादी के लिए फोन करते थे
पूछताछ में पता चला है कि आरोपी सरकारी एजेंसी का हवाला देते थे। आरोपियों ने लोगों से कहा था कि आवेदन भरने के बाद पंचकूला से कार्ड बनकर आएगा। इसे लेकर सलीमपुर गांव के सरपंच के पास फोन आया था कि आयुष्मान योजना में नाम जोड़ने वाली टीम आने वाली है। गांव में मुनादी कराब ें। दूसरी गडियार व बजाड़ गांव में भी ऐसी शिकायत मिली है।