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Mahendragarh-Narnaul News: 45 करोड़ खर्च होने के बाद भी खेतों में नहीं पहुंचा पानी

Tue, 09 Apr 2024 02:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 09 Apr 2024 02:07 AM IST
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Even after spending Rs 45 crore, water did not reach the fields
महेंद्रगढ़। दो वर्ष पूर्व दो विभाग 45 करोड़ रुपये की लागत से सूक्ष्म सिंचाई के लिए तैयार की गई परियोजना का किसानों तक लाभ नहीं पहुंचा पाए हैं। सिंचाई विभाग व सूक्ष्म सिंचाई विभाग की ओर से छह गांवों में टैंकों का निर्माण कर किसानों की 2100 एकड़ भूमि को सूक्ष्म सिंचाई के लिए योजना तैयार की गई थी, लेकिन पर्याप्त नहरी पानी के अभाव में महज 300 एकड़ भूमि पर ही सिंचाई हो रही है। ऐसे में परियोजना में लगे उपकरण भी धूल फांकने लगे हैं। वर्तमान में भगड़ाना-पाली नहर में महज 80 क्यूसेक पानी तक ही छोड़ा जा रहा है जबकि इस परियोजना को शुरू करने के लिए 120 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है।
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तीन वर्ष पूर्व बनाए गए थे 25 करोड़ की लगात से टैंक
तीन वर्ष पूर्व सिंचाई विभाग ने निंभेड़ा प्रेशराइजड पाइपलाइन तथा इस पर 6 गांवों में पक्के वाटर टैंकों का निर्माण किया था। इस परियोजना पर करीब 25 करोड़ की लागत आई थी। वहीं सूक्ष्म सिंचाई विभाग ने इन सभी 6 टैंकों पर अपना सूक्ष्म सिंचाई आधारित उपकरण लगाए थे। विकास एवं निगरानी समिति सदस्य संदीप मालड़ा बताया कि गांव बुडीन, बलाना, जेरपुर, मांडोला, नांगल माला तथा ऊष्मापुर में बनाए गए छह टैंकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। इन टैंकों से 2100 एकड़ की बजाए महज 300 एकड़ में ही सिंचाई हो रही है। सभी टैंकों में खातौदड़ा स्थित पंप हाउस नंबर एमडी-5 से निंभेड़ा प्रेशराइजड पाइपलाइन से नहरी पानी पहुंचता है। निंबेहड़ा प्रेशराइजड पाइपलाइन तथा इन टैंकों के निर्माण पर लगभग 25 करोड़ की लागत आई थी व हर टैंक पर सूक्ष्म सिंचाई का प्रोजेक्ट लगाने में 3 करोड़ की लागत आई थी। इस गांव बुडीन, ढाढोत, बलायचा, बलाना, राजावास, ऊष्मापुर व नांगल माला का एक-एक जोहड़ भी जोड़ा गया है। सभी पक्के टैंकों के साथ एक रिचार्ज बोर भी किया गया है जिससे बरसात के समय में टैंक से ओवरफ्लो पानी इस रिचार्ज बोर में जा सके जिससे भूजल स्तर में सुधार हो।
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यह बनी हुई है बाधा, नहीं मिल रहा परियोजना का लाभ
विकास एवं निगरानी समिति सदस्य संदीप मालड़ा ने बताया कि इस परियोजना का पूरा लाभ लेने के लिए पाथेड़ा एमसी-5 से पूरा पानी नहीं मिल रहा है। जेएलएन पाथेड़ा एमसी-5 से महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी को महज 80 क्यूसेक तक पानी मिल रहा है। लेकिन इस नहर की क्षमता को बढ़ाकर करीब 170 क्यूसेक किया जाना चाहिए जिससे नहरी पानी पूरा मिलने से यह परियोजना किसानों के लिए वरदान साबित हो सके।
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यह है परियोजनों का विवरण
इस समय कुराहवटा पंप हाउस को 120 क्यूसेक पानी नहीं छोड़ा जा रहा है जिसके कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। निंभेड़ा प्रेशराइजड पाइपलाइन से जोड़े गए छह गांवों के टैंकों में पर्याप्त नहरी पानी का अभाव है जिसे दूर करने के बाद ही इसका लाभ मिल सकेगा। एक टैंक से लगभग 350 एकड़ भूमि होगी सिंचित, पूरे चक में छोड़ी गई हैं 100 टी, खेतों में पानी पहुंचाने के लिए हर टैंक में लगाई गई हैं सोलर आधारित .5 क्यूसेक की 6 मोटर, निंभेड़ा प्रेशराइजड पाइपलाइन से 7 जोहड़ भी जोड़े गए हैं।

इस परियोजना के माध्यम से किसानों को पूरा लाभ देने के लिए कम से कम 120 क्यूसेक पानी की जरूरत है। अभी सिर्फ 60 से 80 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। ऐसे में सभी वाटर टैंकों में नहरी पानी का अभाव बना हुआ है। नहरी पानी के अभाव में इस परियोजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विजेंद्र सिंह, उपमंडल अधिकारी सूक्ष्म सिंचाई विभाग महेंद्रगढ़।
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