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Mahendragarh-Narnaul News: स्वच्छ छवि और जनता से जुड़ाव ने कंवर की राह की आसान
Thu, 10 Oct 2024 01:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 10 Oct 2024 01:45 AM IST
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फोटो संख्या:61- भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह यादव--संवाद
महेंद्रगढ़। दो दिग्गजों के बीच से निकलकर महेंद्रगढ़ विधानसभा से विधायक बने भाजपा नेता कंवर सिंह यादव की यह जीत कई मायनों में खास है। कंवर सिंह ने पिछलेे 42 साल से महेंद्रगढ़ सीट पर दो नेताओं के चली आ रही चौधर को खत्म किया है।
भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक कंवर सिंह यादव को उनकी स्वच्छ छवि और आम जनता से जुड़ाव का फायदा मिला है। चुनाव में जब भाजपा ने प्रोफेसर रामबिलास शर्मा का टिकट काटा तब जनता को राव दान सिंह के खिलाफ विकल्प मिल गया। ऊपर से महेंद्रगढ़ क्षेत्र में भाजपा का बिना पर्ची-बिना खर्ची का जादू भी युवाओं के सिर चढ़कर बोला। आमजन में पकड़ व साधारण छवि ने कंवर सिंह की ताकत को और अधिक बढ़ा दिया। वहीं, दूसरी तरफ अहीरवार की राजनीति ने हमेशा से ही नॉन जाट के सीएम चेहरे के लिए लड़ाई लड़ी है। इसका लाभ भी सीधे भाजपा प्रत्याशी को मिला है। इस बीच सीएम नायब सैनी के विधानसभा में पांच बार पहुंचने और लोगों से सीधा संवाद करने से भी भाजपा को ताकत मिली।
दो नेताओं की चौधर से बाहर निकलना चाहती थी जनता
महेंद्रगढ़ में पिछले 42 साल से दो नेता ही राज करते आ रहे थे। पिछले नौ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से राव दान सिंह व भाजपा की ओर से प्रो. रामबिलास शर्मा के बीच सीधी टक्कर रही थी। अब लोग भी बदलाव का मन बना चुके थे।
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अति आत्मविश्वास और विकास न होना दानसिंह पर पड़ा भारी
महेंद्रगढ़ विधानसभा सीट पर चार बार कांग्रेस को जीत दिलाने वाले राव दान सिंह ने 2019 में विधायक बनने के बाद गुरुग्राम में अधिक समय बिताया। कांग्रेस की आपसी फूट व सीएम चेहरे को लेकर भी कांग्रेस का वोटबैंक काफी प्रभावित हुआ। विपक्षी विधायक होने के कारण पिछले पांच साल में विकास कार्याें में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इससे लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता कम होती चली गई। यही नहीं लोकसभा चुनावों के बाद राव के ठिकानों पर पड़ी ईडी की रेड व संपत्ति अटेच करना भी काफी चर्चाओं में रहा था। विधायक कोटे से डी प्लान के तहत शहरी में दी गई करीब 80 लाख की राशि भी नपा के पार्षदों की आपसी खींचतान के कारण शहर के विकास पर नहीं लग पाई, जिसके कारण शहरी वोटबैंक खिसक गया। वहीं, कांग्रेस महेंद्रगढ़ क्षेत्र के राजपूत व सैनी वोटबैंक को साधने में नाकाम रही जिसका खामियाजा हार से भुगतना पड़ा।
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भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक कंवर सिंह यादव को उनकी स्वच्छ छवि और आम जनता से जुड़ाव का फायदा मिला है। चुनाव में जब भाजपा ने प्रोफेसर रामबिलास शर्मा का टिकट काटा तब जनता को राव दान सिंह के खिलाफ विकल्प मिल गया। ऊपर से महेंद्रगढ़ क्षेत्र में भाजपा का बिना पर्ची-बिना खर्ची का जादू भी युवाओं के सिर चढ़कर बोला। आमजन में पकड़ व साधारण छवि ने कंवर सिंह की ताकत को और अधिक बढ़ा दिया। वहीं, दूसरी तरफ अहीरवार की राजनीति ने हमेशा से ही नॉन जाट के सीएम चेहरे के लिए लड़ाई लड़ी है। इसका लाभ भी सीधे भाजपा प्रत्याशी को मिला है। इस बीच सीएम नायब सैनी के विधानसभा में पांच बार पहुंचने और लोगों से सीधा संवाद करने से भी भाजपा को ताकत मिली।
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दो नेताओं की चौधर से बाहर निकलना चाहती थी जनता
महेंद्रगढ़ में पिछले 42 साल से दो नेता ही राज करते आ रहे थे। पिछले नौ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से राव दान सिंह व भाजपा की ओर से प्रो. रामबिलास शर्मा के बीच सीधी टक्कर रही थी। अब लोग भी बदलाव का मन बना चुके थे।
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अति आत्मविश्वास और विकास न होना दानसिंह पर पड़ा भारी
महेंद्रगढ़ विधानसभा सीट पर चार बार कांग्रेस को जीत दिलाने वाले राव दान सिंह ने 2019 में विधायक बनने के बाद गुरुग्राम में अधिक समय बिताया। कांग्रेस की आपसी फूट व सीएम चेहरे को लेकर भी कांग्रेस का वोटबैंक काफी प्रभावित हुआ। विपक्षी विधायक होने के कारण पिछले पांच साल में विकास कार्याें में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इससे लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता कम होती चली गई। यही नहीं लोकसभा चुनावों के बाद राव के ठिकानों पर पड़ी ईडी की रेड व संपत्ति अटेच करना भी काफी चर्चाओं में रहा था। विधायक कोटे से डी प्लान के तहत शहरी में दी गई करीब 80 लाख की राशि भी नपा के पार्षदों की आपसी खींचतान के कारण शहर के विकास पर नहीं लग पाई, जिसके कारण शहरी वोटबैंक खिसक गया। वहीं, कांग्रेस महेंद्रगढ़ क्षेत्र के राजपूत व सैनी वोटबैंक को साधने में नाकाम रही जिसका खामियाजा हार से भुगतना पड़ा।

फोटो संख्या:61- भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह यादव--संवाद