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संसार में सभी जड़ चेतन जीव मनुष्य के अधीन : लक्ष्मण दास
Wed, 28 Aug 2024 02:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 28 Aug 2024 02:45 AM IST
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नारनौल। मोहल्ला चौधरीयान में चल रही श्रीराम कथा में तीसरे मंगलवार को बरसाना से पधारे लक्ष्मण दास महाराज ने भक्तों को कथा के माध्यम से जीवन जीने का मार्ग दिखाया। कथा में सर्वप्रथम मुख्य यजमान आकाश चौधरी ने सपत्निक पूजन किया।
कथा का शुभारंभ करते हुए लक्ष्मण दास ने बताया कि संसार में जितने भी जड़ चेतन जीव हैं, वह सभी मनुष्य के अधीन हैं। मनुष्य किसी के अधीन नहीं है। फिर भी मनुष्य पराधीन बना रहता है और वह भी स्वयं के लिए नहीं बल्कि पर के लिए पराधीन बना रहता है। ऐसा केवल उसकी अपनी विवेक हीनता के कारण होता है।
विवेकशील मनुष्य को यह पता है कि उसे यह जीवन सुंदर कर्म करते हुए सद कर्मों के माध्यम से अपने सुंदर प्रारब्ध का निर्माण करने के लिए प्राप्त हुआ है। श्री रामकथा के माध्यम से भारतीय और पूरी दुनिया के सनातन समाज में अलख जगाने के लिए कथावाचक लक्ष्मण दास महाराज ने कहा कि हमारा जीवन कैसे सफल हो सकता है, हमारे शास्त्रों में और हमारे अन्य ग्रंथों में इसकी विस्तृत व्याख्या है।
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सुभाषित में कहा गया है कि मनुष्य जब तक सोता रहता है तो वह कलयुग में जीता है। जाग गया तो द्वापर में पहुंच जाता है और उठ कर खड़ा हो जाए तो वह त्रेता में पहुंच जाता है। वही मनुष्य जब सत्कर्म के पथ पर आगे बढ़ जाता है तो सतयुग में प्रवेश कर जाता है। उन्होंने बताया कि हमारे जीवन को व्यवस्थित करने के लिए ऋषि परंपरा में ब्रह्मचर्य गृहस्थ सन्यास और वानप्रस्थाश्रम की चर्चा है। इसके अतिरिक्त व्यास स्मृति में मनुष्य के लिए 16 संस्कार बताए गए हैं।
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कथा का शुभारंभ करते हुए लक्ष्मण दास ने बताया कि संसार में जितने भी जड़ चेतन जीव हैं, वह सभी मनुष्य के अधीन हैं। मनुष्य किसी के अधीन नहीं है। फिर भी मनुष्य पराधीन बना रहता है और वह भी स्वयं के लिए नहीं बल्कि पर के लिए पराधीन बना रहता है। ऐसा केवल उसकी अपनी विवेक हीनता के कारण होता है।
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विवेकशील मनुष्य को यह पता है कि उसे यह जीवन सुंदर कर्म करते हुए सद कर्मों के माध्यम से अपने सुंदर प्रारब्ध का निर्माण करने के लिए प्राप्त हुआ है। श्री रामकथा के माध्यम से भारतीय और पूरी दुनिया के सनातन समाज में अलख जगाने के लिए कथावाचक लक्ष्मण दास महाराज ने कहा कि हमारा जीवन कैसे सफल हो सकता है, हमारे शास्त्रों में और हमारे अन्य ग्रंथों में इसकी विस्तृत व्याख्या है।
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सुभाषित में कहा गया है कि मनुष्य जब तक सोता रहता है तो वह कलयुग में जीता है। जाग गया तो द्वापर में पहुंच जाता है और उठ कर खड़ा हो जाए तो वह त्रेता में पहुंच जाता है। वही मनुष्य जब सत्कर्म के पथ पर आगे बढ़ जाता है तो सतयुग में प्रवेश कर जाता है। उन्होंने बताया कि हमारे जीवन को व्यवस्थित करने के लिए ऋषि परंपरा में ब्रह्मचर्य गृहस्थ सन्यास और वानप्रस्थाश्रम की चर्चा है। इसके अतिरिक्त व्यास स्मृति में मनुष्य के लिए 16 संस्कार बताए गए हैं।