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Kurukshetra News: संतान की लंबी उम्र के लिए आज महिलाएं रखेंगी अहोई अष्टमी का व्रत
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कुरुक्षेत्र। बाजार में अहोई अष्टमी व्रत की कथा का केलेंडर खरीदती महिलाएं। संवाद
कुरुक्षेत्र। अहोई अष्टमी पर्व के चलते बाजार में दिन भर खूब चहल पहल बनी रही, जिससे दुकानों पर भीड़भाड़ का माहौल देखने को मिला। बाजार में पहुंची महिलाओं ने जमकर अहोई अष्टमी पर्व के लिए पूजा-अर्चना का सामान खरीदा। संतान की लंबी उम्र के लिए महिलाएं अहोई अष्टमी का व्रत रखती है। इस व्रत को अल सुबह सरगी खाकर रखने की प्राचीन परंपरा है, जो कि सदियों से निभाई जा रही है। देर रात तारे व चांद की पूजा करने के बाद ही यह व्रत पूरा होता है, इस दौरान दिनभर महिलाओं का व्रत जारी रहता है। बाजार में पहुंची महिलाओं ने अहोई अष्टमी की कथा के लिए कैलेंडर व अन्य पूजा की सामग्री खरीदी। जबकि कई महिलाएं मिट्टी से बने पूजा के पात्र खरीदने में रुचि लेती दिखाई दी। हालांकि दूसरी धातुओं से बने पूजा के पात्र भी दुकानों पर मौजूद थे, लेकिन महिलाओं ने मिट्टी के पात्रों को ही ज्यादा खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। बाजार में पांच रुपये से लेकर 200 रुपये तक के व्रत कथा के कैलेंडर व पोस्टर उपलब्ध रहे। जबकि 30 रुपये से लेकर 150 रुपये तक के मिट्टी से बने बर्तन भी आकर्षण का केंद्र बने रहे।
अहोई अष्टमी माता मां पार्वती का स्वरूप : प्रियंका
प्रियंका का कहना है कि अहोई अष्टमी पर्व पर पूजा अर्चना के लिए मिट्टी के बर्तनों को ही खरीदने की सदियों पुरानी परंपरा है, क्योंकि मिट्टी से बने बर्तन शुभ होते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। अहोई माता मां पार्वती का ही स्वरूप हैं। देर शाम कथा की जाती है और इसके पश्चात देर रात तारे व चांद को देखकर पूजा की जाती है, इसके बाद ही व्रत पूरा होता है।
कथा के बाद ही पीया जाता है जल : कविता रानी
कविता रानी ने बताया कि संतान की लंबी उम्र के लिए महिलाएं हर साल अहोई अष्टमी का व्रत रखती है, इसके लिए अल सुबह स्नान व पूजा अर्चना कर सरगी खाई जाती है और फिर पूरा दिन जल तक नहीं पिया जाता। शाम को व्रत की कथा करने के बाद ही पानी ग्रहण किया जाता है। जबकि देर रात तारे व चांद के दीदार कर पूजा की जाती है। इस दौरान मिट्टी के दो पात्रों को लिया जाता है, जिसमें एक में मिठाई और दूसरे में जल होता है।
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महिलाओं ने खरीदे व्रत कथा के कैलेंडर : राकेश कुमार
कारोबारी राकेश कुमार का कहना है कि वे पिछले 40 वर्षों से दीपावली के सामान को लेकर कारोबार कर रहे है। इस बार महिलाएं अहोई अष्टमी के दौरान व्रत कथा के कैलेंडर व पोस्टर खरीदने में काफी रुचि दिखा रही है। दुकान पर 20 से ज्यादा डिजाइनों में अहोई अष्टमी के कैलेंडर व पोस्टर मौजूद है, जो कि पांच रुपये से शुरु होते है और 200 रुपये तक के दामों में उपलब्ध है।
संतान की आयु होती है लंबी : प्रेम कुमार
पंडित प्रेम कुमार शर्मा का कहना है कि संतान की लंबी उम्र के लिए अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है, जो कि कार्तिक मास की अष्टमी को होता है। इस दिन व्रत रखने के लिए अल सुबह सरगी खाने के बाद यह व्रत रखा जाता है जो कि देर रात तारे व चांद की पूजा के बाद ही पूर्ण होता है। माता अहोई मां पार्वती का ही रूप है। इसलिए इस दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा की जाती है।
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अहोई अष्टमी माता मां पार्वती का स्वरूप : प्रियंका
प्रियंका का कहना है कि अहोई अष्टमी पर्व पर पूजा अर्चना के लिए मिट्टी के बर्तनों को ही खरीदने की सदियों पुरानी परंपरा है, क्योंकि मिट्टी से बने बर्तन शुभ होते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। अहोई माता मां पार्वती का ही स्वरूप हैं। देर शाम कथा की जाती है और इसके पश्चात देर रात तारे व चांद को देखकर पूजा की जाती है, इसके बाद ही व्रत पूरा होता है।
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कथा के बाद ही पीया जाता है जल : कविता रानी
कविता रानी ने बताया कि संतान की लंबी उम्र के लिए महिलाएं हर साल अहोई अष्टमी का व्रत रखती है, इसके लिए अल सुबह स्नान व पूजा अर्चना कर सरगी खाई जाती है और फिर पूरा दिन जल तक नहीं पिया जाता। शाम को व्रत की कथा करने के बाद ही पानी ग्रहण किया जाता है। जबकि देर रात तारे व चांद के दीदार कर पूजा की जाती है। इस दौरान मिट्टी के दो पात्रों को लिया जाता है, जिसमें एक में मिठाई और दूसरे में जल होता है।
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महिलाओं ने खरीदे व्रत कथा के कैलेंडर : राकेश कुमार
कारोबारी राकेश कुमार का कहना है कि वे पिछले 40 वर्षों से दीपावली के सामान को लेकर कारोबार कर रहे है। इस बार महिलाएं अहोई अष्टमी के दौरान व्रत कथा के कैलेंडर व पोस्टर खरीदने में काफी रुचि दिखा रही है। दुकान पर 20 से ज्यादा डिजाइनों में अहोई अष्टमी के कैलेंडर व पोस्टर मौजूद है, जो कि पांच रुपये से शुरु होते है और 200 रुपये तक के दामों में उपलब्ध है।
संतान की आयु होती है लंबी : प्रेम कुमार
पंडित प्रेम कुमार शर्मा का कहना है कि संतान की लंबी उम्र के लिए अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है, जो कि कार्तिक मास की अष्टमी को होता है। इस दिन व्रत रखने के लिए अल सुबह सरगी खाने के बाद यह व्रत रखा जाता है जो कि देर रात तारे व चांद की पूजा के बाद ही पूर्ण होता है। माता अहोई मां पार्वती का ही रूप है। इसलिए इस दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा की जाती है।

कुरुक्षेत्र। बाजार में अहोई अष्टमी व्रत की कथा का केलेंडर खरीदती महिलाएं। संवाद

कुरुक्षेत्र। बाजार में अहोई अष्टमी व्रत की कथा का केलेंडर खरीदती महिलाएं। संवाद

कुरुक्षेत्र। बाजार में अहोई अष्टमी व्रत की कथा का केलेंडर खरीदती महिलाएं। संवाद