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लाडवा, पिहोवा और शाहाबाद के 189 गांव में लगाए जाएंगे जल प्रवाह मीटर, रेनगेज और जलस्तर संकेतक
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Water flow meters, ranges and water level indicators to be installed in 189 villages of Ladwa, Pehowa and Shahabad
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। अटल भूजल योजना के तहत सिंचाई और जल संसाधन विभाग शाहाबाद, लाडवा और पिहोवा के 189 गांवों में जल प्रवाह मीटर, रेनगेज, जलस्तर संकेतक तथा पीजोमीटर लगाने की तैयारी में है। वहीं जिला कार्यान्वयन भागीदार टीम ग्रामीण क्षेत्रों में जल परीक्षण किट भी वितरित कर रही है।
भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन ने बताया कि भूजल प्रबंधन के लिए जल भर (एक्वीफर) के डिस्चार्ज रेट जांचने के लिए 189 गांवों में वाटर फ्लो मीटर लगाया जा रहा है। इसके साथ ही जिले के 189 गांवों में 1890 जल प्रवाह मीटर भी लगाए जाएंगे, जो पल-पल की पाइप से गुजरने वाले पानी की मात्रा को मापने का काम करेंगे। यह जल प्रवाह मीटर किसानों के तीन-चार इंच के नलकूपों पर लगाया जाएगा और किसान इन प्रवाह मीटर का स्वामी होगा।
इतना ही नहीं, हर एक गांव के आसपास लगभग 10 वाटर फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। इसके अलावा इन गांव में 189 रेनगेज भी लगाए जाएंगे, जिसकी मदद से मौसम व जल वैज्ञानिक वर्षा की मात्रा को माप सकेंगे। डॉ. नवीन नैन ने बताया कि रेनगेज का उपयोग एक इकाई क्षेत्र में होने वाली वर्षा की गहराई को निर्धारित करने और इस प्रकार वर्षा की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि पीजोमीटर प्रेशर ट्रांसड्यूसर होते हैं, जो भूजल स्तर, मिट्टी या चट्टान के भीतर उप सतह पाईजोमेट्रिक स्तर को मापने के लिए जमीन के नीचे स्थापित किए जाएंगे। भूजल विशेषज्ञ ने बताया कि जिला कार्यान्वयन भागीदार टीम द्वारा ग्रामीणों और जल समिति के उत्कृष्ट सुझावों से ग्राम स्तर पर जल सुरक्षा योजना तैयार की गई। इनमें पिहोवा की 41, लाडवा की 34 तथा शाहाबाद से 38 जल सुरक्षा योजना शामिल हैं।
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भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन ने बताया कि भूजल प्रबंधन के लिए जल भर (एक्वीफर) के डिस्चार्ज रेट जांचने के लिए 189 गांवों में वाटर फ्लो मीटर लगाया जा रहा है। इसके साथ ही जिले के 189 गांवों में 1890 जल प्रवाह मीटर भी लगाए जाएंगे, जो पल-पल की पाइप से गुजरने वाले पानी की मात्रा को मापने का काम करेंगे। यह जल प्रवाह मीटर किसानों के तीन-चार इंच के नलकूपों पर लगाया जाएगा और किसान इन प्रवाह मीटर का स्वामी होगा।
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इतना ही नहीं, हर एक गांव के आसपास लगभग 10 वाटर फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। इसके अलावा इन गांव में 189 रेनगेज भी लगाए जाएंगे, जिसकी मदद से मौसम व जल वैज्ञानिक वर्षा की मात्रा को माप सकेंगे। डॉ. नवीन नैन ने बताया कि रेनगेज का उपयोग एक इकाई क्षेत्र में होने वाली वर्षा की गहराई को निर्धारित करने और इस प्रकार वर्षा की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि पीजोमीटर प्रेशर ट्रांसड्यूसर होते हैं, जो भूजल स्तर, मिट्टी या चट्टान के भीतर उप सतह पाईजोमेट्रिक स्तर को मापने के लिए जमीन के नीचे स्थापित किए जाएंगे। भूजल विशेषज्ञ ने बताया कि जिला कार्यान्वयन भागीदार टीम द्वारा ग्रामीणों और जल समिति के उत्कृष्ट सुझावों से ग्राम स्तर पर जल सुरक्षा योजना तैयार की गई। इनमें पिहोवा की 41, लाडवा की 34 तथा शाहाबाद से 38 जल सुरक्षा योजना शामिल हैं।