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गांव जलबेहड़ा ः समस्याओं के समाधान का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Nov 2022 01:36 AM IST
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Village Jalbehera: Waiting for the solution of the problems, Kurukshetra
गांव का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। नेशनल हाईवे-152 पर बसा ऐतिहासिक गांव जलबेहड़ा कई समस्याओं के समाधान का इंतजार देख रहा है। गांव के लिए हाईवे ही उसकी समस्या का सबसे बड़ा कारण बन गया है। इसके अलावा आसपास के तीन अन्य गांव नैसी, टबरा और शेरगढ़ के ग्रामीण भी कई समस्याओं का दंश झेल रहे हैं। दरअसल, गांव से गुजर रहे हाईवे पर दोनों तरफ कहीं भी कोई सर्विसलेन नहीं है। इस कारण यहां आए दिन हादसे हो रहे हैं। समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण कई बार अधिकारियों से लेकर नेताओं के कार्यालय तक के चक्कर काट चुके हैं, मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव से हाईवे बनने के दौरान गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का कुछ हिस्सा उसमें आ गया। इससे स्कूल का क्षेत्र कम हो गया है और खेल मैदान छोटा पड़ा गया है। वहीं हाईवे पर स्कूल होने के कारण हादसों होने का डर भी लगा रहता है। इसके अलावा गांव में गंदे पानी के निकासी की समस्या भी बड़ी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि नई पंचायत इन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करेगी।
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बता दें जलबेहड़ा मारकंडा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक गांव है, जिसकी आबादी करीब चार हजार है। गांव में करीब 2100 मतदाता और नौ वार्ड है। गांव में ऋषि मारकंडेश्वर का ऐतिहासिक मंदिर है, जहां पर हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को मेला लगता है। इस मेले में दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं गांव में बाबा मनसा पुरी की समाधि है। ग्रामीणों की मान्यता है कि बाबा मनसा ने जग कल्याण के लिए जिंदा समाधि ली थी।
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हाईवे पर बनाया जाए अंडरब्रिज
ग्रामीण बलदेव शर्मा ने बताया कि गांव के पास हाईवे पर सर्विस लेन न होने के कारण रोजाना हादसे होते हैं। कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं तो कई लोग अपाहिज हो चुके हैं। सर्विस लेन की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों और नेताओं से गुहार लगा चुके हैं, मगर समस्या जस की तस बनी हुई है। मांग है कि गांव के पास अंडर ब्रिज ही बना दिया जाए ताकि हादसे न हो।

दूसरी जगह बनाया जाए सरकारी स्कूल
ग्रामीण जोनी पुरी ने बताया कि गांव के सरकारी स्कूल को दूसरी जगह बनाया जाना चाहिए, क्योंकि हाईवे के कारण कभी भी किसी हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं दूसरी ओर स्कूल का खेल मैदान काफी छोटा है। पंचायत की ओर से स्कूल के निर्माण के लिए छह एकड़ जमीन दी गई है, सरकार और शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई अमल में नहीं ला रहे हैं। अब नई पंचायत से कुछ उम्मीदें जगी हैं।
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