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गांव दयालपुर को विकास की दरकार
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गांव दयालपुर स्थित बाणगंगा तीर्थ। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। म्हारा गांव जगमग गांव योजना से प्रदेश में सबसे पहले रोशन होने वाला एंव शहर से सटा गांव दयालपुर आज तक भी विकास से जगमग नहीं हो पाया है। हालांकि यहां गांव की कमान संभालती रही ग्राम पंचायतों ने अपने-अपने स्तर पर विकास के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन आज भी अनेकों विकास कार्यों की दरकार बनी हुई है। ग्रामीण अब नई ग्राम पंचायत से उम्मीद लगाने लगे हैं।
यह पंचायत भी विकास की कितनी रोशनी गांव के लोगों को दे पाएगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन चुनाव मैदान में उतरे योद्वा गांव की कायाकल्प किए जाने का दम भर रहे हैं। ग्रामीणों को भी इन पर भरोसा है, लेकिन किन्हें गांव की कमान मिल पाएगी, यह चुनाव के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
वर्ष 2015 में प्रदेश सरकार ने पूरे बिल भरने पर 24 घंटे बिजली देने को लेकर म्हारा गांव जगमग गांव योजना शुरू की थी। इस योजना की शुरूआत इसी गांव से मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने की थी। हालांकि गांव में आज भी पर्याप्त बिजली आपूर्ति मिल रही है, लेकिन साफ-सफाई से लेकर कई अन्य विकास कार्य किए जाने की जरूरत है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव का इतिहास महाभारतकालीन है। यहां अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की सैय्या पर घायल अवस्था में जमीन में तीर मारकर जल की धारा प्रवाहित करते हुए उन्हें पानी पिलाया था। इसी के चलते यहां पर बाणगंगा तीर्थ भी स्थित है और यहां हर वर्ष मेला भी लगता है। लेकिन यह तीर्थ बदहाल हो चुका है, जिसके जीर्णोद्धार की जरूरत है। उधर तीर्थ के साथ ही स्थित कुंती झील का भी कोई जीर्णोद्धार नहीं किया जा सका तो अमृत सरोवर के तौर पर तालाब को भी वह रूप नहीं मिल पाया है।
स्कूल किया जाना चाहिए अपग्रेड
ग्रामीण जसवंत बताते हैं कि कभी यहां स्थित प्राथमिक स्कूल में आसपास के गांव के बच्चे भी आते थे, इसके बावजूद यह स्कूल आठवीं कक्षा से आगे नहीं बढ़ पाया। ऐसे में इसी गांव के बच्चों को ही दूसरे गांवों के स्कूलों पर अगली पढ़ाई के लिए निर्भर होना पड़ रहा है। स्कूल को अपग्रेड किए जाने की मांग मुख्यमंत्री तक भी पहुंची हुई है।
चुनाव का भाईचारे पर असर नहीं
गांववासी रामचंद्र का कहना है कि गांव में करीब 30 साल पहले एक बार सर्वसम्मति से सरंचप बनाया गया था, जिससे पहले व बाद में चुनाव ही होते रहे हैं। इस बार भी चुनाव होंगे और सभी उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। चुनाव का गांव के भाईचारे पर कोई असर नही पड़ता। भाईचारा ज्यों का त्यों कायम है। यहां सभी मिल-जुलकर रहते हैं।
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कुरुक्षेत्र। म्हारा गांव जगमग गांव योजना से प्रदेश में सबसे पहले रोशन होने वाला एंव शहर से सटा गांव दयालपुर आज तक भी विकास से जगमग नहीं हो पाया है। हालांकि यहां गांव की कमान संभालती रही ग्राम पंचायतों ने अपने-अपने स्तर पर विकास के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन आज भी अनेकों विकास कार्यों की दरकार बनी हुई है। ग्रामीण अब नई ग्राम पंचायत से उम्मीद लगाने लगे हैं।
यह पंचायत भी विकास की कितनी रोशनी गांव के लोगों को दे पाएगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन चुनाव मैदान में उतरे योद्वा गांव की कायाकल्प किए जाने का दम भर रहे हैं। ग्रामीणों को भी इन पर भरोसा है, लेकिन किन्हें गांव की कमान मिल पाएगी, यह चुनाव के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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वर्ष 2015 में प्रदेश सरकार ने पूरे बिल भरने पर 24 घंटे बिजली देने को लेकर म्हारा गांव जगमग गांव योजना शुरू की थी। इस योजना की शुरूआत इसी गांव से मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने की थी। हालांकि गांव में आज भी पर्याप्त बिजली आपूर्ति मिल रही है, लेकिन साफ-सफाई से लेकर कई अन्य विकास कार्य किए जाने की जरूरत है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव का इतिहास महाभारतकालीन है। यहां अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की सैय्या पर घायल अवस्था में जमीन में तीर मारकर जल की धारा प्रवाहित करते हुए उन्हें पानी पिलाया था। इसी के चलते यहां पर बाणगंगा तीर्थ भी स्थित है और यहां हर वर्ष मेला भी लगता है। लेकिन यह तीर्थ बदहाल हो चुका है, जिसके जीर्णोद्धार की जरूरत है। उधर तीर्थ के साथ ही स्थित कुंती झील का भी कोई जीर्णोद्धार नहीं किया जा सका तो अमृत सरोवर के तौर पर तालाब को भी वह रूप नहीं मिल पाया है।
स्कूल किया जाना चाहिए अपग्रेड
ग्रामीण जसवंत बताते हैं कि कभी यहां स्थित प्राथमिक स्कूल में आसपास के गांव के बच्चे भी आते थे, इसके बावजूद यह स्कूल आठवीं कक्षा से आगे नहीं बढ़ पाया। ऐसे में इसी गांव के बच्चों को ही दूसरे गांवों के स्कूलों पर अगली पढ़ाई के लिए निर्भर होना पड़ रहा है। स्कूल को अपग्रेड किए जाने की मांग मुख्यमंत्री तक भी पहुंची हुई है।
चुनाव का भाईचारे पर असर नहीं
गांववासी रामचंद्र का कहना है कि गांव में करीब 30 साल पहले एक बार सर्वसम्मति से सरंचप बनाया गया था, जिससे पहले व बाद में चुनाव ही होते रहे हैं। इस बार भी चुनाव होंगे और सभी उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। चुनाव का गांव के भाईचारे पर कोई असर नही पड़ता। भाईचारा ज्यों का त्यों कायम है। यहां सभी मिल-जुलकर रहते हैं।