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पशोपेश में फंसा विभाग-स्कूल बंद करें या चलाएं
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Thu, 28 Jul 2016 01:02 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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यहां छात्रों का टोटा बना हुआ है तो शिक्षकों की भी भारी कमी है। फिर भी सरकारी स्कूलों को खींचा जा रहा है। इन स्कूलों को चलाया जाए या बंद किया जाए, इसको लेकर विभाग के अधिकारी भी पशोपेश में फंसे हुए है। जिला के थानेसर खंड के 11 प्राथमिक स्कूल ऐसे हालात से गुजर रहे है जबकि माना जा रहा है कि जिले भर में ऐसे स्कूलों की संख्या दर्जनों में है। ऐसा भी नहीं कि इन स्कूलों की इस हालत से अधिकारी अनजान है। विभाग के निदेशालय तक इन स्कूलों स्थिति से अवगत है, फिर भी इनके सुधार को लेकर कोई ठोस प्रयास होता दिखाई नहीं दे रहा है।
थानेसर के इन स्कूलों में से एक स्कूल में महज 6 बच्चे ही पढ़ाई कर रहे है तो वहंी एक स्कूल में 7 बच्चों का दाखिला है। विभाग की ओर से सूचिबद्ध किए गए इन स्कूलों में सबसे अधिक संख्या गांव समसपुर के स्कूल की है जहां 49 बच्चे पढ़ाई कर रहे है। हैरत की बात यह भी है कि इन सभी स्कूलों के प्रबंधन से लेकर बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा भी महज एक-एक शिक्षक को ही दिया हुआ है। जिसमें समसपुर के स्कूल में तो आरटीई की ओर से निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात भी बेमानी सा लगता है। 49 छात्रों वाले इस स्कूल में भी विभाग आज तक दूसरे शिक्षक का प्रबंध नहीं कर पाया है।
न शिक्षक बढ़े, न बच्चे
यह भी माना जा रहा है कि स्कूलों में बच्चों की संख्या शिक्षक न होने के कारण नहीं बढ़ पा रही है जबकि विभाग बच्चों की संख्या न बढ़ पाने के कारण अन्य शिक्षकों की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। ये हालात तब है जब अप्रैल माह में विभाग की ओर से मनाए गए प्रवेश उत्सव के चलते छात्रों की संख्या बढ़ाए जाने पर भरपूर जोर दिया गया था।
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दूसरे कार्यों में व्यस्त शिक्षक तो बच्चे रहते है खाली
इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों को विभागीय दिशा-निर्देशों के चलते विभिन्न कार्यों को पूरा करना होता है। स्कूल कार्य व रिकार्ड ऑनलाइन करने से लेकर दूसरे गैर शिक्षक कार्यों को भी उसी शिक्षक को निपटाना पड़ता है और जब तक शिक्षक स्कूल नहीं लौट पाता व दूसरे कार्य से फ्री नहीं होता तो बच्चों को अक्सर खाली ही बैठना पड़ता है। जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि भले ही इन स्कूलों में बच्चे कम हो, लेकिन उनकी भी पढ़ाई पूरी व्यवस्था न होने के चलते बाधित हो रही है। जिसे कई शिक्षक भी स्वीकार कर रहे है।
विभाग को भेजी है रिपोर्ट : कौशिक
खंड शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है कि इन स्कूलों में छात्रों की भारी कमी है तो वहीं व्यवस्था को लेकर भी कुछ कमियां है। पूरी स्थिति के बारे में रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी हुई है। विभाग की ओर से जो भी निर्देश मिलेंगे उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की ओर से मिली जानकारी के तहत गांव अनुसार प्राथमिक स्कूलों की स्थिति
गांव छात्र संख्या
अढोनी 17
बीड़ मथाना 34
धूपसड़ी 13
हसनपुर 27
इंदबड़ी 17
ईशाकपुर 21
रामनगर 12
समसपुर 49
सलारपुर 10
शादीपुर सैयदा 07
सौंठी 06
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थानेसर के इन स्कूलों में से एक स्कूल में महज 6 बच्चे ही पढ़ाई कर रहे है तो वहंी एक स्कूल में 7 बच्चों का दाखिला है। विभाग की ओर से सूचिबद्ध किए गए इन स्कूलों में सबसे अधिक संख्या गांव समसपुर के स्कूल की है जहां 49 बच्चे पढ़ाई कर रहे है। हैरत की बात यह भी है कि इन सभी स्कूलों के प्रबंधन से लेकर बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा भी महज एक-एक शिक्षक को ही दिया हुआ है। जिसमें समसपुर के स्कूल में तो आरटीई की ओर से निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात भी बेमानी सा लगता है। 49 छात्रों वाले इस स्कूल में भी विभाग आज तक दूसरे शिक्षक का प्रबंध नहीं कर पाया है।
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न शिक्षक बढ़े, न बच्चे
यह भी माना जा रहा है कि स्कूलों में बच्चों की संख्या शिक्षक न होने के कारण नहीं बढ़ पा रही है जबकि विभाग बच्चों की संख्या न बढ़ पाने के कारण अन्य शिक्षकों की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। ये हालात तब है जब अप्रैल माह में विभाग की ओर से मनाए गए प्रवेश उत्सव के चलते छात्रों की संख्या बढ़ाए जाने पर भरपूर जोर दिया गया था।
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दूसरे कार्यों में व्यस्त शिक्षक तो बच्चे रहते है खाली
इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों को विभागीय दिशा-निर्देशों के चलते विभिन्न कार्यों को पूरा करना होता है। स्कूल कार्य व रिकार्ड ऑनलाइन करने से लेकर दूसरे गैर शिक्षक कार्यों को भी उसी शिक्षक को निपटाना पड़ता है और जब तक शिक्षक स्कूल नहीं लौट पाता व दूसरे कार्य से फ्री नहीं होता तो बच्चों को अक्सर खाली ही बैठना पड़ता है। जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि भले ही इन स्कूलों में बच्चे कम हो, लेकिन उनकी भी पढ़ाई पूरी व्यवस्था न होने के चलते बाधित हो रही है। जिसे कई शिक्षक भी स्वीकार कर रहे है।
विभाग को भेजी है रिपोर्ट : कौशिक
खंड शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है कि इन स्कूलों में छात्रों की भारी कमी है तो वहीं व्यवस्था को लेकर भी कुछ कमियां है। पूरी स्थिति के बारे में रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी हुई है। विभाग की ओर से जो भी निर्देश मिलेंगे उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की ओर से मिली जानकारी के तहत गांव अनुसार प्राथमिक स्कूलों की स्थिति
गांव छात्र संख्या
अढोनी 17
बीड़ मथाना 34
धूपसड़ी 13
हसनपुर 27
इंदबड़ी 17
ईशाकपुर 21
रामनगर 12
समसपुर 49
सलारपुर 10
शादीपुर सैयदा 07
सौंठी 06