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...तो आसानी से नसीब नहीं होगा पीने का पानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 01:24 AM IST
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...then drinking water will not be easily available
...then drinking water will not be easily available - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। पानी के अंधाधुंध दोहन से साल दर साल जिले का भूजल स्तर तेजी गिरता जा रहा है। यहीं स्थित रही तो वह दिन दूर नहीं जब पीने का पानी आसानी से नसीब नहीं होगा। हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की ओर से (जून 2010-जून-2020 तक) जारी रिपोर्ट में चिंताजनक हालात सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में कुरुक्षेत्र का 97.57 फीसदी क्षेत्र यानी जिले के 432 गांव में से 421 गांव रेड जोन में शामिल हैं।
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जिले का एकमात्र गांव मुरादानगर (लाडवा) ऐसा गांव है, जो 20 मीटर भूजल स्तर के साथ लाइट ग्रीन की श्रेणी में है। थानेसर के गांव हथीरा सहित लाडवा खंड के गांव लाठी धनौरा, गोबिंदगढ़, बरोट, छलौंदी, बणी, बडौंदा-बडौंदी, भूत माजरा और बदरपुर को जल संसाधन प्राधिकरण ने पिंक श्रेणी में शामिल किया है। तेजी से गिरता भूजल स्तर और डार्क जोन में जाते क्षेत्र भविष्य की चिंता की ओर इशारा कर रहा हैं।
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लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सरकार ने पिहोवा, शाहाबाद और लाडवा खंड के 189 गांव को अटल भूजल योजना में शामिल किया है। इन गांवों में जिला भागीदार टीम हर रोज दौरा कर ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटी है। साथ ही इन गांवों में पिजो मीटर लगाए जाने की भी योजना है। इस मीटर की मदद से रोजाना का भूजल स्तर जांचा जा सकता है।
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ग्राउंड वाटर सेल की रिपोर्ट के अनुसार हर साल एक से डेढ़ मीटर भूजल स्तर नीचे जा रहा है। रिपोर्ट में वर्ष 2009 में कुरुक्षेत्र का भूजल स्तर 29.52 मीटर दर्ज किया गया था। वर्ष 2010 में 29.80, वर्ष 2011 में 28.80, वर्ष 2012 में 31.34, वर्ष 2013 में 32.94, वर्ष 2014 में 33.47, वर्ष 2015 में 34.54, वर्ष 2016 में 36.42, वर्ष 2017 में 38.06, वर्ष 2018 में 39.36, वर्ष 2019 में 40.64 और वर्ष 2020 में 37.70 और वर्ष 2021 तक 40.38 मीटर दर्ज किया गया। संवाद
शाहाबाद के आठ गांव छह गुना कर रहे भूजल का दोहन
भूजल विशेषज्ञों ने शाहाबाद के आठ गांव शरीफगढ़, रतनगढ़, टंगौर, टंगोरी, मधुदन, फतेहगढ़ झरोली, नलवी व रायपुर का जल बजट जारी किया। इन गांवों में जरूरत से छह गुना ज्यादा भूजल का दोहन किया जा रहा है।
भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन ने बताया कि अटल भूजल योजना के तहत अभी तक 189 में से 123 गांवों को कवर किया गया है। जल बजट रिपोर्ट के आधार पर इन गांवों में अपनीजरूरत से छह गुना ज्यादा भूजल निकाला जा रहा है। यह आंकड़ा भूजल के संदर्भ में इन गांवों की अत्यंत विकट स्थिति को दर्शा रहा है। कनिष्ठ भूजल विशेषज्ञ बरू राम सागवाल ने इन आठ गांवों का पानी की गुणवत्ता अच्छी है, लेकिन पाइप लाइन में रिसाव के कारण नमूने में कुछ अशुद्धियां पाई गई है। वरिष्ठ आईईसी विशेषज्ञ अमरजीत मान ने बताया कि अगली बैठक और जल पंचायत में हमारी टीम पूरे गांव में जल सुरक्षा योजना पेश करेगी।

हर साल गिर रहा एक से डेढ़ मीटर भूजल स्तर : डॉ. नैन
भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन का कहना है कि जिले में हर साल एक से डेढ़ मीटर भूजल स्तर नीचे गिर रहा है। वर्ष 1974 में कुरुक्षेत्र का भूजल स्तर 10.55 मीटर था। वर्ष 1974 से 1999 तक भूजल स्तर 6.7 मीटर तक नीचे गया। वर्ष 1999 में सबमर्सिबल लांच होने के बाद 21 वर्षों में भूजल स्तर 23.78 मीटर से अधिक नीचे तक पहुंचा गया है। बताया कि जिलेभर के 30.01 मीटर से नीचे भूजल स्तर वाले 421 गांव को रेड जोन में, 20.01 से 30 मीटर तक के 10 गांव को पिंक और 20 मीटर से नीचे वाले कुरुक्षेत्र के एकमात्र गांव मुरादानगर को लाइट ग्रीन में शामिल किया है। उनकी टीम गांव-गांव जाकर भूजल स्तर का आंकड़ा प्रस्तुत कर ग्रामीणों को जागरूक कर रही है।
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