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Kurukshetra News: एनआईटी कुरुक्षेत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास हरियाणा प्रांत के द्वारा न्यास का स्थापना दिवस मनाया गया और इस दिवस के उपलक्ष्य में एक प्रेरणादायक शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय भारतीय शिक्षा की पुन पुनर्संरचना एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 था। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को सांस्कृतिक, नैतिक और आत्मनिर्भर मूल्यों से पुनः संपन्न बनाना था। इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता जगराम रहे जो शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के उत्तर क्षेत्र एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संयोजक हैं। उन्हाेंने शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास का साधन बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत की आत्मा से जुड़ी हुई शिक्षा नीति है, जो विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, नैतिक और संस्कारित बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने गुरुकुल परंपरा, मातृभाषा में अध्ययन और कौशल विकास आधारित शिक्षा को समय की आवश्यकता बताया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीकृष्ण आयुर्वेद विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने भाग लिया। उन्होंने भारतीय चिकित्सा पद्धति, योग, आयुर्वेद एवं जीवन मूल्य आधारित शिक्षा को मुख्य धारा में लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण शैली प्रदान करती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संतुलन को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एनआईटी निदेशक प्रो. डॉ. बीवी रमणा रेड्डी ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 न केवल शिक्षा को रोजगारोन्मुख बना रही है, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और नैतिक दृष्टिकोण का विकास भी कर रही है।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीकृष्ण आयुर्वेद विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने भाग लिया। उन्होंने भारतीय चिकित्सा पद्धति, योग, आयुर्वेद एवं जीवन मूल्य आधारित शिक्षा को मुख्य धारा में लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण शैली प्रदान करती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संतुलन को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एनआईटी निदेशक प्रो. डॉ. बीवी रमणा रेड्डी ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 न केवल शिक्षा को रोजगारोन्मुख बना रही है, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और नैतिक दृष्टिकोण का विकास भी कर रही है।
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