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जिले के 10 हजार किसानों पर नहीं है सरकार व किसी बैंक का कर्जा
ब्यूरो/अमर उजाला, सेवा सिंह
Updated Tue, 02 Aug 2016 12:33 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अति महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना अपनी पहली ही पारी में ढेर होती नजर आ रही है। जिसके चलते किसानों ने इस योजना के प्रति अपनी मर्जी से रुचि नहीं दिखाई है। योजना की सफलता व किसानों की उत्सुकता का अंदाजा इसी से ही लगाया जा सकता है कि जिले भर से महज 8 किसानों ने ही फसल बीमा के लिए अपनी इच्छा से आवेदन किया है। यह वह किसान हैं जिन पर किसी तरह कोई बैंक लोन या सरकारी कर्जा नहीं है। जिले में ऐसे किसानों की तादाद लगभग 10 हजार से ज्यादा बताई जा रही है। इनमें से महज 8 ने ही एक अगस्त तक फसल बीमा कराया है।
फसल बीमा योजना की लोकप्रियता व सफलता का आंकलन नॉन लोनी किसानों पर किया जा रहा है। किसान नेताओं की माने तो जिन किसानों पर बैंक का कर्जा है उन किसानों ने मजबूरी में फसल बीमा के लिए हामी भरी है। जो किसान किसी न किसी रुप में बैंक या सरकार के कर्जदार है, उनकी फसल का बीमा अनिवार्य किया जा रहा है। नॉन लोनी किसानों द्वारा सरकार व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा बहु प्रचारित इस योजना के प्रति उत्सुकता न दिखाए जाने पर विभाग ने अब इस योजना से जुड़ी एजेंसी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया दिया है। कृषि विभाग ने एजेंसी द्वारा प्रचार-प्रसार नहीं करने से लेकर मैन पावर तक की कमी को जिम्मेदार बताया है। एजेंसी की इस खामी से विभाग के अधिकारियों ने 25 जुलाई को ही उच्चाधिकारियों से भी अवगत करवा दिया था जबकि एजेंसी की ओर से प्रचार व प्रसार से लेकर अन्य प्रयास किए जाने के दावे किए जा रहे है।
क्या कहते है कृषि उपनिदेशक
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ कर्मचंद का कहना है कि विभाग व सरकार की ओर से भरसक प्रयास किया गया है, जिससे लोगों में योजना के प्रति जागरूकता आईं है। लेकिन स्वैच्छिक तौर पर किसान आगे नहीं आ रहे हैं। इसके लिए संबंधित एजेंसी की ओर से रही खामी ही है। एजेंसी के पास मैन पावर भी कम है तो वहीं प्रचार भी कम माना जा रहा है। एजेंसी की ओर से हालांकि गांव-गांव कार्यक्रम किए गए, इसके बावजूद अधिक प्रचार किए जाने की आवश्यकता है। संबंधित बीमा कर्मियों के मोबाइल नं भी हर चौक व गांव में डिस्पले किए जाने चाहिए।
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भरसक प्रयास के बावजूद नहीं आगे आ रहे किसान : ठाकुर
संबंधित एजेंसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल ठाकुर का कहना है कि अभी तक कंपनी के पास 7677 फार्र्म का कुल 71.68 लाख रुपये प्रीमियम एकत्रित हुआ है, जो लगभग लोनी फार्मर का ही है। उन्होंने बताया कि नॉन लोनी फार्मर आगे नहीं आ रहे है जबकि कंपनी की ओर से गांव-गांव जाकर पूरा प्रचार किया गया। किसानों को योजना के फायदे से बारिकी से समझाया गया। उन्होंने बताया कि जिला में लगभग 86 हजार किसान है और महज एक या दो फीसदी को छोड़कर अन्य सभी लोनी है, लेकिन इन किसानों की भी बैंक उन्हें कंफर्मेशन नहीं दे पा रहे है।
क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
मौसम के जोखिम से बचाने व खेती को लाभप्रद व्यवसाय बनाने के लिए केंद्र सरकार ने यह योजना शुरू की है। इसके लिए निजी कंपनी को अधिकृत किया गया है। यह योजना सभी किसानों के लिए अनिवार्य की गई है जबकि अग्रणी किसानों (कास्तकार व बटाईदार) के लिए स्वैच्छिक है। योजना में फसल जोखिम को चार चरणों में बांटा गया है, जिसके अनुसार यदि फसल कम वर्षा व प्रतिकूल मौसम के कारण बुआई व रोपित नहीं हो सकती तब किसानों को फसल बीमा का लाभ अधिकृत कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मिलेगा। खड़ी फसल से लेकर कटाई तक यदि सूखा, बाढ़, बीमारी व अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण पैदावार कम होती है तो भी फसल बीमा का लाभ मिलेगा। यही नहीं फसल कटाई के दो सप्ताह बाद बरसात आदि के कारण होने वाले नुकसान का भी लाभ मिलेगा तो वहीं ओलावृष्टि व भूस्खलन से होने वाले नुकसान को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
आज है बीमा करवाने का अंतिम दिन
खरीफ सीजन के लिए बीमा करवाने के लिए पहले 31 जुलाई अंतिम तिथि तय की गई जो बाद में 2 अगस्त तक बढ़ा दी गई। योजना अनुसार धान की फसल की बीमित राशि 62,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा फसल बीमा प्रीमियम 775 रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया गया है। जबकि मक्की की फसल की बीमित राशि 25 हजार व प्रीमियम राशि 500 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।
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फसल बीमा योजना की लोकप्रियता व सफलता का आंकलन नॉन लोनी किसानों पर किया जा रहा है। किसान नेताओं की माने तो जिन किसानों पर बैंक का कर्जा है उन किसानों ने मजबूरी में फसल बीमा के लिए हामी भरी है। जो किसान किसी न किसी रुप में बैंक या सरकार के कर्जदार है, उनकी फसल का बीमा अनिवार्य किया जा रहा है। नॉन लोनी किसानों द्वारा सरकार व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा बहु प्रचारित इस योजना के प्रति उत्सुकता न दिखाए जाने पर विभाग ने अब इस योजना से जुड़ी एजेंसी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया दिया है। कृषि विभाग ने एजेंसी द्वारा प्रचार-प्रसार नहीं करने से लेकर मैन पावर तक की कमी को जिम्मेदार बताया है। एजेंसी की इस खामी से विभाग के अधिकारियों ने 25 जुलाई को ही उच्चाधिकारियों से भी अवगत करवा दिया था जबकि एजेंसी की ओर से प्रचार व प्रसार से लेकर अन्य प्रयास किए जाने के दावे किए जा रहे है।
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क्या कहते है कृषि उपनिदेशक
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ कर्मचंद का कहना है कि विभाग व सरकार की ओर से भरसक प्रयास किया गया है, जिससे लोगों में योजना के प्रति जागरूकता आईं है। लेकिन स्वैच्छिक तौर पर किसान आगे नहीं आ रहे हैं। इसके लिए संबंधित एजेंसी की ओर से रही खामी ही है। एजेंसी के पास मैन पावर भी कम है तो वहीं प्रचार भी कम माना जा रहा है। एजेंसी की ओर से हालांकि गांव-गांव कार्यक्रम किए गए, इसके बावजूद अधिक प्रचार किए जाने की आवश्यकता है। संबंधित बीमा कर्मियों के मोबाइल नं भी हर चौक व गांव में डिस्पले किए जाने चाहिए।
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भरसक प्रयास के बावजूद नहीं आगे आ रहे किसान : ठाकुर
संबंधित एजेंसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल ठाकुर का कहना है कि अभी तक कंपनी के पास 7677 फार्र्म का कुल 71.68 लाख रुपये प्रीमियम एकत्रित हुआ है, जो लगभग लोनी फार्मर का ही है। उन्होंने बताया कि नॉन लोनी फार्मर आगे नहीं आ रहे है जबकि कंपनी की ओर से गांव-गांव जाकर पूरा प्रचार किया गया। किसानों को योजना के फायदे से बारिकी से समझाया गया। उन्होंने बताया कि जिला में लगभग 86 हजार किसान है और महज एक या दो फीसदी को छोड़कर अन्य सभी लोनी है, लेकिन इन किसानों की भी बैंक उन्हें कंफर्मेशन नहीं दे पा रहे है।
क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
मौसम के जोखिम से बचाने व खेती को लाभप्रद व्यवसाय बनाने के लिए केंद्र सरकार ने यह योजना शुरू की है। इसके लिए निजी कंपनी को अधिकृत किया गया है। यह योजना सभी किसानों के लिए अनिवार्य की गई है जबकि अग्रणी किसानों (कास्तकार व बटाईदार) के लिए स्वैच्छिक है। योजना में फसल जोखिम को चार चरणों में बांटा गया है, जिसके अनुसार यदि फसल कम वर्षा व प्रतिकूल मौसम के कारण बुआई व रोपित नहीं हो सकती तब किसानों को फसल बीमा का लाभ अधिकृत कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मिलेगा। खड़ी फसल से लेकर कटाई तक यदि सूखा, बाढ़, बीमारी व अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण पैदावार कम होती है तो भी फसल बीमा का लाभ मिलेगा। यही नहीं फसल कटाई के दो सप्ताह बाद बरसात आदि के कारण होने वाले नुकसान का भी लाभ मिलेगा तो वहीं ओलावृष्टि व भूस्खलन से होने वाले नुकसान को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
आज है बीमा करवाने का अंतिम दिन
खरीफ सीजन के लिए बीमा करवाने के लिए पहले 31 जुलाई अंतिम तिथि तय की गई जो बाद में 2 अगस्त तक बढ़ा दी गई। योजना अनुसार धान की फसल की बीमित राशि 62,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा फसल बीमा प्रीमियम 775 रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया गया है। जबकि मक्की की फसल की बीमित राशि 25 हजार व प्रीमियम राशि 500 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।