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Kurukshetra News: डेटा एनालिटिक्स की आधुनिक तकनीकों से रूबरू होंगे विद्यार्थी व शोधार्थी
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कुरुक्षेत्र। डिजिटल युग में शोध और अकादमिक कार्यों में डेटा विश्लेषण की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सांख्यिकी एवं परिचालन अनुसंधान विभाग द्वारा एसपीएसएस एवं आर सॉफ्टवेयर पर विशेष कार्यशाला आयोजित की जा रही है। यह कार्यशाला 23 से 27 फरवरी तक विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित होगी। इस दौरान डेटा एनालिटिक्स की आधुनिक तकनीकों से विद्यार्थी व शोधार्थी रूबरू होंगे।
विभागाध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र खटकड़ ने बताया कि यह कार्यक्रम कौशल विकास केंद्र, कुवि के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जो विश्वविद्यालय रूसा परियोजना सोसायटी के अंतर्गत संचालित है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को डेटा विश्लेषण की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें एसपीएसएस व आर सॉफ्टवेयर के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण देना है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. मुकेंद्र कादियान के अनुसार, कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को डेटा प्रबंधन, सांख्यिकीय विश्लेषण, हाइपोथीसिस परीक्षण, रिग्रेशन मॉडलिंग और शोध में डेटा की सही व्याख्या जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ वक्ता व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी देंगे, जिससे प्रतिभागी अपने शोध और परियोजनाओं में इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों से इस अवसर का लाभ उठाकर अपने कौशल को मजबूत बनाने का आह्वान किया है।
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विभागाध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र खटकड़ ने बताया कि यह कार्यक्रम कौशल विकास केंद्र, कुवि के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जो विश्वविद्यालय रूसा परियोजना सोसायटी के अंतर्गत संचालित है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को डेटा विश्लेषण की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें एसपीएसएस व आर सॉफ्टवेयर के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण देना है।
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कार्यक्रम संयोजक डॉ. मुकेंद्र कादियान के अनुसार, कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को डेटा प्रबंधन, सांख्यिकीय विश्लेषण, हाइपोथीसिस परीक्षण, रिग्रेशन मॉडलिंग और शोध में डेटा की सही व्याख्या जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ वक्ता व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी देंगे, जिससे प्रतिभागी अपने शोध और परियोजनाओं में इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों से इस अवसर का लाभ उठाकर अपने कौशल को मजबूत बनाने का आह्वान किया है।
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