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महान समाज सुधारक, नारीवादी, प्रथम शिक्षिका थी सावित्री बाई फुले
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भारत की प्रथम शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले की जयंती पर जिलेभर में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें बुद्धिजीवियों ने अपने-अपने विचार रखे। इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के साहित्य परिषद द्वारा ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष एवं लेखक डॉ. एसके चहल पहुंचे व माता सावित्री बाई फुले के जीवन और चिंतन के परिप्रेक्ष्य में विचार मंथन किया।
उन्होंने बताया किसी भी समाज के विकास में उसके नायकों का अहम योगदान होता है। बताया की सावित्री बाई फुले और ज्योतिबा फुले ने अपने जीवन की सारी शक्ति समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान और समाज को शिक्षित करने में लगा दी। उन्होंने बालिकाओं के लिए स्कूल खोले और उसी के साथ-साथ सत्यशोधक समाज की स्थापना भी की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि माता सावित्री बाई फुले आधुनिक भारतीय समाज में चेतना निर्माण की जनक थी। सावित्री बाई फुले प्रथम शिक्षिका, मराठी कवयित्री, सामाजिक शिक्षाविद व नारीवादी भी थी। उनकी कविताओं में जो सौंदर्यबोध है वह केवल कोरी कल्पनाओं पर आधारित नहीं है, बल्कि वह मनुष्य के दैनिक जीवन से जुड़ाव रखता है। इस ऑनलाइन व्याख्यान में अरुण कैहरबा, कीर्ति सैनी, विकास साल्याण, बृजपाल, डॉ. जसबीर सिंह सहित हिंदी व इतिहास विभाग के विद्यार्थी शामिल रहे।
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डॉ. आंबेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया इकाई कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा माता सावित्रीबाई फुले जयंती पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विशेष रूप से संगठन के आईआईएचएस अध्यक्ष प्रदीप कुमार, विजेंद्र रंगा, अमन टांक, अंकित कुमार व आशीष कुमार ने शिरकत की। प्रदीप कुमार ने कहा कि देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने समाज को नई दिशा दी है। उनके द्वारा किए गए कार्य समाज को सदा प्रेरित करते रहेंगे। वहीं डासफी के अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार रखे तथा माता सावित्री बाई फुले द्वारा समाज हित में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला।
सावित्रीबाई फुले की जयंती पर कैथल में बहुजन स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा प्रदेश स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया गया। बसवा संस्थापक रोहताश मेहरा की अध्यक्षता हुए इस कार्यक्रम में मुख्यातिथि आईएएस रविंद्र रंगा ने शिक्षा के क्षेत्र में उन्नत कार्य करने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय दयालपुर की टीम को भी सम्मानित किया, जिसमें दयालपुर की टीम से प्रवीन पठानिया, रमेश, शिवकुमार, परमजीत, आरती, पायल व नीरू शामिल रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अमन कुतुबपुर, दिनेश खापड़, श्याम मांडी, अनिल चौहान, प्रीतम मेहरा सहित अन्य मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया किसी भी समाज के विकास में उसके नायकों का अहम योगदान होता है। बताया की सावित्री बाई फुले और ज्योतिबा फुले ने अपने जीवन की सारी शक्ति समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान और समाज को शिक्षित करने में लगा दी। उन्होंने बालिकाओं के लिए स्कूल खोले और उसी के साथ-साथ सत्यशोधक समाज की स्थापना भी की।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि माता सावित्री बाई फुले आधुनिक भारतीय समाज में चेतना निर्माण की जनक थी। सावित्री बाई फुले प्रथम शिक्षिका, मराठी कवयित्री, सामाजिक शिक्षाविद व नारीवादी भी थी। उनकी कविताओं में जो सौंदर्यबोध है वह केवल कोरी कल्पनाओं पर आधारित नहीं है, बल्कि वह मनुष्य के दैनिक जीवन से जुड़ाव रखता है। इस ऑनलाइन व्याख्यान में अरुण कैहरबा, कीर्ति सैनी, विकास साल्याण, बृजपाल, डॉ. जसबीर सिंह सहित हिंदी व इतिहास विभाग के विद्यार्थी शामिल रहे।
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डॉ. आंबेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया इकाई कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा माता सावित्रीबाई फुले जयंती पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विशेष रूप से संगठन के आईआईएचएस अध्यक्ष प्रदीप कुमार, विजेंद्र रंगा, अमन टांक, अंकित कुमार व आशीष कुमार ने शिरकत की। प्रदीप कुमार ने कहा कि देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने समाज को नई दिशा दी है। उनके द्वारा किए गए कार्य समाज को सदा प्रेरित करते रहेंगे। वहीं डासफी के अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार रखे तथा माता सावित्री बाई फुले द्वारा समाज हित में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला।
सावित्रीबाई फुले की जयंती पर कैथल में बहुजन स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा प्रदेश स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया गया। बसवा संस्थापक रोहताश मेहरा की अध्यक्षता हुए इस कार्यक्रम में मुख्यातिथि आईएएस रविंद्र रंगा ने शिक्षा के क्षेत्र में उन्नत कार्य करने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय दयालपुर की टीम को भी सम्मानित किया, जिसमें दयालपुर की टीम से प्रवीन पठानिया, रमेश, शिवकुमार, परमजीत, आरती, पायल व नीरू शामिल रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अमन कुतुबपुर, दिनेश खापड़, श्याम मांडी, अनिल चौहान, प्रीतम मेहरा सहित अन्य मौजूद रहे।