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Kurukshetra News: दुनिया के किसी कोने से घर बैठे जान सकेंगे कुरुक्षेत्र की महिमा, क्लिक करते ही खुलेंगे किताबों के पन्ने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Aug 2023 02:41 AM IST
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Sitting at home from any corner of the world, you will be able to know the glory of Kurukshetra, the pages of books will open as soon as you click
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र का जिक्र आते ही हर किसी के जहन में धर्म और गीता संदेश देते श्रीकृष्ण की तस्वीर उभर आती है। हर कोई यहां आने को लेकर आतुर रहता है तो वहीं यहां की खासियत के साथ-साथ यहां के इतिहास को जानने की चाह भी हर किसी की होती है। ऐसे में अब किसी भी कोने में बैठकर कुरुक्षेत्र की पूरी महिमा जानी जा सकती है। महज एक क्लिक करते ही धर्मनगरी के आजादी से पहले के इतिहास से लेकर अब तक के झरोखे किताबों के पन्नों पर सामने आ जाते हैं।
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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से इस संबंध में यह बड़ा प्रयास किया गया है। इसमें वर्तमान ही नहीं बेहद दुर्लभ पुस्तकों का डिजिटल संग्रह किया गया है। पिछले कुछ माह से ही शुरू किए गए इन प्रयासों के चलते अभी 28 पुस्तकें ही इसमें शामिल की जा सकी हैं। उल्लेखनीय है कि बोर्ड की इस पहल का लेखक, विद्वान, इतिहासकार व शिक्षाविद् न केवल सराहना कर रहे हैं बल्कि कुरुक्षेत्र से जुड़ी दुर्लभ किताबों को लेकर भी केडीबी के अधिकारियों से संपर्क साध रहे हैं। अभी तक उपलब्ध हो पाई किताबों में कुरुक्षेत्र के प्राचीन इतिहास से लेकर इसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को भी विस्तार से बताया गया है। अलग-अलग लेखकों की ये किताबें विभिन्न प्रकार की जिज्ञासा का शांत कर देती है।
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अभी तक इन किताबों का हो सका डिजिटल संग्रह

कुरुक्षेत्र रहस्य, हरियाणा सांस्कृतिक दिग्दर्शन भाग एक से तीन, अष्ट कोसी परिक्रमा, युग-युगीन कुरुक्षेत्र, यमुना पुराण में कुरुक्षेत्र, श्रीकुरुक्षेत्र यात्रा, कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण का महात्म्य एनसिएंट कुरुक्षेत्र, ऐतिहासिक परिदृश्य में कुरुक्षेत्र, आदितीर्थ शुक्रक्षेत्र सहित अन्य कईं किताबों का डिजिटल संग्रह हो सका है। ये किताबें संबंधित लेखकों के परिजनों से लेकर विभिन्न संस्थानों द्वारा केडीबी की पहल पर उपलब्ध कराई गई है।
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....1935 में कुरुक्षेत्र में लगता था रोशनी, सफाई व चौकीदारा टैक्स

डिजिटल संग्रह में अभी तक सबसे दुर्लभ किताब कुरुक्षेत्र रहस्य नाम से मिल पाई है, जो सनातन धर्म सभा जींद के मंत्री रहे रामस्वरूप शर्मा जिंदी द्वारा लिखी गई है। 1935 में लिखी गई इस किताब में कुरुक्षेत्र का उस समय के रहस्य को बताया गया है। इसमें रामस्वरूप शर्मा बताते हैं कि उस समय भी कुरुक्षेत्र में रोशनी, सफाई व चौकीदारा टैक्स लगता था। इसमें भूगाेल से लेकर कुरुक्षेत्र के नामकरण, सूर्यग्रहण की यहां पर महत्ता, दान का महत्व से लेकर सन्निहित सरोवर व कई अन्य तीर्थों का विस्तार से जिक्र किया गया है।




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कुरुक्षेत्र की महिमा जानने में होगी आसानी : उपेंद्र

केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल बताते हैं कि कुरुक्षेत्र से जुड़ी किताबों का डिजिटल संग्रह फिलहाल जिला प्रशासन की साइट पर ही किया जा रहा है, लेकिन कुछ दिनों में केडीबी की भी साइट पर यह संग्रह होगा। इसके लिए केडीबी ने कुछ माह पहले ही प्रयास शुरू किए हैं और इसको लेकर लोगों में बड़ा उत्साह दिखाई दिया। दुर्लभ किताबें भी मिली है। इस संग्रह के जरिए कुरुक्षेत्र की महिमा देश-विदेश के लोग कहीं से भी आसानी से जान सकेंगे।
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