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कुरुक्षेत्र: अवैध निर्माण के मक्कड़जाल से घिरी सरस्वती, प्रशासन बेबस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Feb 2023 08:30 AM IST
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Saraswati surrounded by the web of illegal construction, administration helpless
कुरुक्षेत्र। गांव खेड़ी मारकंडा में सरस्वती नदी के तट पर बनाया गया दधीचि घाट, जो हो रहा अंदेखी का ? - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। लोगों की आस्था का केंद्र सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार के लिए सरकार कई प्रयासों में जुटी हुई है। इसके लिए कई योजनाओं पर कार्य भी शुरू किया जा चुका है लेकिन धर्मनगरी में सरस्वती नदी अवैध कब्जाधारियों के चंगुल में फंसी हुई है। इसको कब्जाधारियों के चंगुल से मुक्त करने में सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड व जिला प्रशासन बेबस नजर आ रहा है।
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प्रशासन अवैध कब्जाधारकों को सिर्फ नोटिस देने तक ही सीमित रह गया है। इनके खिलाफ कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई है। प्रशासन की इस विफलता के चलते ही अवैध कब्जा धारकों के हौसले और भी बुलंद हो रहे हैं। इस मामले में एक बार फिर प्रशासन ने ऐसे 50 लोगों को नोटिस जारी किए हैं लेकिन सरस्वती नदी से अवैध कब्जे हट पाएंगे या नहीं इस बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में लोग प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
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पिपली से लेकर 18 किलोमीटर तक अवैध कब्जे
सरस्वती नदी की पिपली से लेकर शहर में ही करीब 18 किलोमीटर की लंबाई मानी जाती है। अधिकतर जगहों पर इस पर अवैध कब्जे किए हुए हैं। जहां कॉलोनियां तक सरस्वती किनारों के आसपास भी काटी हुई है तो वहीं निर्माण तक निर्माण कार्य हुए हैं। पिपली में करीब 20 साल पहले तत्कालीन सरकार ने विशेष घाट बनवाकर नौकायन तक कराने की योजना शुरू की थी, लेकिन नौकायान तो दूर सरस्वती के दोनों और किए जाते रहे अवैध कब्जे भी नहीं रोके जा सके।
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दधीचि घाट में कभी लगता था भक्तों का मेला, आज बदहाल
गांव खेड़ी मारकंडा की रहने वाली करीब 80 वर्षीय नत्थी देवी का कहना है कि सरस्वती नदी पर उनके परिवार ने वर्ष 1980 में सरस्वती मैया का मंदिर बनवाया था तो उसी दौरान यहां दधीचि घाट का भी निर्माण किया गया। उस समय सरस्वती में स्वच्छ जल बहता था और घाट पर दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच स्नान व पूजा अर्चना करते थे। आज प्रशासनिक अनदेखी के चलते सरस्वती ने गंदे नाले का रूप ले लिया तो घाट भी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
चार साल पहले मंजूर हुए 10 लाख, नहीं लगा ट्यूबवेल
मंदिर के पुजारी पंडित संदीप अवस्थी बताते हैं कि सूर्य वैणी के नाम से भी जाने जाने वाले इस घाट पर पर कोरोना काल से पहले लाखों रुपये खर्च कर पत्थर लगाए गए थे तो इसका विस्तार भी किया गया था। चार साल पहले ही इसमें स्वच्छ पानी भरने को लेकर ट्यूबवेल लगाने के लिए 10 लाख रुपये सरकार ने मंजूर किए थे, लेकिन आज तक नहीं लग पाया। उनका कहना है कि सरस्वती शहरी एरिया में पूरी तरह से अवैध कब्जों से घिरी हुई है, लेकिन कोई इसे रोकने की जहमत नहीं उठा रहा। वर्तमान हालात में सरस्वती की इस हालत को देख श्रद्धालुओं की भावना को ठेस पहुंच रही है।
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नदी के किनारे सरेआम काटी गई कॉलोनियां : रामेश्वर
ग्रामीण रामेश्वर का कहना है कि सरस्वती पर सरेआम कालोनियां कटती रही, लेकिन कोई इस पर अंकुश लगाने को आगे नहीं आया। सरकार सिर्फ इसके जीर्णोद्धार के दावे करती रही, लेकिन आज तक धरातल पर कु छ भी नहीं। यहां तक कि अभी भी सरस्वती के दोनों ओर अवैध कब्जे जारी है।
50 लोगों को दिए जा चुके नोटिस, बरती जाएगी सख्ती : धुम्मन
सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच का कहना है कि सरस्वती के जीर्णोद्धार के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। शहर में किए गए अवैध कब्जों को हटाने को लेकर सरकार भी गंभीर है और 50 लोगों को नोटिस भी दिए जा चुके हैं। इस संबंध में उन्होंने प्रदेश सरकार को पत्र भी लिखा है, जिसमें 100 मीटर के दायरे तक किसी भी निर्माण पर रोक लगाए जाने व हटाए जाने की मांग की है।

सरस्वती हैरिटेज बोर्ड से मांगी हैं रिपोर्ट : डीसी
डीसी शांतनु शर्मा का कहना है कि सरस्वती पर अवैध कब्जों को लेकर करीब 50 लोगों को नोटिस दिए हुए हैं। अब सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड से नोटिस दिए जाने व इसके बाद के हालात पर रिपोर्ट मांगी गई है। उसी अनुसार अगली कार्रवाई की जाएगी।
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