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189 गांवों में पीजोमीटर लगाने की तैयारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Feb 2022 01:59 AM IST
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Preparing to install piezometer in 189 villages, Kurukshetra
भूजल की जांच करते भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन व अन्य। संवाद - फोटो : Kurukshetra
नरेंद्र शर्मा
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कुरुक्षेत्र। साल दर साल गिरते भूजल स्तर से चिंतित सरकार ने अब कुरुक्षेत्र के लाडवा, शाहाबाद और पिहोवा खंड के 189 गांव में अटल भूजल योजना के तहत पीजोमीटर लगाने की कवायद तेज कर दी है। ग्रामीण क्षेत्र में लगने वाले पीजोमीटर सीधे सेटेलाइट से जुड़ेंगे और भूजल स्तर में होने वाले बदलाव की पल-पल अपडेट देंगे। सरकार ने इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया है।
अप्रैल से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से जिलेभर की 189 ग्राम पंचायत के विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनबाड़ी केंद्र व अन्य पंचायती जगह पर लगाए जाएंगे। इसके लिए सिंचाई विभाग की जिला कार्यान्वयन भागीदार टीम एवं जिला प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम ने चयनित 189 गांव का निरीक्षण भी कर लिया है।
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पीजोमीटर स्थापित होने के बाद सिंचाई विभाग एवं हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण निगरानी रखने के साथ-साथ गांव के सरपंच, जल समिति के सदस्यों, शिक्षित ग्रामीणों, आंगनबाड़ी व आशा वर्कर व विद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देगा। पीजोमीटर सेंसर की मदद से पल-पल की अपडेट स्क्रीन पर ग्राफ के रूप में दिखाएगा। पीजोमीटर जहां मिट्टी, चिकनी मिट्टी, रेत और कंक्रीट संरचनाओं में पानी के दबाव की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएगा और बारिश से पहले व बारिश के बाद का भूजल स्तर में हुए परिवर्तन को स्पष्ट करेगा। साथ ही बारिश के बाद भूमि कितनी रिचार्ज हुई है, यह सटीक जानकारी भी पीजोमीटर की मदद से हासिल हो सकेगी।
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उल्लेखनीय है कि कुरुक्षेत्र का 97.57 फीसदी क्षेत्र यानी जिले के 432 गांव में से 421 गांव रेड जोन में शामिल हैं। जिला का एकमात्र गांव मुरादानगर (लाडवा) ऐसा गांव है, जो 20 मीटर के साथ लाइट ग्रीन की श्रेणी में अपनी जगह बनाए हुए है। विशेषज्ञों की मानें तो हर साल एक से डेढ़ मीटर तक भूजल स्तर नीचे जा रहा है। वर्ष 2010 में 29.80, वर्ष 2011 में 28.80, वर्ष 2012 में 31.34, वर्ष 2013 में 32.94, वर्ष 2014 में 33.47, वर्ष 2015 में 34.54, वर्ष 2016 में 36.42, वर्ष 2017 में 38.06, वर्ष 2018 में 39.36, वर्ष 2019 में 40.64 और वर्ष 2020 में 37.70 और वर्ष 2021 तक 40.38 मीटर दर्ज किया गया। संवाद

हर गांव का भूजल स्तर अलग-अलग : डॉ. नवीन नैन
भूजल विशेषज्ञ डॉ. नवीन नैन का कहना है कि समय-समय पर जिले का भूजल स्तर मापा जाता है, लेकिन हर गांव का भूजल स्तर अलग-अलग होता है। इसकी वजह से सही भूजल स्तर की जांच नहीं हो पाती थी। अब ग्रामीण क्षेत्र में पीजोमीटर लगने से पल-पल की अपडेट मिलेगी। पीजोमीटर भू-तकनीकी सेंसर हैं, जिनका उपयोग जमीन में पानी के दबाव को मापने के लिए किया जाता है। पीजोमीटर के आधार पर अलग-अलग एक्वीफर शेप (जल भर) की पहचान की जाएगी और यह डेटा निश्चित रूप से भूजल रहस्य को सुलझाएगा।
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