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Kurukshetra News: हमारी प्राकृतिक खेती के मॉडल से निकलेगा नेपाल में रासायनिक खाद के संकट का तोड़

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Sep 2023 02:16 AM IST
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Our natural farming model will solve the problem of chemical fertilizers in Nepal.
सेवा सिंह
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कुरुक्षेत्र। रासायनिक खाद का संकट झेल रहे पड़ोसी देश नेपाल का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को धर्मनगरी कुरुक्षेत्र पहुंचा, जहां गुरुकुल में प्राकृतिक खेती के मॉडल से रूबरू हुआ। इससे पहले 31 मई से तीन जून तक भारत की यात्रा पर आए नेपाल के पीएम को भारतीय प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती का सुझाव दिया था। साथ ही इसके फायदे बताते हुए गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी। अब नेपाल से आया प्रतिनिधिमंडल तीन दिन रहकर प्राकृतिक खेती की बारीकियां सीखेगा।
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड सत्ता संभालने के बाद पहली बार 31 मई से तीन जून तक भारत की यात्रा पर आए थे। इस दौरान द्विपक्षीय बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष नेपाल में खाद संकट का उल्लेख किया था। साथ ही सहयोग का भी आग्रह किया था। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री को रासायनिक खेती की जगह प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी थी। साथ ही इस दिशा में गुजरात और हरियाणा में हो रहे कार्य का भी उल्लेख किया था। इसके बाद समझौते के तहत अब नेपाल सरकार का प्रतिनिधिमंडल प्राकृतिक खेती के गुर सीखने धर्मनगरी पहुंचा है। इसमें विदेश मंत्रालय के अपर सचिव गोकुल वीके और कृषि, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक सहित किसान भी शामिल हैं।
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सब्जी के साथ धान व गेहूं की फसल ही अधिक, 30 फीसदी एरिया ही समतल : खगेंद्र

नेपाल के सुदूर पश्चिमी राज्य के कैलाली जिला के घनघड़ी स्थित कृषि ज्ञान केंद्र के इंचार्ज एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी खगेंद्र प्रसाद शर्मा का कहना है कि नेपाल में करीब 30 फीसदी ही समतल क्षेत्र में कृषि की जाती है। इसमें सब्जियों के अलावा धान व गेहूं की फसल होती है। यहां अधिकतर खेती रसायनयुक्त है और खाद की अक्सर कमी रहती है। अब केंद्र सरकार स्तर पर लिए फैसले के तहत ही सभी अधिकारी व कृषि वैज्ञानिक यहां पहुंचे हैं। गुरुकुल का फार्म बेहद आकर्षक व आसानी से अपनाया जाने वाला है। इससे कृषि उत्पादकता भी कम होने की बजाए बढ़ने की उम्मीद है। सरकार को यह मॉडल अपनाने के लिए रिपोर्ट दी जाएगी।
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नेपाल में खेत की जोत व सरकारी सहायता भी कम

गुरुकुल पहुंचे नेपाल के किसान लेखनाथ विशाल, दामोदर ढकाल, प्रत्युश राणा, पुस्कर केसी, धर्मा शासी का कहना है कि नेपाल में खेत की जोत बेहद छोटी है तो सरकार की सहायता भी कम है। यही कारण है कि आज भी वहां किसान खुशहाल नहीं हो पाया है। अब रासायनिक खेती से वहां का किसान मुक्ति पाना चाहता है। गुरुकुल में उन्हें बेहद सरल व उत्पादकता बढ़ाने वाला मॉडल देखने को मिला है, जो वहां के अन्य किसानों के लिए कारगर साबित हो सकता है।




प्राकृतिक खेती की बताई जाएगी बारीकियां : राज्यपाल
राज्यपाल आचार्य देवव्रत का कहना है कि नेपाल से आए विज्ञानियों, अधिकारियों व किसानों को तीनों दिन प्राकृतिक खेती की बारीकी बताई जाएगी। प्राकृतिक खेती को देख नेपाल का प्रतिनिधिमंडल उत्सुक है। उम्मीद है कि नेपाल में प्राकृतिक खेती के मॉडल से कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
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