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Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पेड़ों की कटाई के विरोध में की खुली चर्चा
Tue, 03 Feb 2026 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 03 Feb 2026 01:52 AM IST
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कुरुक्षेत्र। खुली चर्चा में हिस्सा लेते विद्यार्थी। विज्ञप्ति
- फोटो : जिला स्तरीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए पंत स्टेडियम में बनाई जाती रंगोली।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर में प्रस्तावित साइकिलिंग वेलोड्रम निर्माण के लिए करीब 14 हजार पेड़ों की कटाई के निर्णय पर छात्रों में गहरा रोष देखने को मिला। इस मुद्दे पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इकाई की ओर से पेड़ों के महत्व और सतत विकास के विषय पर सोमवार को एक खुली चर्चा का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।
मुख्य वक्ता डॉ. महावीर जागलान रहे। उन्होंने कहा कि पेड़ हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। मानव, पशु-पक्षी और समस्त जीव-जंतुओं का अस्तित्व पेड़ों पर ही निर्भर है, इसलिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। विकास ऐसा होना चाहिए जिससे प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
खुली चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने पेड़ों की कटाई को गलत ठहराया और इसे रोकने के लिए आंदोलन करने पर सहमति जताई। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर हरियाली और जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जिसे किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। विश्वविद्यालय इकाई कमेटी के अध्यक्ष रोहित ने कहा कि पेड़ हमारे जीवन का सुरक्षा कवच हैं और इन्हें बचाना हम सबका प्रथम कर्तव्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने साइकिलिंग वेलोड्रम के लिए 14 हजार पेड़ों की कटाई के लिए निलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है जिससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान होगा बल्कि विश्वविद्यालय की जमीन भी खेल विभाग को सौंप दी जाएगी। एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और परिसर में अधिक से अधिक पौधरोपण किया जाए। यदि कटाई पर रोक नहीं लगी तो छात्र संगठन बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
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मुख्य वक्ता डॉ. महावीर जागलान रहे। उन्होंने कहा कि पेड़ हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। मानव, पशु-पक्षी और समस्त जीव-जंतुओं का अस्तित्व पेड़ों पर ही निर्भर है, इसलिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। विकास ऐसा होना चाहिए जिससे प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
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खुली चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने पेड़ों की कटाई को गलत ठहराया और इसे रोकने के लिए आंदोलन करने पर सहमति जताई। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर हरियाली और जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जिसे किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। विश्वविद्यालय इकाई कमेटी के अध्यक्ष रोहित ने कहा कि पेड़ हमारे जीवन का सुरक्षा कवच हैं और इन्हें बचाना हम सबका प्रथम कर्तव्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने साइकिलिंग वेलोड्रम के लिए 14 हजार पेड़ों की कटाई के लिए निलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है जिससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान होगा बल्कि विश्वविद्यालय की जमीन भी खेल विभाग को सौंप दी जाएगी। एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और परिसर में अधिक से अधिक पौधरोपण किया जाए। यदि कटाई पर रोक नहीं लगी तो छात्र संगठन बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
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