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अब शारीरिक, मानसिक रूप से परिपक्व हो सकेंगी बेटियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 01:39 AM IST
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Now daughters will be able to mature physically, mentally, Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। युवतियों के विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी देना महिलाओं के लिए एक अच्छा कदम माना जा रहा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब लड़कों की तरह ही लड़कियों की शादी की अधिकारिक उम्र 21 साल होने जा रही है। इस फैसले को शहर के बुद्धिजीवी वर्ग ने सराहते हुए स्वागत किया है।
उनका कहना है कि कानून में बदलाव के बाद अब महिला और पुरुष दोनों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष हो जाएगी। केंद्र सरकार के इस फैसले पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों की महिला शिक्षाविदों, महिला चिकित्सकों और समाज सेविकाओं ने अपने विचार साझा किए।
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सरकार का निर्णय स्वागत योग्य: डॉ. विजेश्वरी
दयानंद महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. विजेश्वरी शर्मा का कहना है कि लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष करना सरकार का अच्छा निर्णय है, जो स्वागत योग्य है। लड़के और लड़कियों की उम्र में जो असमानता थी, वह भी दूर होगी। इससे छात्राओं का उज्ज्वल भविष्य ही नहीं होगा, बल्कि माता-पिता की मानसिकता भी बदलेगी।
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आयु पढ़ाई में बनती थी बाधा: डॉ. मीनाक्षी
राजकीय कन्या महाविद्यालय पलवल की उप प्रधानाचार्य डॉ. मीनाक्षी का कहना है कि विवाह की 18 वर्ष उम्र छात्राओं की पढ़ाई में बाधा बनती थी, क्योंकि माता-पिता लड़की की उम्र 18 होते ही शादी करने की सोचते थे। अब विवाह की उम्र 18 से 21 होना अच्छी पहल है, क्योंकि 21 वर्ष की आयु में लड़की की सोच और परिपक्व हो जाएगी। इससे क्राइम घटेगा और छात्राओं को अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए तीन साल और मिलेंगे।
जिंदगी है क्या, 21 वर्ष के बाद ही पता चलती है: डॉ. अमिषा
केयू के इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आईटीटीआर) की प्रिंसिपल डॉ. अमिषा का कहना है कि 18 वर्ष की आयु में बच्चों को समझ नहीं होती। जिंदगी है क्या, यह 21 वर्ष के बाद ही पता चलता है। देश और समाज जिस तरह से बदल रहा है। ऐसे में लड़की को जागरूक और आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है।
उच्च शिक्षा की भी लें जिम्मेदारी: सुदेश कुमारी
जन संघर्ष मंच की महासचिव सुदेश कुमारी का कहना है कि स्नातकोत्तर तक छात्राओं को निशुल्क शिक्षा मुहैया कराने की भी सरकार जिम्मेदारी ले। बेटियां आज 15 से 18 की उम्र के बीच पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। सबसे बड़ी जरूरत बालिकाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की है, जिसमें उनकी शिक्षा से लेकर रोजगार तक की चिंता करनी होगी। विवाह की उम्र बढ़ाना ही समस्या का समाधान नहीं है।
उज्जवल भविष्य बनाएंगी छात्राएं: डॉ. रजनी
केयू के शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. रजनी का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण लड़कियों की कम उम्र में ही परिजन शादी कर देते हैं, जिसका नुकसान लड़कियों को बाद में भुगतना पड़ता है। अब छात्राएं 21 वर्ष की आयु तक अपनी पढ़ाई भी सुचारू रूप से जारी रख पाएंगी और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगी।

आत्मनिर्भर बनेंगी बेटियां: डॉ. गुंजन मेहता
जिला अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन मेहता का कहना है कि शादी की उम्र बढ़ाने के इस फैसले से बेटियां और सक्षम बनेंगी। खास तौर से पढ़ाई और रोजगार के मामले में उन्हें और बेहतर अवसर मिलेंगे। 18 वर्ष की उम्र में लड़की को शादी और संबंधों को निभाने की समझ नहीं होती। ऐसे में मां बनने पर उसकी हालत खास तौर सेहत और खराब हो जाती है।
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