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Kurukshetra News: 100 रुपये से अधिक गबन पर चार्जशीट नहीं, कंडक्टरों का दूसरे जिलों में ट्रांसफर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jan 2026 02:14 AM IST
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No chargesheet for embezzlement of more than Rs 100, conductors transferred to other districts
कुरुक्षेत्र। हरियाणा रोडवेज में गबन के मामलों में कार्रवाई का तरीका बदल गया है। अब 100 रुपये से अधिक के गबन में पकड़े जाने पर कंडक्टरों को चार्जशीट या सस्पेंड करने के बजाय लंबी विभागीय जांच के साथ दूसरे जिले में डेपुटेशन पर भेजा जा रहा है। पहले ऐसे मामलों में कई कंडक्टरों को चार्जशीट या सस्पेंड कर दिया जाता था। जांच एक से दो साल तक चलती थी और बाद में अधिकतर मामलों में कंडक्टर निर्दोष पाए जाते थे जिसके बाद उन्हें पूरा वेतन देना पड़ता था। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। इसी को देखते हुए अब सस्पेंशन की जगह ट्रांसफर और ड्यूटी के जरिये कार्रवाई की जा रही है।
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सालभर में पकड़े जाते हैं 150 से 200 कंडक्टर
रूटों पर गबन के मामलों में हर साल करीब 150 से 200 कंडक्टर पकड़े जाते हैं। दो माह में कुरुक्षेत्र डिपो में आठ से 10 कंडक्टर डेपुटेशन होकर आए हैं। वहीं चार से पांच कंडक्टर गबन के मामले में पकड़े जाने के बाद अन्य जिलों में डेपुटेशन पर भेजे गए हैं। इन मामलों में कार्रवाई छह माह से लेकर एक साल तक चलती है।
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यूनियन ने जताई आपत्ति, अधिकारी सुनें पक्ष
ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के प्रधान नरेंद्र पांचाल ने कहा कि किसी भी कंडक्टर को चार्जशीट या डेपुटेशन पर भेजने से पहले उसका पक्ष सुना जाना चाहिए। बिना पक्ष जाने की गई कार्रवाई गलत है। उन्होंने कहा कि जब 80 प्रतिशत कर्मचारी जांच में निर्दोष साबित हो जाते हैं, तो दो से तीन साल तक उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है जोकि गलत है।
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गबन के मामलों में अब की जा रही डेपुटेशन : शेर सिंह

रोडवेज महाप्रबंधक शेर सिंह ने बताया कि गबन के मामलों में अब कंडक्टर को सस्पेंड करने के बजाय अन्य जिलों में डेपुटेशन पर भेजा जा रहा है। जब तक विभागीय कार्रवाई चलती है, तब तक संबंधित कर्मचारी डेपुटेशन पर ही कार्य करता है। विभाग में करीब 10 कर्मचारी डेपुटेशन पर आकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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