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Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Nine years deceive the government, the court came down on the orders of registries

नौ साल गुमराह करती रही सरकार, कोर्ट के आदेश पर होती रही रजिस्ट्रियां

Fri, 29 Apr 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो/अंबाला,अमर उजाला
ब्यूरो/अंबाला,अमर उजाला Updated Fri, 29 Apr 2016 01:09 AM IST
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मोहित धुपड़ । 8 फरवरी 2007 को पूर्व हरियाणा सरकार ने अंबाला कैंट में एनओसी जारी करने, किसी लीज के नवीकरण करने, म्यूटेशन करने व बिल्डिंग प्लान पास करने पर रोक लगा दी थी।
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जबकि इससे पहले अंबाला कैंट के एक्साइज एरिया में लोगों के उक्त सभी काम होती थे। उनके भवनों की रजिस्ट्रियां भी होती थी, म्यूटेशन भी और बिल्डिंग प्लान भी पास होते थे। लेकिन अचानक नौ साल पहले बिना किसी ठोस आधार के पूर्व सरकार ने इन पर लोक लगा दी।
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लेकिन पूर्व सरकार के ये आदेश अंबाला कैंट के एक्साइज एरिया में रहने वाले बाशिंदों को गुमराह करने जैसे रहे, क्योंकि इन नौ सालों में जहां सरकार के इन आदेशानुसार एक्साइज एरिया में संपत्तियों की रजिस्ट्रयां व म्यूटेशन पर पूर्णतया रोक थी, वहीं अदालत के आदेश पर इन नौ सालों में करीबन 300 संपत्तियों की रजिस्ट्रयां हुई, जिसमें 43 सेल डीड भी रजिस्टर्ड की गई।
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यह खुलासा जिला राजस्व विभाग की संबंधित रिपोर्ट में होता है। राजस्व विभाग ने एक्साइज एरिया में ही रहने वाले उन तमाम लोगों की रजिस्ट्रियां व सेल डीड की, जिन्होंने पूर्व सरकार के इस आधारहीन फैसलों को हाईकोर्ट तक चुनौती दी। हाईकोर्ट में जाकर सरकार अपने खुद के फैसले का ठोस आधार नहीं दे पाती थी, लिहाजा अदालत सरकार को संबंधित लोगों की संपत्तियों की रजिस्ट्री करवाने का आदेश देती थी।


इन्हीं आदेशों को आधार बनाकर जिला राजस्व विभाग अंबाला कैंट तहसील के जरिये हरियाणा रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत अंबाला कैंट के एक्साइज एरिया के लोगों की रजिस्ट्री कर देता था। लेकिन दूसरी ओर जो लोग अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा पाते थे, वे लोग 9 सालों तक सरकार की इस लापरवाही की वजह से न केवल गुमराह रहे, बल्कि एमसीए कार्यालय की धक्के खाते रहे।
रिपोर्ट ने पूर्व सरकार की मंशा पर खड़े किये सवाल
जिला राजस्व विभाग इस बात का दावा कर रहा है कि अदालतों के आदेश पर विभाग ने एक्साइज एरिया की 300 रजिस्ट्रियां की, जिसमें सेल डीड रजिस्टर्ड भी हुये। लेकिन विभाग का यही दावा पूर्व सरकार की मंशा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिरकार पूर्व सरकार ने किस मंशा से एक्साइज एरिया में रजिस्ट्रयों व म्यूटेशन पर प्रतिबंध क्यों लगाया? आखिरकार लोगों को नौ साल तक परेशान क्यों किया गया?

लोगों के बिल्डिंग प्लान पास करने से क्यों रोके गए? सालों लोगों को एमसीए कार्यालयों में भटकने के लिये क्यों मजबूर किया गया?

सरकार को राजस्व नुकसान, भू माफिया होता गया सक्रिय


पूर्व सरकार के संपत्तियों की रजिस्ट्री, म्यूटेशन व बिल्डिंग प्लान पर बिना ठोस आधार के प्रतिबंध लगाने से सरकार को ही बड़ा राजस्व नुकसान हुआ। लेकिन इस दौरान अंबाला कैंट के एक्साइज एरिया में भू माफिया सक्रिय हो गया। सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों के इस दौरान कई मामले सामने आए। इतना ही नहीं लोगों के बिल्डिंग प्लान पास करने पर तो प्रतिबंध था, लेकिन मिलीभगत के चलते बिना बिल्डिंग प्लान पास हुये ही सैकड़ों भवनों के अवैध निर्माण होते चले गये। दुकानों, मकानों से लेकर बहुमंजिला भवन तक बिना नक्शा पास करवाए खड़े हो गये। इसी वजह से एमसीए में भी भ्रष्टाचार का जबरदस्त बोलबाला रहा।


लीज की जमीनों पर भी कब्जेधारी काबिज होते रहे, जबकि सरकारी जमीनों सड़कों व नालों तक पर पक्के अवैध निर्माण होते चले गये। लेकिन सरकार को इन अवैध निर्माणों की वजह से डेवलपमेंट फीस के रूप में इन नौ सालों में आने वाली करोड़ों रुपये की आय का नुकसान होता चला गया।


 डिप्टी मेयर बोले, मजबूरी में टूट गये थे लोग
नौ साल तक रजिस्ट्रियों व म्यूटेशन बंद होने की वजह से भूमाफिया व भ्रष्टाचार प्रवृत्ति के लोगों की तो मौज रही, लेकिन मजबूर लोग टूटते चले गये। ऐसे कई मामले सामने आए, जिसमें लोगों ने पूर्व सरकार के फैसले की वजह से खासी परेशानियां झेली। म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला के डिप्टी मेयर सुधीर जायसवाल बताते हैं कि लोगों को इस दौरान खासी परेशानियां हुई।

डिप्टी मेयर के अनुसार जो लोग हाईकोर्ट चले गये उन्हें तो राहत मिल गई, लेकिन लाखों लोग जो कोर्ट तक नहीं जा पाए, वे ये ही भटकते रहे और टूटते रहे।
मौजूदा सरकार ने एक्साइज एरिया की रजिस्ट्रियां, म्यूटेशन व बिल्डिंग प्लान किए जाने की प्रतिबंधता हटा दी है। पिछली सरकार ने ऐसा क्यों किया था, ये नहीं बताया जा सकता। फिलहाल अब प्राथमिकता यह रहेगी कि संबंधित केसों की जो भी पेंडेंसी है, उसे तुरंत निपटाया जाए और लोगों को बड़ी राहत दी जाए। -सुरेंद्र सिंह, कमिश्नर, एमसीए।


विभाग ने अदालतों के आदेश पर तीन सौ रजिस्ट्रयां की है, जिसमें 43 सेल डीड भी है। विभाग ने सभी रजिस्ट्रयां हरियाणा रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत ही की है, जिसमें किसी प्रकार कोई उल्लंघन नहीं की गई। जैसे अदालत के आदेश होते गये, विभाग उस तरह काम करता रहा। -जीएस विर्क, जिला राजस्व अधिकारी, अंबाला।
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