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नया कृषि मसौदा किसानों के हित में नहीं : भाकियू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jan 2025 01:38 AM IST
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New agriculture draft is not in the interest of farmers: BKU
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। नया कृषि मसौदा किसानों के हित में नहीं है। यह कॉर्पोरेट मुनाफे को इंगित कर रहा है। यह मसौदा वापस लिया जाए।
यह मांग भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट ने की है, जिसको लेकर भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी की ओर से कृषि विपणन (बाजार) पर राष्ट्रीय नीति ढांचा प्रारूप समिति के अध्यक्ष फैज़ अहमद किदवई व प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी को पत्र भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सुझावों के लिए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से प्रसारित कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति ढांचे में किसानों के हितों की बलि चढ़ाने और कॉर्पोरेट मुनाफे के बारे में साजिश है। छोटे उत्पादकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और उन्हें कृषि से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसे में इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाए कि मसौदे की भावना राज्य सरकारों की शक्ति को खत्म करना और राज्य समर्थित बाजार बुनियादी ढांचे को खत्म करना और एपीएमसी (मंडियों) की भूमिका को खत्म करना है, जिससे छोटे और मध्यम किसानों को भारी नुकसान होगा। अत्यधिक असुरक्षित निजी व्यापारिक कॉर्पोरेट द्वारा शोषण होगा।
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उन्होंने कहा कि मसौदे में प्रस्ताव है कि बड़े निगम एपीएमसी (मंडियों) (बाजार यार्डों) को दरकिनार करते हुए सीधे किसानों से उपज खरीद सकते हैं। जिससे खरीदारों में होने वाला मुकाबला ख़त्म हो जाएगा इसके अतिरिक्त, भंडारण के बुनियादी ढांचे को निजी निगमों को सौंपने से मूल्य अस्थिरता के दौरान किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा जाल खत्म हो जाता है और किसानों को फसल कीमतों पर सौदेबाजी के लिए कोई जगह नहीं मिलने से कॉर्पोरेट को शोषण की सुविधा मिलेगी। कॉर्पोरेट बड़ा व्यवसाय पूरी तरह से एमएसपी के खिलाफ है क्योंकि इसकी रणनीति सबसे सस्ती दर पर उपज खरीदना, मूल्य संवर्धन करना, ब्रांड बनाना और अत्यधिक मुनाफा सुनिश्चित करके उसका बाजारीकरण करना है।
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मसौदे में राज्यों को राज्य एपीएमसी अधिनियमों में सुधार प्रावधानों को अपनाने के लिए प्रेरित करने, जीएसटी पर राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की तर्ज पर राज्य कृषि विपणन मंत्रियों की एक सशक्त कृषि विपणन सुधार समिति बनाने का सुझाव दिया गया है। नियम और एकल लाइसेंसिंग/पंजीकरण प्रणाली और एकल शुल्क के माध्यम से कृषि उपज के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए राज्यों के बीच आम सहमति भी बनाएं।
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