{"_id":"628e8c321a3e33127a58b75e","slug":"nectar-is-not-possible-without-poison-kurukshetra-kurukshetra-news-knl1094016158","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना विष निकले अमृत संभव नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना विष निकले अमृत संभव नहीं
विज्ञापन
कथा सुनाते पं शिवम विष्णु पाठक।
- फोटो : Kurukshetra
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। गीता धाम में पंडित शिवम विष्णु पाठक ने कथा के चौथे दिन जड़ भरत चरित्र के माध्यम से मन, इंद्री व आत्मा के परस्पर संबंध की चर्चा की। उन्होंने समुद्र मंथन का प्रसंग विस्तार से बताया गया। कहा कि बिना विष निकले अमृत संभव नहीं। कठिन मार्ग पर कभी घबराना नहीं चाहिए।
उन्होंने भक्त ध्रुव के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सच्चा पथिक तभी मंजिल पर पहुंचता है, जब वह स्वयं को समर्पित कर देता है। वैसे ही ध्रुव भक्त पिता द्वारा तृष्कार करने पर मां सुनीति के बताए मार्गदर्शन से प्रभु भगवान विष्णु की गोद में बैठने का सौभाग्य पाया। ऐसे मां की महत्ता को दृष्टिगत करते हुए मां का स्थान भगवान के सामान बताया। मां ही आज के बच्चे की पहली गुरु है, जो उसे विश्व में सर्वोपरि स्थान पर पहुंचती है।
उन्होंने परनिंदा पर कहा कि यह इंसान को जीवन में नीचे गिराती है, मंजिल से बहार करवाती है। श्र्बड़े महाराज के साथ पंचकूला से मुख्य यजमान व आयोजक पं. आरके शर्मा व उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी ने सपरिवार आरती की। इस अवसर पर समाजसेवी हरीश शर्मा ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का कई गुणा महत्व तीर्थ स्थान पर बढ़ जाता है, जिसका श्रवण करने के लिए पंचकूला एवं चंडीगढ़ से भी भक्तजनों ने शिरकत की एवं कथा के महत्व को ग्रहण करते हुए अपनी सेवाएं भी प्रदान की।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। गीता धाम में पंडित शिवम विष्णु पाठक ने कथा के चौथे दिन जड़ भरत चरित्र के माध्यम से मन, इंद्री व आत्मा के परस्पर संबंध की चर्चा की। उन्होंने समुद्र मंथन का प्रसंग विस्तार से बताया गया। कहा कि बिना विष निकले अमृत संभव नहीं। कठिन मार्ग पर कभी घबराना नहीं चाहिए।
उन्होंने भक्त ध्रुव के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सच्चा पथिक तभी मंजिल पर पहुंचता है, जब वह स्वयं को समर्पित कर देता है। वैसे ही ध्रुव भक्त पिता द्वारा तृष्कार करने पर मां सुनीति के बताए मार्गदर्शन से प्रभु भगवान विष्णु की गोद में बैठने का सौभाग्य पाया। ऐसे मां की महत्ता को दृष्टिगत करते हुए मां का स्थान भगवान के सामान बताया। मां ही आज के बच्चे की पहली गुरु है, जो उसे विश्व में सर्वोपरि स्थान पर पहुंचती है।
विज्ञापन
उन्होंने परनिंदा पर कहा कि यह इंसान को जीवन में नीचे गिराती है, मंजिल से बहार करवाती है। श्र्बड़े महाराज के साथ पंचकूला से मुख्य यजमान व आयोजक पं. आरके शर्मा व उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी ने सपरिवार आरती की। इस अवसर पर समाजसेवी हरीश शर्मा ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का कई गुणा महत्व तीर्थ स्थान पर बढ़ जाता है, जिसका श्रवण करने के लिए पंचकूला एवं चंडीगढ़ से भी भक्तजनों ने शिरकत की एवं कथा के महत्व को ग्रहण करते हुए अपनी सेवाएं भी प्रदान की।
विज्ञापन