{"_id":"8f57f1e4ec3c0da5e1d7731c4996ca93","slug":"mba-pass-girl-in-chaudhar-race-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ये क्या करने लगीं एमबीए पास युवती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये क्या करने लगीं एमबीए पास युवती
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 17 Jan 2016 12:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खंड के गांव जंधेड़ी में सबसे अधिक पढ़ी लिखी युवती ने चौधर के लिए
विज्ञापन
दावेदारी पेश की है। महज 21 वर्षीय सुनीता सबसे युवा प्रत्याशी हैं। इसके
साथ ही वह बीकॉम, एमबीए कर चुकी हैं।
सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी प्रत्याशी होने के कारण सुनीता का नजरिया भी अलग है। उसका कहना है कि युवा ही देश को तरक्की के रास्ते पर ले जा सकते हैं। पढ़ा-लिखा व्यक्ति ही हाईटेक तकनीक के सहारे विकास करवा सकता है।
महिला आरक्षित गांव जंधेड़ी में कुल 1675 वोट हैं। इनमें से लगभग 425 जाट, 350 कश्यप राजपूत, 350 हरिजन, 100 ब्राह्मण, 55 बाजीगर, 35 वाल्मीकि और 40 वोट मुस्लिम समुदाय की हैं। इस चुनाव में दो प्रत्याशी जाट हैं, जबकि तीसरा प्रत्याशी मुस्लिम समुदाय से है। शुक्रवार को चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद शनिवार को तीनों प्रत्याशियों ने घर-घर जाकर वोट मांगे।
इन चुनावों में इस बार सुनीता के पिता तैयारी कर रहे थे, लेकिन गांव महिला आरक्षित हो गया। इस पर उन्होंने पत्नी को चुनाव लड़ाने की सोची, लेकिन सामने सरकार की शैक्षणिक योग्यता की शर्त आ गई। इस पर परिजनों ने फैसला लिया कि गांव में चौधर पाने के लिए अपनी बेटी को चुनाव लड़ाएंगे। इसलिए उन्होंने अपनी बेटी सुनीता को मैदान में उतार दिया।
सुनीता को चुनाव लड़ने की प्रेरणा अपने पिता से मिली और जनसेवा का जजबा उसमें शुरू से ही था। सरपंच बनकर वह गांव का समुचित विकास करवाना चाहती हैं।
सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी प्रत्याशी होने के कारण सुनीता का नजरिया भी अलग है। उसका कहना है कि युवा ही देश को तरक्की के रास्ते पर ले जा सकते हैं। पढ़ा-लिखा व्यक्ति ही हाईटेक तकनीक के सहारे विकास करवा सकता है।
महिला आरक्षित गांव जंधेड़ी में कुल 1675 वोट हैं। इनमें से लगभग 425 जाट, 350 कश्यप राजपूत, 350 हरिजन, 100 ब्राह्मण, 55 बाजीगर, 35 वाल्मीकि और 40 वोट मुस्लिम समुदाय की हैं। इस चुनाव में दो प्रत्याशी जाट हैं, जबकि तीसरा प्रत्याशी मुस्लिम समुदाय से है। शुक्रवार को चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद शनिवार को तीनों प्रत्याशियों ने घर-घर जाकर वोट मांगे।
इन चुनावों में इस बार सुनीता के पिता तैयारी कर रहे थे, लेकिन गांव महिला आरक्षित हो गया। इस पर उन्होंने पत्नी को चुनाव लड़ाने की सोची, लेकिन सामने सरकार की शैक्षणिक योग्यता की शर्त आ गई। इस पर परिजनों ने फैसला लिया कि गांव में चौधर पाने के लिए अपनी बेटी को चुनाव लड़ाएंगे। इसलिए उन्होंने अपनी बेटी सुनीता को मैदान में उतार दिया।
सुनीता को चुनाव लड़ने की प्रेरणा अपने पिता से मिली और जनसेवा का जजबा उसमें शुरू से ही था। सरपंच बनकर वह गांव का समुचित विकास करवाना चाहती हैं।