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‘पंथ की मर्यादा से खेल रहे हैं मक्कड़’
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 04 Jan 2016 12:47 AM IST
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हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों की बैठक सीनियर उपप्रधान दीदार सिंह नलवी की अध्यक्षता में कस्बे के किसान रेस्ट हाउस में रविवार को हुई।
बैठक में एसजीपीसी द्वारा पंज प्यारों की बर्खास्तगी की निंदा की गई। नलवी ने कहा कि 1925 से लेकर अब तक के एसजीपीसी के इतिहास का यह सबसे बड़ा काला कारनामा है। राजनीति स्वार्थों की पूर्ति के लिए जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने पंज प्यारों को बर्खास्त किया है। आरोप लगाया कि मक्कड़ पंथ की मर्यादा से खेल रहे हैं।
नलवी ने कहा कि पंथ के लिए पंज प्यारों का पद मर्यादा भरा है। शुरू से लेकर आज तक पंथ पंज प्यारों के पद को सर्वोच्च दर्जा देता आया है। जत्थेदार मक्कड़ ने सारी सीमाएं लांघते हुए पंज प्यारों को बर्खास्त कर दिया। एचएसजीपीसी और प्रदेश के सिख इस फरमान की निंदा करते हैं।
मांग करते हैं कि पंज प्यारों को बहाल किया जाए। सदस्यों ने कहा कि यदि मक्कड़ सही हैं, तो उन्हें पंज प्यारों पर कार्रवाई करने के बजाय पांच तख्तों के जत्थेदारों को रिप्लेस करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण के पीछे मक्कड़ का राजनीति स्वार्थ है।
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इसलिए मक्कड़ को अपने पद से इस्तीफा देकर सिख कौम से माफी मांगनी चाहिए। इस मौके पर एचएसजीपीसी सदस्य अपार सिंह, करनैल सिंह, कर्ण चट्ठा, रजवंत सिंह, महिंद्र चीमा, लखविंद्र सिंह, स्वर्ण सिंह गोराया, नवाब सिंह, दलेर सिंह व अमरीक सिंह सहित कई सिख मौजूद थे।
बादल और सिरसा डेरा प्रमुख दोनों एक
नलवी ने आरोप लगाया कि डेरा सिरसा प्रमुख संत गुरमीत सिंह राम रहीम की फिल्म एमएसजी को पंजाब मेें रिलीज करने के लिए सुखबीर बादल और डेरा प्रमुख की मुंबई में गुप्त बैठक हुई थी। इसमें बादल ने सौदा तय किया था कि वे डेरा प्रमुख को गुरु गोबिंद सिंह की नकल करने के आरोपों से बरी करवाएंगे।
इसके बदले में उन्हें पंजाब में अपनी संगत का समर्थन अकाली दल को देना होगा। इसी राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए पंथ की मर्यादा से खेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला एचएसजीपीसी के पक्ष में आने की पूरी उम्मीद है।
‘झींडा नहीं कर सकते पंथ के मामलों में हस्तक्षेप’
शिरोमणि अकाली दल महिला विंग की राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीबी करतार कौर ने फोन पर बताया कि जगदीश सिंह झींडा पंथ के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। उनके पास सिख पंथ के धार्मिक या किसी अन्य मामले में दखलंदाजी करने का कोई अधिकार नहीं है। श्री अकाल तख्त साहिब अमृतसर ने उन्हें पंथ से निष्कासित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिखों की सर्वोच्च संस्था है। उसे पंथ के हित में कोई भी फैसला लेने का अधिकार है। कमेटी का कोई कर्मचारी यदि नियमों की अवहेलना करते हुए अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाता हैं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष के पास है।
पार्टी महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष बीबी रविंदर कौर अजराना ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्यकारिणी और अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ को रोजमर्रा के कार्य करने का अधिकार दिया है। इसके बाद वे पिछले लंबे समय से एसजीपीसी के प्रबंध कार्य सुचारु रूप से चला रहे हैं। एसजीपीसी के अधीन आने वाले सभी स्थानों और कार्यों पर निर्णय लेने के लिए कार्यकारिणी, अध्यक्ष स्वतंत्र हैं। ऐसे में पंज प्यारों को हटाने के संबंध में लिया गया निर्णय भी वाजिब है।
शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तजिंदरपाल सिंह ढिल्लो ने कहा कि जो व्यक्ति श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा पंथ से निष्कासित किया गया हो, उसे सिखों के धार्मिक मसलों में बोलने का अधिकार नहीं है। कौम और एसजीपीसी को दोफाड़ करने का प्रयास करने वाला व्यक्ति सिख पंथ का हित सोच ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि जगदीश सिंह झींडा पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं, क्योंकि हरियाणा कमेटी की फूट जगजाहिर है।
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बैठक में एसजीपीसी द्वारा पंज प्यारों की बर्खास्तगी की निंदा की गई। नलवी ने कहा कि 1925 से लेकर अब तक के एसजीपीसी के इतिहास का यह सबसे बड़ा काला कारनामा है। राजनीति स्वार्थों की पूर्ति के लिए जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने पंज प्यारों को बर्खास्त किया है। आरोप लगाया कि मक्कड़ पंथ की मर्यादा से खेल रहे हैं।
नलवी ने कहा कि पंथ के लिए पंज प्यारों का पद मर्यादा भरा है। शुरू से लेकर आज तक पंथ पंज प्यारों के पद को सर्वोच्च दर्जा देता आया है। जत्थेदार मक्कड़ ने सारी सीमाएं लांघते हुए पंज प्यारों को बर्खास्त कर दिया। एचएसजीपीसी और प्रदेश के सिख इस फरमान की निंदा करते हैं।
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मांग करते हैं कि पंज प्यारों को बहाल किया जाए। सदस्यों ने कहा कि यदि मक्कड़ सही हैं, तो उन्हें पंज प्यारों पर कार्रवाई करने के बजाय पांच तख्तों के जत्थेदारों को रिप्लेस करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण के पीछे मक्कड़ का राजनीति स्वार्थ है।
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इसलिए मक्कड़ को अपने पद से इस्तीफा देकर सिख कौम से माफी मांगनी चाहिए। इस मौके पर एचएसजीपीसी सदस्य अपार सिंह, करनैल सिंह, कर्ण चट्ठा, रजवंत सिंह, महिंद्र चीमा, लखविंद्र सिंह, स्वर्ण सिंह गोराया, नवाब सिंह, दलेर सिंह व अमरीक सिंह सहित कई सिख मौजूद थे।
बादल और सिरसा डेरा प्रमुख दोनों एक
नलवी ने आरोप लगाया कि डेरा सिरसा प्रमुख संत गुरमीत सिंह राम रहीम की फिल्म एमएसजी को पंजाब मेें रिलीज करने के लिए सुखबीर बादल और डेरा प्रमुख की मुंबई में गुप्त बैठक हुई थी। इसमें बादल ने सौदा तय किया था कि वे डेरा प्रमुख को गुरु गोबिंद सिंह की नकल करने के आरोपों से बरी करवाएंगे।
इसके बदले में उन्हें पंजाब में अपनी संगत का समर्थन अकाली दल को देना होगा। इसी राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए पंथ की मर्यादा से खेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला एचएसजीपीसी के पक्ष में आने की पूरी उम्मीद है।
‘झींडा नहीं कर सकते पंथ के मामलों में हस्तक्षेप’
शिरोमणि अकाली दल महिला विंग की राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीबी करतार कौर ने फोन पर बताया कि जगदीश सिंह झींडा पंथ के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। उनके पास सिख पंथ के धार्मिक या किसी अन्य मामले में दखलंदाजी करने का कोई अधिकार नहीं है। श्री अकाल तख्त साहिब अमृतसर ने उन्हें पंथ से निष्कासित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिखों की सर्वोच्च संस्था है। उसे पंथ के हित में कोई भी फैसला लेने का अधिकार है। कमेटी का कोई कर्मचारी यदि नियमों की अवहेलना करते हुए अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाता हैं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष के पास है।
पार्टी महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष बीबी रविंदर कौर अजराना ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्यकारिणी और अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ को रोजमर्रा के कार्य करने का अधिकार दिया है। इसके बाद वे पिछले लंबे समय से एसजीपीसी के प्रबंध कार्य सुचारु रूप से चला रहे हैं। एसजीपीसी के अधीन आने वाले सभी स्थानों और कार्यों पर निर्णय लेने के लिए कार्यकारिणी, अध्यक्ष स्वतंत्र हैं। ऐसे में पंज प्यारों को हटाने के संबंध में लिया गया निर्णय भी वाजिब है।
शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तजिंदरपाल सिंह ढिल्लो ने कहा कि जो व्यक्ति श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा पंथ से निष्कासित किया गया हो, उसे सिखों के धार्मिक मसलों में बोलने का अधिकार नहीं है। कौम और एसजीपीसी को दोफाड़ करने का प्रयास करने वाला व्यक्ति सिख पंथ का हित सोच ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि जगदीश सिंह झींडा पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं, क्योंकि हरियाणा कमेटी की फूट जगजाहिर है।