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केयू के प्रो. दिनेश कुमार अग्रवाल बने वाईएमसीए फरीदाबाद के कुलपति

Wed, 04 Nov 2015 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र Updated Wed, 04 Nov 2015 12:20 AM IST
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KU Prof. Dinesh Kumar Agrwal become VC Of YMCA Faridabaad
केयू के इलेट्रॉनिक्स साइंस विभाग के अध्यक्ष प्रो. दिनेश कुमार अग्रवाल को वाईएमएसीए यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलोजी का कुलपति नियुक्त किया गया है।
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डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वाईएमसीए टेक्निकल यूनिवर्सिटी है। इसलिए उनका मुख्य उद्देश्य इस यूनिवर्सिटी को पेपर लेस यूनिवर्सिटी बनाना होगा। उनकी इच्छा है इस यूनवर्सिटी में सभी दस्तावेज कंप्यूटर पर हों और सारा काम ऑनलाइन किया जा सके।
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उनका सपना है कि आईआईटी की भांति वाईएमसीए को इंजीनियरिंग क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना सकें। उन्होंने अपनी नियुक्ति के लिए राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी का आभार जताया है। उनकी नियुक्ति पर केयू कुलपति हरदीप कुमार और कुलसचिव डॉ. प्रवीण कुमार सैनी ने उन्हें बधाई दी है।
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खुशी हुई दोगुना, अब जा रहा हूं अपने घर
प्रो. अग्रवाल केयू में पिछले 28 वर्ष से कार्यरत हैं। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनके लिए फरीदाबाद वाईएमसीए का कुलपति बनना खुशी की बात है।

इसके साथ ही उन्हें इस बात की भी खुशी है कि वे अपने घर जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह पलवल जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने प्राथमिक से लेकर कॉलेज तक पलवल में ही शिक्षा ग्रहण की है। उन्होंने 1982 में पलवल के एसडी कॉलेज से बीएससी नॉन मेडिकल संकाय में की थी।

उस समय रोहतक यूनिवर्सिटी में सेकेंड पोजीशन पर थे। इसके बाद 1984 में केयू से एमएससी, 1985 में एमफिल की।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से की पीएचडी
इसके बाद 1990 में इंग्लैंड कैंब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए। वहां से एमफिल इन इंजीनियरिंग और इसके बाद 1994 में प्रोफेसर एएम कैंबल के मार्गदर्शन में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी इन इंजीनियरिंग की।

वर्ष 2003 में इन्हें एसोसिएशन ऑफ कॉमन वेल्थ यूनिवर्सिटी की ओर से कैंब्रिज यूनिवर्सिटी कैंपस में सेल्विन कॉलेज में फेलोशिप मिली। फ्रांस, इटली, जर्मनी, आस्ट्रिया, इंग्लैंड, अमेरिका, रुस और अस्ट्रेलिया की यात्रा कर चुके हैं।

प्रो. अग्रवाल के 95 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इंडियन साइंस कांग्रेस के कुरुक्षेत्र चेप्टर के अध्यक्ष प्रो. अग्रवाल ने वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कार्य किया है।

आरएसएस से नजदीकियों का मिला लाभ  
डॉ. अग्रवाल और उनकी पत्नी रंजना अग्रवाल काफी लंबे समय से आरएसएस विचारधारा से जुड़े रहे हैं। लंबे समय से चर्चा थी कि डॉ. अग्रवाल या उनकी पत्नी को कुलपति अथवा रजिस्ट्रार का पद मिल सकता है।


अपने छात्र जीवन में रंजना अग्रवाल एबीवीपी की अध्यक्ष रह चुकी हैं। इस बात की भी चर्चाएं थीं कि डॉ. अग्रवान की धर्मपत्नी को रजिस्ट्रार पद सौंपा जा सकता है। डॉ. अग्रवाल ने भी माना कि वे आरएसएस की विचारधारा से बचपन से ही जुड़े हुए हैं।
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