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Kurukshetra News: रात भर हुई जमकर बारिश, खुले आसमान के नीचे भीगा 20 हजार क्विंटल से ज्यादा धान
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में मौसम की मेहरबानी बनी हुयी है। शनिवार को दिन के बाद देर रात को भी जमकर बारिश हुई, जिससे चारों ओर पानी-पानी हो गया। जिला भर में औसतन बारिश 39 एमएम बारिश दर्ज की गई, जिसमें सबसे ज्यादा थानेसर में 42 एमएम बारिश हुई। बारिश के चलते जिलेभर में अनाज मंडियों में पहुंचा 20 हजार क्विंटल से ज्यादा धान भीग गया, जिससे किसानों की चिंता फिर बढ़ गई, वहीं सोमवार को भी तेज बारिश का अनुमान लगाया जा रहा है।
शुक्रवार से शुरू हुई बारिश शनिवार देर रात्रि तक जारी रही। दिन में एक घंटा तक जमकर बारिश होने के बाद देर रात को फिर तेज बारिश हुई। हालांकि पहले दिन करीब 20 एमएम बारिश हुई, लेकिन शनिवार को जिला भर में हुई तेज बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मंडियों में किसानों को धान भीग जाने से नुकसान की आशंका होने लगी है तो वहीं खेताें में धान कटाई का काम भी प्रभावित हो गया है। सोमवार को भी बारिश होने के चलते अगले कई दिन तक धान कटाई बाधित रहने की संभावना जताई जा रही है। उधर, बारिश के चलते शहर के अनेक क्षेत्रों में जलभराव हो गया, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इन क्षेत्रों में इतनी दर्ज की गई बारिश
शाहाबाद-- -- 30 एमएम
थानेसर-- -- -- 42 एमएम
लाडवा-- -- -17 एमएम
पिहोवा-- -- 70 एमएम
बाबैन-- -- 39.2 एमएम
इस्माईलाबाद-- 39 एमएम
अगले चार दिन यह तापमान रहने का अनुमान
दिन-- - अधिकतम तापमान-- -- न्यूनतम तापमान
सोमवार-- 31 डिग्री सेल्सियस-- -- -- 25 डिग्री सेल्सियस
मंगलवार-- 32 डिग्री सेल्सियस-- -- -- 25 डिग्री सेल्सियस
बुधवार-- 32 डिग्री सेल्सियस-- -- -- 25 डिग्री सेल्सियस
वीरवार-- 32 डिग्री सेल्सियस-- -- -- 25 डिग्री सेल्सियस
तेज बारिश का फसलों में नुकसान : डॉ सीबी सिंह
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह का कहना है कि तेज बारिश का हर फसल में नुकसान हो सकता है। विशेष तौर पर धान की जो फसल कटाई की जाने लगी है या फिर पकाई पर है, उसमें नुकसान की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं कटाई भी प्रभावित होगी। बाद में रोपाई की गई धान की फसल में बारिश का फायदा भी होगा। वहीं तेज बारिश से सब्जी की फसलें भी खराब होने की संभावना बन जाती है।
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थानेसर अनाजमंडी में ही पांच हजार क्विंटल धान : दौलत
अनाजमंडी एसोसिएशन प्रधान रहे दौलत राम बंसल का कहना है कि इस समय थानेसर अनाजमंडी में ही करीब पांच हजार क्विंटल धान आया हुआ है और अधिकतर खुले आसमान के नीचे ही पड़ा है। बारिश से बचाने के लिए प्रयास भी किए गए।
डीएफएससी बोले, अभी मंडियों में पहुंचे धान का आकलन नहीं
डीएफएससी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि अभी सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है। ऐसे में किसानों द्वारा अनाजमंडियों में लाई जा रही धान का आकलन नहीं लगाया जा सकता। मंडियों में भीगे धान को लेकर भी अभी वे कुछ नहीं कह सकते।
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शुक्रवार से शुरू हुई बारिश शनिवार देर रात्रि तक जारी रही। दिन में एक घंटा तक जमकर बारिश होने के बाद देर रात को फिर तेज बारिश हुई। हालांकि पहले दिन करीब 20 एमएम बारिश हुई, लेकिन शनिवार को जिला भर में हुई तेज बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मंडियों में किसानों को धान भीग जाने से नुकसान की आशंका होने लगी है तो वहीं खेताें में धान कटाई का काम भी प्रभावित हो गया है। सोमवार को भी बारिश होने के चलते अगले कई दिन तक धान कटाई बाधित रहने की संभावना जताई जा रही है। उधर, बारिश के चलते शहर के अनेक क्षेत्रों में जलभराव हो गया, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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इन क्षेत्रों में इतनी दर्ज की गई बारिश
शाहाबाद
थानेसर
लाडवा
पिहोवा
बाबैन
इस्माईलाबाद
अगले चार दिन यह तापमान रहने का अनुमान
दिन
सोमवार
मंगलवार
बुधवार
वीरवार
तेज बारिश का फसलों में नुकसान : डॉ सीबी सिंह
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह का कहना है कि तेज बारिश का हर फसल में नुकसान हो सकता है। विशेष तौर पर धान की जो फसल कटाई की जाने लगी है या फिर पकाई पर है, उसमें नुकसान की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं कटाई भी प्रभावित होगी। बाद में रोपाई की गई धान की फसल में बारिश का फायदा भी होगा। वहीं तेज बारिश से सब्जी की फसलें भी खराब होने की संभावना बन जाती है।
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थानेसर अनाजमंडी में ही पांच हजार क्विंटल धान : दौलत
अनाजमंडी एसोसिएशन प्रधान रहे दौलत राम बंसल का कहना है कि इस समय थानेसर अनाजमंडी में ही करीब पांच हजार क्विंटल धान आया हुआ है और अधिकतर खुले आसमान के नीचे ही पड़ा है। बारिश से बचाने के लिए प्रयास भी किए गए।
डीएफएससी बोले, अभी मंडियों में पहुंचे धान का आकलन नहीं
डीएफएससी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि अभी सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है। ऐसे में किसानों द्वारा अनाजमंडियों में लाई जा रही धान का आकलन नहीं लगाया जा सकता। मंडियों में भीगे धान को लेकर भी अभी वे कुछ नहीं कह सकते।