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शहद की गुणवत्ता के बारे में दी जानकारी
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मधुमक्खी पालन केंद्र का निरीक्षण करते महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह व अन्य। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। बागवानी विभाग हरियाणा की ओर से आईबीडीसी, रामनगर में विश्व मधुमक्खी दिवस के उपलक्ष्य इंडो-इजरायल परियोजना के तहत आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। इस दौरान उद्यान विभाग हरियाणा के महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
सम्मेलन के अंतिम दिन में दो तकनीकी सत्र रखे गए। प्रथम सत्र में एसएलआईटी संगरूर के प्रोफेसर डॉ. विकास नंदा ने प्रतिभागियों को शहद की गुणवत्ता, पैरामीटर व प्रसंस्करण के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। डॉ. हरीश शर्मा ने रानी मधुमक्खी के उत्पादन और उनकी ओर से इस क्षेत्र में किये गए कार्यों के बारे में विचार रखे। नई दिल्ली से डॉ. पुष्पवनम ने शहद व मधुमक्खी के अन्य उत्पादों के मापदंडों के बारे में जानकारी दी।
इसी तकनीकी सत्र में डॉ. लोकेंद्र कुमार ने शहद के बाजारीकरण एवं निर्यात के बारे में बताया। सम्मेलन के द्वितीय तकनीकी सत्र में ईवाई के टीम लीडर सलील जीना ने हरियाणा में शहद के वैल्यू चेन अध्ययन की रिपोर्ट पेश की। डॉ. नेहा चौधरी ने दोनों दिनों की निष्कर्ष रिपोर्ट पेश की। डॉ. अर्जुन सिंह सैनी व याहिर अशेल ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए।
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कुरुक्षेत्र। बागवानी विभाग हरियाणा की ओर से आईबीडीसी, रामनगर में विश्व मधुमक्खी दिवस के उपलक्ष्य इंडो-इजरायल परियोजना के तहत आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। इस दौरान उद्यान विभाग हरियाणा के महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
सम्मेलन के अंतिम दिन में दो तकनीकी सत्र रखे गए। प्रथम सत्र में एसएलआईटी संगरूर के प्रोफेसर डॉ. विकास नंदा ने प्रतिभागियों को शहद की गुणवत्ता, पैरामीटर व प्रसंस्करण के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। डॉ. हरीश शर्मा ने रानी मधुमक्खी के उत्पादन और उनकी ओर से इस क्षेत्र में किये गए कार्यों के बारे में विचार रखे। नई दिल्ली से डॉ. पुष्पवनम ने शहद व मधुमक्खी के अन्य उत्पादों के मापदंडों के बारे में जानकारी दी।
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इसी तकनीकी सत्र में डॉ. लोकेंद्र कुमार ने शहद के बाजारीकरण एवं निर्यात के बारे में बताया। सम्मेलन के द्वितीय तकनीकी सत्र में ईवाई के टीम लीडर सलील जीना ने हरियाणा में शहद के वैल्यू चेन अध्ययन की रिपोर्ट पेश की। डॉ. नेहा चौधरी ने दोनों दिनों की निष्कर्ष रिपोर्ट पेश की। डॉ. अर्जुन सिंह सैनी व याहिर अशेल ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए।
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