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उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण
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संगोष्ठी को संबोधित करते केयू वीसी प्रो. सोमनाथ सचदेवा। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। भारत उद्योग 4.0 और समाज 5.0 के एकीकरण में दूसरे देशों के मुकाबले बहुत आगे है। उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकी भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। यह कहना है कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का। वे शुक्रवार को यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की ओर से आईसीएसएसआर के सहयोग से आयोजित इंडस्ट्री 4.0 एंड सोसायटी 5.0, इनसाइट्स एंड इंप्लीकेशंस फॉर इंडियन बिजनेस विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
कुलपति ने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति व्यावसायिक दृष्टि से ग्राहकों की अपेक्षा, उत्पाद वृद्धि, सहयोगी नवाचार और संगठनात्मक रूपों पर आधारित है। इसके अलावा भौतिक उत्पादों और सेवाओं को अब डिजिटल क्षमताओं के साथ बढ़ाया जा सकता है, जो उनके मूल्य को भी निर्धारित करते हैं। इससे पहले 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि कृषि और किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक डॉ. हरदीप सिंह ने कहा कि उद्योग 4.0 की अवधारणा कृषि उद्योग में भी क्रांति ला सकती है। कहा कि किसान समुदाय भारत में सबसे बड़ा सामाजिक समूह है और समाज 5.0 की अवधारणा उनके भाग्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
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मुख्य वक्ता राकेश कौल ने दुनिया के विभिन्न देशों में उद्योग 4.0 और समाज 5.0 की स्थिति की तुलना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जापान जैसे देश इस संबंध में सक्रिय है और भारत जैसे विकासशील देशों को थोड़ा सा प्रयास करना होगा। उन्होंने एक केस स्टडी भी प्रस्तुत की कि कैसे उद्योग 4.0 निकट भविष्य में भारतीय उद्योग को आकार देगा।
आईसीएसएसआर के निदेशक डॉ. संजय कौशिक ने प्रासंगिक विषय को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि ये उद्योग को एक नया आकार देंगे। इस मौके पर यूएसएम की चेयरपर्सन डॉ. निर्मला चौधरी, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय के डीन डॉ. बीएस बोड़ला, आयोजन सचिव डॉ. अजय सोलखे सहित अन्य मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। भारत उद्योग 4.0 और समाज 5.0 के एकीकरण में दूसरे देशों के मुकाबले बहुत आगे है। उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकी भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। यह कहना है कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का। वे शुक्रवार को यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की ओर से आईसीएसएसआर के सहयोग से आयोजित इंडस्ट्री 4.0 एंड सोसायटी 5.0, इनसाइट्स एंड इंप्लीकेशंस फॉर इंडियन बिजनेस विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
कुलपति ने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति व्यावसायिक दृष्टि से ग्राहकों की अपेक्षा, उत्पाद वृद्धि, सहयोगी नवाचार और संगठनात्मक रूपों पर आधारित है। इसके अलावा भौतिक उत्पादों और सेवाओं को अब डिजिटल क्षमताओं के साथ बढ़ाया जा सकता है, जो उनके मूल्य को भी निर्धारित करते हैं। इससे पहले 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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मुख्य अतिथि कृषि और किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक डॉ. हरदीप सिंह ने कहा कि उद्योग 4.0 की अवधारणा कृषि उद्योग में भी क्रांति ला सकती है। कहा कि किसान समुदाय भारत में सबसे बड़ा सामाजिक समूह है और समाज 5.0 की अवधारणा उनके भाग्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
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मुख्य वक्ता राकेश कौल ने दुनिया के विभिन्न देशों में उद्योग 4.0 और समाज 5.0 की स्थिति की तुलना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जापान जैसे देश इस संबंध में सक्रिय है और भारत जैसे विकासशील देशों को थोड़ा सा प्रयास करना होगा। उन्होंने एक केस स्टडी भी प्रस्तुत की कि कैसे उद्योग 4.0 निकट भविष्य में भारतीय उद्योग को आकार देगा।
आईसीएसएसआर के निदेशक डॉ. संजय कौशिक ने प्रासंगिक विषय को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि ये उद्योग को एक नया आकार देंगे। इस मौके पर यूएसएम की चेयरपर्सन डॉ. निर्मला चौधरी, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय के डीन डॉ. बीएस बोड़ला, आयोजन सचिव डॉ. अजय सोलखे सहित अन्य मौजूद रहे।