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प्री-प्राइमरी स्कूल चलाने की तैयारी में सरकार, लेकिन अपने हकों के लिए सड़कों पर उतरी आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर
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सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी स्कूल चलाने की तैयारी में है और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रारंभिक शिक्षा का प्रशिक्षण लेकर अपने हक के लिए सड़कों पर उतर गई हैं। साथ में हेल्पर्स भी कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन को मजबूत बनाने में पूरा सहयोग दे रही हैं। ऐसे में भला सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी स्कूल चलाने का देखा गया सपना कैसे साकार हो सकता है?
बता दें कि शिक्षा विभाग, प्रथम एनजीओ और डाइट की ओर से सितंबर में आंगनबाड़ी सुपरवाइजर और कार्यकर्ताओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अब सरकार इस योजना को अमलीजामा पहनाने को तैयार है, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर्स के हड़ताल पर चले जाने के बाद ब्रेक लगते नजर आ रहे हैं। आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की राज्य प्रधान कलावती सैन ने विशेष बातचीत में बताया कि यूनियन के पदाधिकारियों एवं सरकार के बीच वर्ष 2018 में एक समझौता हुआ था, लेकिन सरकार उसे लागू नहीं कर रही।
उन्होंने कहा कि समझौते के दौरान सरकार ने कुशल और अर्ध कुशल का दर्जा देने की बात कही थी, लेकिन लागू नहीं किया। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 1500 रुपये कार्यकर्ता और 750 रुपये हेल्पर्स को देने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक वेतन में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। यही नहीं, ग्रामीण क्षेत्र में 200 रुपये और शहरी क्षेत्र में 1500 रुपये आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया दिया जा रहा है। इतने कम किराए में केंद्र चलाना बहुत मुश्किल हैं। वे 4 हजार रुपये किराया करने की मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी बात है सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी स्कूल खोलने जा रही है, लेकिन इसके जरिए सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राइवेट एनजीओ के हवाले कर रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन नहीं दिया गया और न ही टीए/डीए दिया जा रहा। इन लंबित पड़ी मांगों के समर्थन में संघर्षरत हैं।
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बता दें कि शिक्षा विभाग, प्रथम एनजीओ और डाइट की ओर से सितंबर में आंगनबाड़ी सुपरवाइजर और कार्यकर्ताओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अब सरकार इस योजना को अमलीजामा पहनाने को तैयार है, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर्स के हड़ताल पर चले जाने के बाद ब्रेक लगते नजर आ रहे हैं। आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की राज्य प्रधान कलावती सैन ने विशेष बातचीत में बताया कि यूनियन के पदाधिकारियों एवं सरकार के बीच वर्ष 2018 में एक समझौता हुआ था, लेकिन सरकार उसे लागू नहीं कर रही।
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उन्होंने कहा कि समझौते के दौरान सरकार ने कुशल और अर्ध कुशल का दर्जा देने की बात कही थी, लेकिन लागू नहीं किया। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 1500 रुपये कार्यकर्ता और 750 रुपये हेल्पर्स को देने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक वेतन में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। यही नहीं, ग्रामीण क्षेत्र में 200 रुपये और शहरी क्षेत्र में 1500 रुपये आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया दिया जा रहा है। इतने कम किराए में केंद्र चलाना बहुत मुश्किल हैं। वे 4 हजार रुपये किराया करने की मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी बात है सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी स्कूल खोलने जा रही है, लेकिन इसके जरिए सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राइवेट एनजीओ के हवाले कर रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन नहीं दिया गया और न ही टीए/डीए दिया जा रहा। इन लंबित पड़ी मांगों के समर्थन में संघर्षरत हैं।
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