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स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल से डगमगाई सेवाएं
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सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कोरोना योद्धाओं के हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य सेवाएं डगमगा गई हैं। कोविड सैंपलिंग व टेस्टिंग का कार्य ठप हो गया है। जिले में चल रहे टीकाकरण अभियान की गति भी धीमी पड़ गई है। जिला अस्पताल में ओमिक्रॉन वैरिएंट को खतरे को भांपते हुए तैयार की गई लैब में पिछले दो दिन से एक भी सैंपल की जांच नहीं हुई।
स्वास्थ्य विभाग को सिर्फ रैपिड एंटीजन सैंपल का सहारा लेना पड़ रहा है। हर रोज खुला रहने वाले जिला अस्पताल के टीकाकरण पर रविवार को ताला लटका रहा। इतना ही नहीं, सैंपलिंग रूम में भी काम पूरी तरह से प्रभावित दिखाई दिया। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोविड बुलेटिन में रविवार को 180 सैंपल एकत्रित किए हुए दिखाए गए हैं, लेकिन रविवार तक 375 आरटी पीसीआर सैंपलों की जांच होना बाकी था।
जिला सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत कार्यरत 36 कर्मचारी सरकार से पंजाब की तर्ज पर पक्का करने की मांग कर रहे हैं। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने समय पर मानदेय न मिलने पर भी निरंतर सेवा जारी रखी। अभी भी दो माह का वेतन अटका पड़ा है। उन्होंने मुश्किल दौर में स्वास्थ्य विभाग के नियमित कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना संक्रमितों को उपचार दिया था, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग उनकी अनदेखी कर रहा है।
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उप सिविल सर्जन एवं जिला नोडल अधिकारी डॉ. अनुपमा सिंह का कहना है कि जिलेभर में ज्यादातर लोगों को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है। अब रविवार के दिन जिला अस्पताल में कोरोना रोधी टीके नहीं लगाए जाएंगे। वहीं, अतिरिक्त प्रवर चिकित्सा अधिकारी डॉ. जगमिंद्र मलिक का कहना है कि शनिवार से ही सैंपलिंग और टेस्टिंग का कार्य प्रभावित हो गया है। व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
विश्वासघात न करे सरकार : सुधा शर्मा
हेल्पर सुधा शर्मा का कहना है कि कोरोना काल में जान की परवाह किए बिना बेहतर सेवाएं दीं। अब कोरोना का प्रकोप कम हुआ तो उन्हें एक्सटेंशन नहीं दी गई। इसकी वजह से परिवार को भी मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार उनके साथ विश्वासघात न करें।
कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का संकट न आए : जसविंदर कौर
डाटा एंट्री ऑपरेटर जसविंदर कौर का कहना है कि जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में स्वास्थ्य कर्मचारियों का टोटा है। सरकार उन्हेंआउटसोर्सिंग पॉलिसी में नहीं रखना चाह रही तो कोई और व्यवस्था करें, ताकि कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का संकट न आए।
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कुरुक्षेत्र। कोरोना योद्धाओं के हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य सेवाएं डगमगा गई हैं। कोविड सैंपलिंग व टेस्टिंग का कार्य ठप हो गया है। जिले में चल रहे टीकाकरण अभियान की गति भी धीमी पड़ गई है। जिला अस्पताल में ओमिक्रॉन वैरिएंट को खतरे को भांपते हुए तैयार की गई लैब में पिछले दो दिन से एक भी सैंपल की जांच नहीं हुई।
स्वास्थ्य विभाग को सिर्फ रैपिड एंटीजन सैंपल का सहारा लेना पड़ रहा है। हर रोज खुला रहने वाले जिला अस्पताल के टीकाकरण पर रविवार को ताला लटका रहा। इतना ही नहीं, सैंपलिंग रूम में भी काम पूरी तरह से प्रभावित दिखाई दिया। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोविड बुलेटिन में रविवार को 180 सैंपल एकत्रित किए हुए दिखाए गए हैं, लेकिन रविवार तक 375 आरटी पीसीआर सैंपलों की जांच होना बाकी था।
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जिला सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत कार्यरत 36 कर्मचारी सरकार से पंजाब की तर्ज पर पक्का करने की मांग कर रहे हैं। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने समय पर मानदेय न मिलने पर भी निरंतर सेवा जारी रखी। अभी भी दो माह का वेतन अटका पड़ा है। उन्होंने मुश्किल दौर में स्वास्थ्य विभाग के नियमित कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना संक्रमितों को उपचार दिया था, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग उनकी अनदेखी कर रहा है।
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उप सिविल सर्जन एवं जिला नोडल अधिकारी डॉ. अनुपमा सिंह का कहना है कि जिलेभर में ज्यादातर लोगों को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है। अब रविवार के दिन जिला अस्पताल में कोरोना रोधी टीके नहीं लगाए जाएंगे। वहीं, अतिरिक्त प्रवर चिकित्सा अधिकारी डॉ. जगमिंद्र मलिक का कहना है कि शनिवार से ही सैंपलिंग और टेस्टिंग का कार्य प्रभावित हो गया है। व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
विश्वासघात न करे सरकार : सुधा शर्मा
हेल्पर सुधा शर्मा का कहना है कि कोरोना काल में जान की परवाह किए बिना बेहतर सेवाएं दीं। अब कोरोना का प्रकोप कम हुआ तो उन्हें एक्सटेंशन नहीं दी गई। इसकी वजह से परिवार को भी मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार उनके साथ विश्वासघात न करें।
कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का संकट न आए : जसविंदर कौर
डाटा एंट्री ऑपरेटर जसविंदर कौर का कहना है कि जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में स्वास्थ्य कर्मचारियों का टोटा है। सरकार उन्हेंआउटसोर्सिंग पॉलिसी में नहीं रखना चाह रही तो कोई और व्यवस्था करें, ताकि कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का संकट न आए।

जिला अस्पताल में टीकाकरण केंद्र पर लटका ताला। संवाद- फोटो : Kurukshetra

जिला अस्पताल में हड़ताल के चलते बंद पड़ा कोरोना जांच केंद्र। संवाद- फोटो : Kurukshetra