फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   haryanas first university run with the help of acting officers

कार्यवाहकों के भरोसे चल रही हरियाण्ाा की पहली यूनिवर्सिटी

Sat, 21 Nov 2015 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र Updated Sat, 21 Nov 2015 01:10 AM IST
विज्ञापन
प्रदेश की पहली यूनिवर्सिटी एडहॉक पर चल रही है। केयू कुलपति से लेकर कई महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुखों का कार्य कार्यवाहकों के भरोसे चल रहा है।
विज्ञापन


कई के पास एडिशनल चार्ज इतने ज्यादा हैं कि दूसरे विभागों का तो दूर, वह अपने विभाग तक का काम सही तरीके से नहीं कर पा रहे। कई महत्पवूर्ण पदों पर तो नियमित नियुक्ति की दरकार लंबे समय से है। ऐसा नहीं है कि संबंधित  विभागों में प्रोफेसर या एसिस्टेंट प्रोफेसर नहीं है। प्रदेश में सरकार के परिवर्तन के साथ ही उम्मीद थी कि यूनिवर्सिटी की कार्यशैली में सुधार आ जाएगा, लेकिन एक वर्ष बाद भी हालात में सुधार नहीं आया है।


प्रदेश की सबसे पहली यूनिवर्सिटी केयू में हालात सही नहीं हैं। केयू में 45 से अधिक विभाग हैं। इनमें से कई विभाग ऐसे हैं, जिनमें विभाग प्रमुख ही नहीं है। इन विभागों का चार्ज दूसरे विभागों के प्रमुखों या अधिकारियों को सौंपा हुआ है। इस वजह से संबंधित विभाग में आए दिन परेशानी आ रही है।
विज्ञापन


एक ही अधिकारी पर कई-कई चार्ज होने के कारण वे अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं।

इन विभागों के ये हैं हालात
विभाग    मौजूदा निदेशक    इस विभाग से
दूरवर्ती शिक्षा विभाग    कार्यवाहक निदेशक डॉ.आरके शर्मा    जूलोजी विभाग से
जनसंचार एवं मीडिया विभाग    कार्यवाहक निदेशक प्रो.एसएस बूरा    टूरिज्म विभाग के निदेशक
यूआईईटी संस्थान    कार्यवाहक निदेशक सुनील ढिंगरा    निदेशक इंस्ट्रूमेंटेंशन, यूनिवर्सिटी आईटी सेल के चेयरमेन
यूनिवर्सिटी कॉलेज    कार्यवाहक प्राचार्य डॉ.आरके सुदन    नियमित पोस्ट लंबे समय से रिक्त
कॉलेज ऑफ एजुकेशन    कार्यवाहक डॉ.तरुणा ढल    नियमित पोस्ट लंबे समय से रिक्त
डीवाईसीए    कार्यवमाहक डॉ.एमएस पूनिया    यूनिवर्सिटी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष व धरोहर के क्यूरेटर
लाइब्रेरियन    कार्यवाहक अरविंद मलिक,    फिजिकल एजूकेशन विभाग से
इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ    कार्यवाहक निदेशक डॉ.आरके गुप्ता    65 वर्ष के हो चुके हैं
डीन ऑफ कॉलेजेज    प्रो.भीम सिंह के पास चार्ज    प्रो.टीआर कुंडू के रिटारमेंट के बाद ऐसे ही चल रहा

एक से अधिक चार्ज हैं इन पर
डीन स्टूडेंट वेलफेयर    प्रो.अनिल वशिष्ठ    गणित विभाग के चेयरमैन भी
होर्टीकल्चर एवं क्लीनलीनेस के चेयरमैन    प्रो.नरेंद्र सिंह    बॉटनी विभाग के चेयरमैन भी
चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर (पद रिक्त)    डॉ.अनिल गुप्ता    इन्वायरमेंट विभाग
निदेशक पब्लिक रिलेशन (पद रिक्त)    प्रो.बृजेश साहनी    अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर
कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन-आर-2    पंकज गुप्ता    ओएसडी टू वीसी का चार्ज भी
पीआरओ (पद लंबे समय से खाली)    डॉ.अशोक शर्मा    जनसंचार विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर

इन सब को किया जा रहा दरकिनार
यूनिवर्सिटी प्रशासन की अनदेखी कहें या मनमानी, लेकिन संबंधित विभागों में प्रोफेसर या असिस्टेंट प्रोफेसर होने के बाद भी उन पर दूसरे विभागों के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। जिन विभागों से कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं, उनका उन विभागों से कोई भी समन्वय नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में विभागों में छात्र अपने कार्यों के लिए चक्कर लगाते रहते हैं। यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरी साइंस विभाग है और उसमें कई प्रोफेसर भी हैं, लेकिन लाइब्रेरियन का चार्ज फिजिकल एजुकेशन विभाग के प्रोफेसर के पास है। जनसंचार विभाग में भी संबंधित  विभाग के सहायक प्रोफेसर हैं, लेकिन चार्ज टूरिज्म विभाग के निदेशक के पास है।

यूनिवर्सिटी कैलेंडर के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर  को विभागाध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसी तरह डीवाईसीए के लिए संगीत विभाग के कई प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर मौजूद हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी कॉलेज के हिंदी के विभागाध्यक्ष को चार्ज सौंपा गया है। उनके पास धरोहर के क्यूरेटर का पद भी है, जबकि यूनिवर्सिटी में एन्सिएंट हिस्ट्री विभाग है।

नैक के नियमानुसार होेने चाहिए नियमित
नैक के नियमानुसार यूनिवर्सिटी की ग्रेडिंग बेहतर होने के लिए कुछ नियम जरूरी हैं। इनमें सभी विभागों में शिक्षकों की संख्या का पूरा होना, यूआईईटी में नियमित निदेशक, यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी में नियमित लाइब्रेरियन और मुख्य सुरक्षा अधिकारी नियमित होना जरूरी है।

केयू में हर विभाग के परमानेंट इंचार्ज होने जरूरी है। दूसरे कार्यों को करने में समय भी लगता है। कई बार उलझन भी हो जाती है। यूनिवर्सिटी में जिस भी विभाग के संबंधित जो सर्विसमेन है, उसे कार्यवाहक की जगह परमानेंट जिम्मेदारी सौंपी जाए। छात्र हित में यह सही होगा। यूनिवर्सिटी में स्थायी कुलपति के लिए भी सरकार को प्रयास करना चाहिए।
जसविंदर खैरा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इनसो।

"विभागों और संस्थानों में परमानेंट अध्यक्ष होने बेहद जरूरी हैं। कार्यवाहक होने का सबसे बड़ा प्रभाव ये पड़ता है कि प्रमुखों से मिलने के लिए विद्यार्थी इधर से उधर भटकते रहते हैं। विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के उच्च पदों पर स्थायी नियुक्तियां होनी चाहिए।

सुनील भारद्वाज, सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी, एबीवीपी, कुरुक्षेत्र।  

केयू में कई महत्वपूर्ण पद टीचिंग और नॉन टीचिंग में रिक्त पड़े हुए हैं। पहले कोई पत्र आया था जिसमें प्रदेश में रिक्रुटमेंट बंद होने की बात सामने आई थी। सरकार को पत्र लिखकर दिशा निर्देश मांगे गए हैं। सरकार से गाईड लाइन आते ही इन पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा कई विभागों में प्रमुख एडिशनल चार्ज पर हैं। विभाग में सीनियर प्रोफेसर आदि न होने पर एडिशनल चार्ज दे दिया जाता है। केयू प्रशासन काफी सोच विचार कर जिम्मेदारियां दी गई हैं। अभी और भी रिव्यू किए जाने हैं।
डॉ. प्रवीण सैनी, रजिस्ट्रार, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed