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जीएसटी की मार, रेडीमेड गारमेंट्स दुकानदार बेहाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Sep 2021 01:24 AM IST
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GST hit, readymade garments shopkeepers helpless
कोरोना काल में मंदी की मार झेल रहे दुकानदारों को अब एक और नया झटका लगने जा रहा है। जीएसटी परिषद ने रेडीमेड कपड़ों पर 01 जनवरी, 2022 से जीएसटी बढ़ाने का फैसला लिया है। ऐसे में रेडीमेड गारमेंट्स संचालकों का कहना है अभी तो वे पिछले डेढ़ साल की मंदी से भी नहीं उभरे हैं, ऐसे में सिले हुए कपड़ों पर जीएसटी बढ़ जाने से महंगे कपड़े कोई ग्राहक नहीं खरीदेगा, जिस कारण दुकानदारी बिल्कुल ठप हो जाएगी।
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पहले जहां रेडिमेट गारमेंट्स पर पांच प्रतिशत जीएसटी निर्धारित किया गया और दूसरी बार 12 प्रतिशत किया गया था। वहीं, अब इसे और बढ़ाने का फैसला लिया गया है। थोक विक्रेताओं का कहना है कि जीएसटी बढ़ने से सबसे ज्यादा मार उन पर पड़ेगी। थोक विक्रेता पक्के बिलों पर कपड़ों को खरीदते हैं। वहीं, दुकानदार उनसे जीएसटी रेट को छोड़कर 50 रुपये के मार्जिन पर कपड़े ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि जिन दुकानदारों के पास जीएसटी नंबर है उन्हें ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। उसे खरीदारी भी जीएसटी के हिसाब से करनी पड़ती है और ब्रिकी भी।
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जीएसटी का बढ़ना दुकानदारों के लिए नुकसानदायक कपिल
फेसबुक गारमेंट्स संचालक कपिल ढांडा ने बताया कि रेडीमेड गारमेंट्स पर जीएसटी बढ़ना सरासर गलत है। जीएसटी बढ़ने से दुकानदार के लिए बहुत नुकसानदायक है। ग्राहक हमसे उसी रेट में कपड़े खरीदेगा, लेकिन कपड़े पर जीएसटी बढ़ने का खामियाजा सिर्फ हमें ही उठाना पड़ेगा।
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दुकानदारों के साथ धोखा : अश्वनी शर्मा
देवांश गारमेंट्स संचालक अश्वनी शर्मा ने बताया कि जीएसटी का बढ़ना रेडीमेड गारमेंट्स दुकानदारों के साथ धोखा है। रेडीमेड गारमेंट्स पर पहले ही 12 प्रतिशत जीएसटी निर्धारित किया हुआ था, लेकिन एक बार फिर जीएसटी बढ़ जाने पर दुकानदारों पर दोहरी मार पड़ जाएगी।
सरकार के फैसला की सर्वमान्य : रवि
मुखी गारमेंट्स संचालक रवि ने बताया कि रेडीमेड गारमेंट पर जीएसटी का बढ़ना सरासर गलत है। इससे महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। परिवार को चलाने के लिए हमारे लिए सरकार का फैसला सर्वमान्य रहेगा।
जीएसटी का बढ़ना थोक विक्रेता के लिए भी नुकसानदायक : प्रेम
थोक विक्रेता प्रेम कुमार ने बताया कि रेडीमेड गारमेंट पर जीएसटी का बढ़ना थोक विक्रेता व रेडीमेड गारमेंट्स दुकानदारों के लिए नुकसानदायक है। इसके कारण कपड़े महंगे होंगे। वहीं, जो दुकानदार कच्चे बिलों पर माल की खरीदारी व बिक्री करता है उसके लिए जीएसटी के बढ़ने और घटने पर कोई फर्क नही पड़ता।
मार्केट में प्रतिस्पर्धा बहुत, दुकानदार बढ़े रेट से करते हैं ऐतराज : जितेंद्र
थोक विक्रेता जितेंद्र कुमार ने बताया कि जीएसटी का बढ़ना थोक विक्रेता के लिए घाटे का सौदा साबित होगा। हमें पीछे से माल पक्के बिलों पर लेना पड़ता है, लेकिन दुकानदार हमसे 50 रुपये के मार्जिन के साथ खरीदारी कर लेते हैं। वहीं, अगर बढ़े रेट पर माल देंगे तो मार्केट में प्रतिस्पर्धा बहुत है दुकानदार अपने थोक विक्रेता को बदल देते है। इसमें हमारा सबसे बड़ा नुकसान है। जीएसटी का बढ़ना सरासर गलत है।

पांच प्रतिशत जीएसटी से ही हो गई थी ग्राहकों में कमी: गगन
ओम नम: शिवाय रेडीमेड गारमेंट्स संचालक गगन ने बताया कि पहले 5 प्रतिशत जीएसटी के बढ़ने से ही दुकान पर ग्राहकों की कमी हो गई थी। अब फिर से जीएसटी बढ़ने से तो ग्राहक बाजार में ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे।
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