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गुरुद्वारा सेवा संभाल पर बढ़ रही तकरार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Oct 2022 01:36 AM IST
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Growing dispute over the handling of Gurudwara service
कानून का बहाना कर 100 साल पहले बनाई गई सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को दोफाड़ करने का षड्यंत्र रचा गया है। इसे न तो एसजीपीसी बर्दाश्त करेगी और न ही सिख संगत। इसके विरोध में चार अक्तूबर को हरियाणा-पंजाब के मेंबर अमृतसर में एकत्रित होकर डीसी को ज्ञापन देंगे। वहीं सात अक्तूबर को हरियाणा पंजाब की सिख संगत रोष मार्च निकालेगी। यह कहना है एसजीपीसी वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क का। वे सोमवार को सिख मिशन हरियाणा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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उन्होंने दावा किया कि साल 2014 में हरियाणा की तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के हक में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को लेकर करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला व यमुनानगर की सिख संगत एकत्रित हुई है। संगत ने इस विषय पर गंभीरता से विचार-विमर्श करते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर का साथ देने का निर्णय लिया है।
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इस दौरान मीटिंग भी की गई, जिसमें पूर्व मेंबर गुरदीप सिंह भानोखेड़ी, बलजिंदर सिंह चंडियाला, गुरुद्वारा श्री शीश गंज साहिब तरावड़ी लोकल गुरुद्वारा प्रंबधक कमेटी के प्रधान प्रताप सिंह, शिअद कुरुक्षेत्र के प्रधान जरनैल सिंह बोढी, अमरजीत सिंह नंबरदार, प्रेम सिंह लाडवा, जोगा सिंह रोहटी, ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी के पूर्व हैड ग्रंथी बाबा अमरीक सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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एसजीपीसी मेंबर हरभजन सिंह और बलदेव सिंह कैमपुरा ने कहा कि बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं कि हरियाणा के गुरुद्वारों का बजट पंजाब ले जाया जा रहा है। यहां महज 44 करोड़ का बजट है जबकि इससे गई गुना यहां के गुरुद्वारे व अन्य सिख संस्थानों पर खर्च किया जा रहा है। पीपीमीरी मेडिकल कॉलेज में आज भी हर रोज करीब 600 ओपीडी है। वहां हर आधुनिक चिकित्सा सुविधा भी दी गई है। गुरुद्वारों के बजट को लेकर हरियाणा के सिखों को कुछ स्वार्थी सिख नेता गुमराह कर रहे हैं। हरियाणा की सिख संगत को दोफाड़ करने और श्री अकाल तख्त साहिब से अलग करने की साजिश रची गई है। इसे हरियाणा की सिख संगत किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। इस फैसले का डटकर विरोध किया जाएगा।
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