{"_id":"57ed60d44f1c1b7927574b98","slug":"grease-two-will-again-buy-fogging-machine-kurukshetra","type":"story","status":"publish","title_hn":"तेल दो, मशीन खरीदो फिर होगी फॉगिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तेल दो, मशीन खरीदो फिर होगी फॉगिंग
सादिक अली/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Fri, 30 Sep 2016 12:13 AM IST
विज्ञापन
तेल दो, मशीन खरीदो फिर होगी फॉगिंग, कुरुक्षेत्र
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मच्छरों और बीमारियों से जूझ रही कई पंचायतों को अब फॉगिंग के लिए तेल की मांग का कड़वा धुआं भी सहन करना पड़ रहा है। शहर से लगती तीन पंचायतों में से किसी से फॉगिंग के लिए घरों के हिसाब से तेल का खर्च मांगा गया तो किसी ने सीधे दो सौ लीटर तक तेल की मांग कर दी गई। एक पंचायत के सरपंच के बेटे ने जब फोन किया तो उसे पहले 40 हजार रुपये की मशीन खरीदने के लिए कह दिया गया। हालांकि, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि महज पांच लीटर डीजल और एक लीटर पेट्रोल ही पंचायत का खर्च ही पंचायतों को देना है।
पिपली और बीड़ पिपली में बीमारियों से ग्रस्त लोग परेशान हैं। गंदगी और मच्छरों से निजात के लिए कई प्रयास होने के बाद भी यहां की हालत नहीं सुधरी। पंच से लेकर आम लोग, डेंगू मलेरिया और चिकनगुनिया संदिग्ध सहित वायरल बुखार से पीड़ित हैं। ऐसे में यहां सरपंच के पतियों ने जब फॉगिंग के लिए स्वास्थ्य महकमे में फोन किया तो वहां से मिले जवाब को सुनकर सभी हैरत में पड़ गए हैं।
100 घर पर 10 लीटर डीजल, दो लीटर पेट्रोल की मांग
बीड़ पिपली की सरपंच बबली देवी के पति दिनेश कुमार ने बताया कि यहां बीमारियों से लोग परेशान हो रहे हैं। फॉगिंग के लिए जब स्वास्थ्य विभाग के एक नंबर पर कॉल किया और फॉगिंग कराने की बात कही। इस जिस व्यक्ति से बात हुई उसने अपना नाम नहीं बताया लेकिन कहा कि तेल का खर्च पंचायतों को ही उठाना है। इसके लिए सौ घर के हिसाब से 10 लीटर डीजल और दो लीटर पेट्रोल की मांग की। खर्च उठाने की सूरत और रजामंदी पर ही दो घंटे के अंदर फॉगिंग कराने का दावा भी किया गया। दिनेश ने बताया कि जब उस व्यक्ति से नाम पूछा गया तो उसने कहा नाम का क्या करना है?
विज्ञापन
पिपली के लिए लगेगा 200 लीटर तेल
इसी तरह बीड पिपली की सरपंच नवजोत कौर के पति गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उन्होंने भी फॉगिंग के लिए उसी नंबर पर फोन किया। उनसे बताया कि दो माह पहले फॉगिंग के लिए बात की थी, आज तक नहीं हुई। इस पर वहां से जवाब मिला। तेल का खर्च उठाना पड़ेगा। जब पूछा कितना तेल लगेगा? कहा दो सौ लीटर । गुरप्रीत का कहना था कि 10-15 लीटर तेल हो तो उसका खर्च उठाया भी जा सकता है, लेकिन दौ सौ लीटर तेल बहुत ज्यादा है। उनका कहना था कि पिपली में करीब ढाई से तीन हजार घर है। इस लिहाज से फॉगिंग कराने के लिए ढाई सौ से तीन सौ लीटर तेल का खर्च बताया गया। इसकी कीमत 12 से 15 हजार रुपये तक आएगी। जबकि फॉगिंग का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग है और यहां लोग बीमारी से परेशान हैं। इसके बाद भी कोई सुध लेने के लिए तैयार नहीं है। खर्च पर अटके हुए हैं। शहरों में फॉगिंग फ्री में हो रही है, तो गांव के लोगों के लिए खर्च की बाध्यता क्यों?
पहले नई मशीन खरीदो
बीडीओ ऑफिस में जब दोनों सरपंच इस मसले पर बात कर रहे थे। तभी वहां किशनपुरा के सरपंच रामपाल के बेटे अजय भी पहुंचे। जब उन्हें पता चला तो उन्होंने भी उस नंबर पर फोन किया। उन्हें कहा गया फॉगिंग के लिए नई मशीन खरीदो। यह पंचायतों को ही खरीदनी है। मशीन की कीमत पूछी तो बताया 40 हजार रुपये की मशीन खरीदो तब ही फॉगिंग हो पाएगी। अजय ने पूछा जो पंचायतें सक्षम नहीं है इतना खर्च उठाने में वह क्या करें। इस पर जवाब दिया बीडीओ ऑफिस में दरख्वास्त दे दो।
पंचायतें के खाली हाथ
सरपंचों के पतियों दिनेश और गुरप्रीत ने बताया कि अभी तक सरकार से पंचायतों को एक रुपये का फंड नहीं मिला। ऐसे में फॉगिंग के लिए हजारों रुपये कहां से खर्च करें। पांच दस लीटर हो तो कुछ किया भी जा सकें। यहां तो घरों की संख्या के हिसाब से तेल मांगा जा रहा है। फॉगिंग नहीं होने से मच्छरों की भरमार हो रही है और लोग बीमार हो रहे हैं। ऐसे में यदि बीमारियों ने ज्यादा पैर पसार लिए और महामारी फैली तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
यह कहते हैं अधिकारी
शहर में फॉगिंग का जिम्मा नगर परिषद को सौंप दिया गया है। सभी मशीनें भी नप को सौंप दी है। गांवों में फॉगिंग की जिम्मेदारी पंचायतों की है। एक मशीन में पांच लीटर डीजल और एक लीटर पेट्रोल लगता है। इससे ज्यादा नहीं।
-डॉ. केके शर्मा, मलेरिया नोडल ऑफिसर
नगर परिषद सीमा क्षेत्र में फॉगिंग के लिए किसी को कुछ नहीं खर्च करना है। फॉगिंग के लिए न तो तेल मांगा जाता है और न ही कोई अन्य खर्च। जहां तक गांवों में फॉगिंग का सवाल यह तो यह स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा है।
-कर्मचंद, सेनेट्री इंस्पेक्टर नगर परिषद थानेसर
विज्ञापन
पिपली और बीड़ पिपली में बीमारियों से ग्रस्त लोग परेशान हैं। गंदगी और मच्छरों से निजात के लिए कई प्रयास होने के बाद भी यहां की हालत नहीं सुधरी। पंच से लेकर आम लोग, डेंगू मलेरिया और चिकनगुनिया संदिग्ध सहित वायरल बुखार से पीड़ित हैं। ऐसे में यहां सरपंच के पतियों ने जब फॉगिंग के लिए स्वास्थ्य महकमे में फोन किया तो वहां से मिले जवाब को सुनकर सभी हैरत में पड़ गए हैं।
विज्ञापन
100 घर पर 10 लीटर डीजल, दो लीटर पेट्रोल की मांग
बीड़ पिपली की सरपंच बबली देवी के पति दिनेश कुमार ने बताया कि यहां बीमारियों से लोग परेशान हो रहे हैं। फॉगिंग के लिए जब स्वास्थ्य विभाग के एक नंबर पर कॉल किया और फॉगिंग कराने की बात कही। इस जिस व्यक्ति से बात हुई उसने अपना नाम नहीं बताया लेकिन कहा कि तेल का खर्च पंचायतों को ही उठाना है। इसके लिए सौ घर के हिसाब से 10 लीटर डीजल और दो लीटर पेट्रोल की मांग की। खर्च उठाने की सूरत और रजामंदी पर ही दो घंटे के अंदर फॉगिंग कराने का दावा भी किया गया। दिनेश ने बताया कि जब उस व्यक्ति से नाम पूछा गया तो उसने कहा नाम का क्या करना है?
विज्ञापन
पिपली के लिए लगेगा 200 लीटर तेल
इसी तरह बीड पिपली की सरपंच नवजोत कौर के पति गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उन्होंने भी फॉगिंग के लिए उसी नंबर पर फोन किया। उनसे बताया कि दो माह पहले फॉगिंग के लिए बात की थी, आज तक नहीं हुई। इस पर वहां से जवाब मिला। तेल का खर्च उठाना पड़ेगा। जब पूछा कितना तेल लगेगा? कहा दो सौ लीटर । गुरप्रीत का कहना था कि 10-15 लीटर तेल हो तो उसका खर्च उठाया भी जा सकता है, लेकिन दौ सौ लीटर तेल बहुत ज्यादा है। उनका कहना था कि पिपली में करीब ढाई से तीन हजार घर है। इस लिहाज से फॉगिंग कराने के लिए ढाई सौ से तीन सौ लीटर तेल का खर्च बताया गया। इसकी कीमत 12 से 15 हजार रुपये तक आएगी। जबकि फॉगिंग का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग है और यहां लोग बीमारी से परेशान हैं। इसके बाद भी कोई सुध लेने के लिए तैयार नहीं है। खर्च पर अटके हुए हैं। शहरों में फॉगिंग फ्री में हो रही है, तो गांव के लोगों के लिए खर्च की बाध्यता क्यों?
पहले नई मशीन खरीदो
बीडीओ ऑफिस में जब दोनों सरपंच इस मसले पर बात कर रहे थे। तभी वहां किशनपुरा के सरपंच रामपाल के बेटे अजय भी पहुंचे। जब उन्हें पता चला तो उन्होंने भी उस नंबर पर फोन किया। उन्हें कहा गया फॉगिंग के लिए नई मशीन खरीदो। यह पंचायतों को ही खरीदनी है। मशीन की कीमत पूछी तो बताया 40 हजार रुपये की मशीन खरीदो तब ही फॉगिंग हो पाएगी। अजय ने पूछा जो पंचायतें सक्षम नहीं है इतना खर्च उठाने में वह क्या करें। इस पर जवाब दिया बीडीओ ऑफिस में दरख्वास्त दे दो।
पंचायतें के खाली हाथ
सरपंचों के पतियों दिनेश और गुरप्रीत ने बताया कि अभी तक सरकार से पंचायतों को एक रुपये का फंड नहीं मिला। ऐसे में फॉगिंग के लिए हजारों रुपये कहां से खर्च करें। पांच दस लीटर हो तो कुछ किया भी जा सकें। यहां तो घरों की संख्या के हिसाब से तेल मांगा जा रहा है। फॉगिंग नहीं होने से मच्छरों की भरमार हो रही है और लोग बीमार हो रहे हैं। ऐसे में यदि बीमारियों ने ज्यादा पैर पसार लिए और महामारी फैली तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
यह कहते हैं अधिकारी
शहर में फॉगिंग का जिम्मा नगर परिषद को सौंप दिया गया है। सभी मशीनें भी नप को सौंप दी है। गांवों में फॉगिंग की जिम्मेदारी पंचायतों की है। एक मशीन में पांच लीटर डीजल और एक लीटर पेट्रोल लगता है। इससे ज्यादा नहीं।
-डॉ. केके शर्मा, मलेरिया नोडल ऑफिसर
नगर परिषद सीमा क्षेत्र में फॉगिंग के लिए किसी को कुछ नहीं खर्च करना है। फॉगिंग के लिए न तो तेल मांगा जाता है और न ही कोई अन्य खर्च। जहां तक गांवों में फॉगिंग का सवाल यह तो यह स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा है।
-कर्मचंद, सेनेट्री इंस्पेक्टर नगर परिषद थानेसर