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अब एक क्लिक पर किसानों को मिलेगी मौसम संबंधी जानकारी
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चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने कहा है कि सीमित संसाधनों के बीच फसलों की अच्छी पैदावार लेना चुनौती से कम नहीं है। कृषि योग्य भूमि की कमी व मौसम में बदलाव के कारण तकनीकों को अपनाना आवश्यक हो गया है। वे सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र में खेती में जल संरक्षण विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों के लिए मौसम की जानकारी के लिए सूचना कियोस्क का भी शुभारंभ किया, जिससे एक क्लिक में किसान मौसम संबंधी जानकारी व पूर्वानुमान पता कर सकते हैं।
कुलपति ने कहा कि किसानों को मौसम संबंधी सही जानकारी नहीं मिल पाती है, इसके लिए जरूरी है कि प्रत्येक किसान को कृषि विज्ञान केंद्र के कियोस्क से जोड़ा जाये, जिससे उन्हें सही जानकारी मिल सके।
विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा सभी गांवों के किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों से जोड़ने का कार्य किया जाएगा ताकि वे मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकें व मौसम अनुरूप ही फसल बुआई व सिंचाई का कार्य कर सकें। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के वैज्ञानिक डॉ. संदीप रावल ने धान की सीधी बिजाई से खरपतवारों को खत्म करने के लिए किसानों को जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. एसके ककरालिया ने किसानों के साथ चर्चा करते हुए कहा कि यदि धान में समय पर खरपतवारनाशी डाली जाए व समय पर सिंचाई की जाए तो अच्छी पैदावार ली जा सकती है। खेतों में लौह तत्व की कमी आने पर 50 किलोग्राम जिंक सल्फेट 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ डालें। इससे पूर्व यहां पहुंचने पर कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. प्रद्युमन भटनागर व अन्य ने कुलपति का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। इस मौके पर कुलपति ने परिसर में पौधरोपण भी किया। इस मौके पर डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. मदन लाल खीचड़, डॉ. सतपाल गोयल, खुंब उत्पादक हरपाल सिंह बाजवा, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. फतेह सिंह, डॉ. ममता, डॉ. ललिता ने भी किसानों को फसलों संबंधी जानकारी दी। इस मौके पर गुरदयाल मलिक, धर्मपाल मैहरा, गुरशरण सिंह, जोगिंद्र, सुरजीत सिंह, रिंकू, कुलबीर सिंह, राजपाल, जयभगवान सहित अन्य प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
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कुलपति ने कहा कि किसानों को मौसम संबंधी सही जानकारी नहीं मिल पाती है, इसके लिए जरूरी है कि प्रत्येक किसान को कृषि विज्ञान केंद्र के कियोस्क से जोड़ा जाये, जिससे उन्हें सही जानकारी मिल सके।
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विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा सभी गांवों के किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों से जोड़ने का कार्य किया जाएगा ताकि वे मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकें व मौसम अनुरूप ही फसल बुआई व सिंचाई का कार्य कर सकें। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के वैज्ञानिक डॉ. संदीप रावल ने धान की सीधी बिजाई से खरपतवारों को खत्म करने के लिए किसानों को जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. एसके ककरालिया ने किसानों के साथ चर्चा करते हुए कहा कि यदि धान में समय पर खरपतवारनाशी डाली जाए व समय पर सिंचाई की जाए तो अच्छी पैदावार ली जा सकती है। खेतों में लौह तत्व की कमी आने पर 50 किलोग्राम जिंक सल्फेट 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ डालें। इससे पूर्व यहां पहुंचने पर कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. प्रद्युमन भटनागर व अन्य ने कुलपति का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। इस मौके पर कुलपति ने परिसर में पौधरोपण भी किया। इस मौके पर डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. मदन लाल खीचड़, डॉ. सतपाल गोयल, खुंब उत्पादक हरपाल सिंह बाजवा, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. फतेह सिंह, डॉ. ममता, डॉ. ललिता ने भी किसानों को फसलों संबंधी जानकारी दी। इस मौके पर गुरदयाल मलिक, धर्मपाल मैहरा, गुरशरण सिंह, जोगिंद्र, सुरजीत सिंह, रिंकू, कुलबीर सिंह, राजपाल, जयभगवान सहित अन्य प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
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