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Kurukshetra News: शिक्षा ही देश का आधार, नई शिक्षा नीति से विकसित भारत का सपना होगा साकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Apr 2025 01:04 AM IST
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Education is the foundation of the country, the dream of a developed India will come true with the new education policy
कुरुक्षेत्र। शिक्षा ही देश का आधार है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) से ही विकसित भारत 2047 का सपना साकार होगा। यह निष्कर्ष शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन विकसित भारत 2047 की दिशा में, विषय पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन शिक्षाविदों के मंथन में निकला। शिक्षाविदों का कहना है कि देश की आर्थिक मजबूती के लिए युवाशक्ति का शिक्षित होना बेहद जरूरी है। सम्मेलन की शुरुआत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जनक पद्म विभूषण डॉ. कृष्णा स्वामी कस्तूरीरंगन को मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) और हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल (एचएसएचईसी) की ओर से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ राज्यपाल एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलाधपति बंडारू दत्तात्रेय ने किया। कुलाधिपति ने कहा, देश और समाज के भविष्य का निर्माण करने के लिए एक अच्छे शिक्षक की जरूरत है। शिक्षक एक डिजिटल ज्ञान बैंक बनकर विद्यार्थियों को तकनीकी नवाचारों से जोड़ें और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूर्ण करने में अपना योगदान सुनिश्चित करें।
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एनएसटीई का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली के समन्वित विकास को प्राप्त करनाः मिश्रा
एनसीटीई की सदस्य सचिव अभिलाषा झा मिश्रा ने कहा, एनसीटीई का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण देश में अध्यापक शिक्षा प्रणाली के योजनागत और समन्वित विकास को प्राप्त करना और इससे संबंधित मामलों एवं अध्यापक शिक्षा प्रणाली में मानकों और मापदंडों का विनियमन और उचित अनुरक्षण करना है। उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ऐसे सम्मेलन कारगर साबित होंगे। समस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. सीके सलूजा ने कहा कि शिक्षकों को अपने प्रोफेशन के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। इसके साथ ही शिक्षकों में सीखने की प्रवृति होनी चाहिए।
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उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षकों की निहायत जरूरत : प्रो. पंकज

एनसीटीई के चेयरपर्सन प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक की निहायत जरूरत है। सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन विकसित भारत 2047 की दिशा रखा गया है ताकि शिक्षाविद् और विद्वतजन मिलकर शिक्षा और देश की भावी पीढ़ी को शिक्षित और संस्कारित करने वाले एक अच्छे शिक्षक के निर्माण करने पर चर्चा करे। उनके विचारों और फीडबैक पर एनसीटीई समीक्षा कर अहम कदम उठाए। एनईपी-2020 को पूरे भारत में पूर्णतया जल्द लागू किया जा रहा है। इसके लिए सात हजार फीड बैक लिए गए हैं। इन सुझावों के आधार पर शिक्षा नीति में परिवर्तन किए जाएंगे।

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शिक्षक में मानवीय मूल्यों का विकास बेहद जरूरी : प्रो. कैलाश चंद्र

हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि जिस दिन भारत का प्रशासनिक अधिकारी शिक्षक पेशे की ओर आने लगेगा उस दिन समझिए देश की शिक्षा उचित दिशा में जा रही है। एक शिक्षक का समाज के प्रति दायित्व, करुणा, विनम्रता बिना व्यक्तित्व निर्माण के नहीं हो सकता। इसलिए मानवीय मूल्यों का विकास होना बहुत जरूरी है, तभी वह विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा देकर एनईपी के लक्ष्य को पूरा कर विकसित भारत में योगदान दे पाएंगे। एनईपी-2020 का उद्देश्य आत्मनिर्भर, तर्कसंगत ढंग से सोचने वाले, क्रिया करने वाले, करुणा एवं मानवता के साथ साहसी, रचनात्मकता एवं कल्पनाशीलता की जड़ों से युक्त युवा तैयार करना है।

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विजन 2047 को प्राप्त करने में मूल है शिक्षा : प्रो. सचदेवा

कुवि के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा, विजन 2047 को प्राप्त करने में साइंस, तकनीक, एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री, सर्विस सेक्टर के मूल में शिक्षा है। वर्तमान में आदमी बेरोजगारी से जूझ रहा है और स्किल की कमी होने के कारण काम के लिए आदमी नहीं मिल रहे। काम के लिए रखे हुए आदमी किसी काम के नहीं। संस्कारों की कमी, एनईपी में इन तीनों समस्याओं को समाधान दिया गया है। उन्होंने बताया कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फंडिंग के तहत कुवि को 1000 हजार करोड़ के रुपए फंड केंद्र सरकार द्वारा रिलीज किया गया है, जिनमें सात हब इंस्टीट्यूशन में हरियाणा का एकमात्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय भी शामिल है। इसे हाल ही में एनआरएफ की 10 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली है। शोध के क्षेत्र में इको सिस्टम को विकसित करते हुए 63 पेटेंट फाइल किए है गए हैं और ऑनलाइन शिक्षा के तहत भी कोर्स दिए जा रहे हैं।




मूक-बधिरों के लिए विशेष इंतजाम
सम्मेलन में आए मूक बधिरों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। उन्हें वक्ताओं के व्याख्यान सांकेतिक भाषा के माध्यम से पेश किए गए। इस मौके पर कुलपति प्रो. सुदेश छिकारा, कुलपति प्रो. एसके तोमर, कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी, एनआरसी के चेयरपर्सन एचसीएस राठौर, कुलसचिव प्रो. वीरेंद पॉल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।


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आज विभिन्न राज्यों के शिक्षाविद् और शिक्षा मंत्री ढांडा भी होंगे शामिल
दो दिवसीय सम्मेलन में मंगलवार को राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। सम्मेलन में चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के विश्वविद्यालयों एवं संस्थान के कुलपति एवं निदेशक सहित अन्य शिक्षाविद् व विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे
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