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डेंगू मरीजों की पुष्टि न करने पर स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक ने लिया संज्ञान
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नरेंद्र शर्मा
कुरुक्षेत्र। कोरोना के साथ-साथ जिले में डेंगू की दस्तक के बाद आए तीन मरीजों की जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुष्टि न करने पर स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. सूरजभान कंबोज ने संज्ञान लिया है। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा है कि कुरुक्षेत्र में डेंगू संक्रमित मरीजों की वास्तविकता छुपाने का मामला उनके संज्ञान नहीं था, लेकिन वे अब इस संदर्भ में जिला स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट हासिल करेंगे। उन्होंने बताया कि डेंगू जांच के लिए रैपिड टेस्ट मान्य नहीं है। इसीलिए हर जिले में जिला स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विभाग में एलाइजा टेस्ट किया जा रहा है, ताकि डेंगू की जांच हो सके और मरीज को तत्काल उपचार दिया जा सके।
बता दें कि पंजाब निवासी एक युवती सहित तीन डेंगू से पीड़ित मरीज सामने आ चुके हैं और विशेषज्ञ भी चेतावनी दे चुके हैं कि कोरोना के साथ डेंगू की जुगलबंदी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। कोरोना के अलावा डेंगू के लक्षण की जांच करना बेहद जरूरी है। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक भी इस संबंध में जिला स्वास्थ्य विभाग को सैंपलिंग करने के आदेश दे चुके हैं। बावजूद इसके डेंगू संक्रमित मरीजों का आंकड़ा छुपाया जा रहा है। तीन अक्तूबर को फोन पर हुई बातचीत में जिला मलेरिया एवं डेंगू नोडल ऑफिसर डॉ. सुदेश कुमार सहोता ने कहा था कि अभी तक जिले में कोई भी डेंगू पीड़ित मरीज सामने नहीं आए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि थर्ड गेट के सामने पीजी में रह रही पंजाब निवासी एक युवती, गुरुनानक कॉलोनी और झांसा रोड निवासी एक युवती डेंगू की चपेट में आ चुका है, जो एलएनजेपी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
प्रतिबंध के बावजूद निजी लैब पर हो रहे रैपिड टेस्ट
उधर, प्रतिबंध के बावजूद भी निजी लैब पर डेंगू की जांच के लिए रैपिड टेस्ट किये जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को शिकायत का इंतजार है। जिला नोडल ऑफिसर डॉ. सुदेश कुमार को मालूम है कि निजी अस्पताल में रैपिड टेस्ट किये जा रहे हैं, लेकिन वे बिना किसी शिकायत के कार्रवाई नहीं कर सकते। जब स्वास्थ्य विभाग को शिकायत मिलेगी, तभी लैब संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कुरुक्षेत्र। कोरोना के साथ-साथ जिले में डेंगू की दस्तक के बाद आए तीन मरीजों की जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुष्टि न करने पर स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. सूरजभान कंबोज ने संज्ञान लिया है। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा है कि कुरुक्षेत्र में डेंगू संक्रमित मरीजों की वास्तविकता छुपाने का मामला उनके संज्ञान नहीं था, लेकिन वे अब इस संदर्भ में जिला स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट हासिल करेंगे। उन्होंने बताया कि डेंगू जांच के लिए रैपिड टेस्ट मान्य नहीं है। इसीलिए हर जिले में जिला स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विभाग में एलाइजा टेस्ट किया जा रहा है, ताकि डेंगू की जांच हो सके और मरीज को तत्काल उपचार दिया जा सके।
बता दें कि पंजाब निवासी एक युवती सहित तीन डेंगू से पीड़ित मरीज सामने आ चुके हैं और विशेषज्ञ भी चेतावनी दे चुके हैं कि कोरोना के साथ डेंगू की जुगलबंदी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। कोरोना के अलावा डेंगू के लक्षण की जांच करना बेहद जरूरी है। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक भी इस संबंध में जिला स्वास्थ्य विभाग को सैंपलिंग करने के आदेश दे चुके हैं। बावजूद इसके डेंगू संक्रमित मरीजों का आंकड़ा छुपाया जा रहा है। तीन अक्तूबर को फोन पर हुई बातचीत में जिला मलेरिया एवं डेंगू नोडल ऑफिसर डॉ. सुदेश कुमार सहोता ने कहा था कि अभी तक जिले में कोई भी डेंगू पीड़ित मरीज सामने नहीं आए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि थर्ड गेट के सामने पीजी में रह रही पंजाब निवासी एक युवती, गुरुनानक कॉलोनी और झांसा रोड निवासी एक युवती डेंगू की चपेट में आ चुका है, जो एलएनजेपी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
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प्रतिबंध के बावजूद निजी लैब पर हो रहे रैपिड टेस्ट
उधर, प्रतिबंध के बावजूद भी निजी लैब पर डेंगू की जांच के लिए रैपिड टेस्ट किये जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को शिकायत का इंतजार है। जिला नोडल ऑफिसर डॉ. सुदेश कुमार को मालूम है कि निजी अस्पताल में रैपिड टेस्ट किये जा रहे हैं, लेकिन वे बिना किसी शिकायत के कार्रवाई नहीं कर सकते। जब स्वास्थ्य विभाग को शिकायत मिलेगी, तभी लैब संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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