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अमावस पर श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त किया पिंडदान
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भाद्रपद की कुशोत्पाटिनी अमावस्या पर दूर दराज से श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान करके अपने पितरों के निमित्त पूजा अर्चना की। सरस्वती तीर्थ पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पिंडदान कर प्रेत पीपल पर जल अर्पित किया। वहीं, कार्तिकेय मंदिर में श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर दर्शन किए तथा कार्तिकेय जी को तेल अर्पित किया।
हालांकि इंटरनेट सेवा बंद रहने से तीर्थ पुरोहितों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। मंगलवार की पूर्व संध्या पर ही श्रद्धालु तीर्थ पर जमा होने शुरू हो गए थे। सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान किया। इसके उपरांत उन्होंने तीर्थ पर अपने पितरों के निमित्त पिंडदान, गति कर्म और तर्पण किया। पिंडदान के बाद श्रद्धालुओं ने तीर्थ पुरोहितों से अपने वंशावली के रिकार्ड भी देखा।
हालांकि करनाल में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए इंटरनेट सेवा बंद रहने से तीर्थ पुरोहितों को काफी दौड़-धूप करनी पड़ी। सरस्वती तीर्थ पर श्रद्धालुओं के पहुंचते ही तीर्थ पुरोहित उनसे उनके गोत्र, इलाके का नाम पूछकर व्हाट्सएप भेजते हैं। यहां पुरोहितों के व्हाट्सएप पर अलग-अलग ग्रुप बने हुए हैं, जिस पर श्रद्धालुओं को जानकारी पहुंच जाती है। इसके बाद पुरोहित अपने इनडेस्क में श्रद्धालुओं के पूर्वजों के नाम और गोत्र की जानकारी का मिलान करके बही में उनकी वंशावली का रिकॉर्ड मिलने पर व्हाट्सएप पर भेज देते हैं। मंगलवार को इंटरनेट सेवा बंद होने से पुरोहितों को बहुत परेशानी हुई। वहीं, कई श्रद्धालु पुरोहितों संपर्क न होने पर बगैर वंशावली देखे ही लौट गए।
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सुबह रही जाम की स्थिति
श्रद्धालुओं के आवागमन के कारण शहर में जाम की स्थिति बनी रही। सुबह के समय शहर में श्रद्धालुओं को आवागमन लगा रहा। इस कारण शहर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर के बाद जब श्रद्धालुओं की भीड़ कम हुई तब जाकर शहर के लोगों ने राहत की सांस ली।
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हालांकि इंटरनेट सेवा बंद रहने से तीर्थ पुरोहितों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। मंगलवार की पूर्व संध्या पर ही श्रद्धालु तीर्थ पर जमा होने शुरू हो गए थे। सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान किया। इसके उपरांत उन्होंने तीर्थ पर अपने पितरों के निमित्त पिंडदान, गति कर्म और तर्पण किया। पिंडदान के बाद श्रद्धालुओं ने तीर्थ पुरोहितों से अपने वंशावली के रिकार्ड भी देखा।
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हालांकि करनाल में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए इंटरनेट सेवा बंद रहने से तीर्थ पुरोहितों को काफी दौड़-धूप करनी पड़ी। सरस्वती तीर्थ पर श्रद्धालुओं के पहुंचते ही तीर्थ पुरोहित उनसे उनके गोत्र, इलाके का नाम पूछकर व्हाट्सएप भेजते हैं। यहां पुरोहितों के व्हाट्सएप पर अलग-अलग ग्रुप बने हुए हैं, जिस पर श्रद्धालुओं को जानकारी पहुंच जाती है। इसके बाद पुरोहित अपने इनडेस्क में श्रद्धालुओं के पूर्वजों के नाम और गोत्र की जानकारी का मिलान करके बही में उनकी वंशावली का रिकॉर्ड मिलने पर व्हाट्सएप पर भेज देते हैं। मंगलवार को इंटरनेट सेवा बंद होने से पुरोहितों को बहुत परेशानी हुई। वहीं, कई श्रद्धालु पुरोहितों संपर्क न होने पर बगैर वंशावली देखे ही लौट गए।
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सुबह रही जाम की स्थिति
श्रद्धालुओं के आवागमन के कारण शहर में जाम की स्थिति बनी रही। सुबह के समय शहर में श्रद्धालुओं को आवागमन लगा रहा। इस कारण शहर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर के बाद जब श्रद्धालुओं की भीड़ कम हुई तब जाकर शहर के लोगों ने राहत की सांस ली।