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जिला जेल में बंदियों को किया जा रहा टार्चर, दो बंदियों ने लगाए आरोप

Wed, 17 Jan 2018 12:25 AM IST
Updated Wed, 17 Jan 2018 12:25 AM IST
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जिला जेल में बंदियों को किया जा रहा टार्चर, दो बंदियों ने लगाए आरोप
बंदियों ने लगाए आरोप, कहा जेल में किया जा रहा टॉर्चर
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
जिला जेल के बंदियों को जेल कर्मियों द्वारा बुरी तरह से टार्चर किया जाता है, जिसके चलते वे आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर होते है। गांव दबखेड़ी वासी संजू ने भी कुछ दिनों पहले इन्हीं हालात के चलते आत्महत्या की थी। यह सभी आरोप जेल में विभिन्न मामलों में बंद दो बंदियों ने लगाए है। हालांकि, इस मामले को लेकर पुलिस में कोई शिकायत तक नहीं दी गई है, लेकिन मंगलवार को दोनों बंदियों के मामले को लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शालिनी सिंह नागपाल की अदालत में बयान हुए।
बंदियों के टार्चर करने के आरोपों के चलते उनके परिजानें में भी गुस्सा दिखाई दिया। उन्होंने अदालत परिसर में मीडिया के समक्ष गहरा रोष भी व्यक्त किया। जेल प्रशासन में भी हलचल दिखाई दी। अदालत में दोनों बंदियों को पेश करने के उपरांत उन्हें पुलिस भी चुपके से जेल ले गई। बंदी सुरेंद्र सिंह के भाई कुलदीप सिंह और बंदी शमशेर सिंह के भाई राममेहर ने भी आरोप लगाए है कि उन्हें जब जेल के अंदर दी जाने वाली यातनाओं का पता चला तो वे भी सहम गए। उन्हें बताया गया कि जेल में तैनात कर्मी बंदियों से पैसे की मांग पूरी करने के लिए यातनाएं देते हैं। जो इन यातनाओं को सहन नहीं कर पाता वह आत्महत्या कर लेता है। उन्हें सुरेंद्र ने बताया है कि गांव दबखेड़ी वासी संजू यादव ने भी इन्हीं यातनाओं के चलते पिछले दिनों जेल के बाथरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने जब इसका विरोध किया तो उन्हें भी बुरी तरह से यातनाएं दी जाने लगीं। यहां तक कि उनकी कमर को गर्म कोयले से भी दागा गया। वे संजू यादव के मामले के दौरान जेल में पहुंचे मजिस्ट्रेट के समक्ष भी यह खुलासा करना चाहते थे, लेकिन कुछ बता नहीं पाए। अब अदालत में उनके इस संबंध में बयान हुए हैं। सुरेंद्र के भाई कुलदीप ने बताया कि उनके पास जेल से सुरेंद्र द्वारा एसटीडी से उनके मोबाइल पर किए गए फोन की रिकॉर्डिंग भी है। इसमें वह जेल कर्मियों के टार्चर से बचने के लिए अपना मेडिकल आदि कराने को कह रहा है।
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दोनों बंदी शातिर, दबाव बनाने के लिए लगा रहे जेल कर्मियों पर आरोप : डॉ संजय
जिला जेल अधीक्षक डॉ संजय का कहना है कि जेल में इस तरह से किसी भी बंदी व कैदी को टार्चर नहीं किया जाता। ये दोनों ही बंदी शातिर है और जेल प्रशासन पर दबाव बानेने के लिए मनगढ़ंत आरोप लगा रहे है, जिनमें कोई भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने मेडिकल करवाने व उसे अदालत में दिखाने के लिए अपनी कमर में कुछ खुद ही चोट पहुंचाई होगी। ये दोनों दूसरी जेलों से उनके पास पहुंचे है। सुरेंद्र से कुछ ही दिनों पहले जेल में मोबाइल बरामद हुआ था, जिसका भी उन पर मामला दर्ज हो चुका है। उनका इससे भी बचने का प्रयास है।
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