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प्राचीन शिव मंदिर का प्रबंध सभा को सौंपे केडीबी
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श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा ने मंगलवार को प्राचीन वर्धराज मंदिर में बैठक कर ब्रह्मसरोवर तट स्थित जिस प्राचीन शिव मंदिर को उपेक्षित छोड़ा हुआ है, उसकी व्यवस्था सभा को सौंपने मांग की।
बता दें कि पिछले दिनों इस मंदिर की एक दीवार तोड़ कर रास्ता बना लिया गया और भीतर दुकान खोल दी गई। शिव दरबार के भीतर के यह हालात अमर उजाला में उजागर करने के बाद सोमवार को केडीबी ने कब्जा हटाने के साथ मंदिर की व्यवस्था का दावा किया था।
इधर, मंगलवार को श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के पदाधिकारियों की एक बैठक नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं सभा के मुख्य सलाहकार जयनारायण शर्मा एडवोकेट की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में सभा के अध्यक्ष पवन शर्मा शास्त्री, सभा के प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा, सभा के पूर्व अध्यक्ष यशेंद्र शर्मा और कोषाध्यक्ष विजय शर्मा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि केयू थाने के मेन गेट के निकट ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित प्राचीन दरगाही शाह शिव मंदिर की देखरेख और व्यवस्था का जिम्मा श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा को सौंपा जाए। इस मांग से संबंधित एक ज्ञापन कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन एवं हरियाणा के राज्यपाल और उपाध्यक्ष हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम सौंपे जाएंगे।
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बैठक के बाद शर्मा ने बताया कि सन्निहित सरोवर, ब्रह्मसरोवर सहित कुरुक्षेत्र के कई महत्वपूर्ण तीर्थों और प्राचीन मंदिरों की देखरेख और व्यवस्था कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के गठन से पहले ही नहीं, बल्कि सदियों से सभा कर रही है। उन्होंने बताया कि विकास बोर्ड बनने के बाद नंदा जी ने जहां तीर्थों का जीर्णोद्धार और संरक्षण केडीबी को सौंपा था, वहीं यह भी तय किया था कि मंदिरों की व्यवस्था और प्रबंधन ब्राह्मण सभा के पास ही रहेगा।
ताकि दशकों से हो रही है लापरवाही अब न हो
सभा के प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा के अनुसार श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के लिये केडीबी को बगैर देरी किये मंदिर की व्यवस्था पर गौर करना चाहिये, ताकि यहां विधिवत पूजा अर्चना शुरू हो सके। सभा के कार्यकारिणी सदस्य यशेंद्र शर्मा ने मांग की कि रोजाना पूजा पाठ जरूरी है और इसके लिए इस प्राचीन मंदिर की व्यवस्था का जिम्मा योग्य संस्था को सौंपना होगा। उन्होंने कहा कि इस प्राचीन मंदिर को लेकर अब तक जो लापरवाही बरती गई है, उसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिये।
तब केडीबी से हुआ था टकराव : शास्त्री
सभा के अध्यक्ष पवन शर्मा शास्त्री के मुताबिक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा ब्रह्मसरोवर के दूसरे छोर का जीर्णोद्धार करते समय प्राचीन मंदिर की दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके बाद स्थानीय लोगों के साथ श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा और केडीबी के साथ टकराव के हालात पैदा हुए थे। उन्होंने बताया कि उस समय कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा थी और नंदाजी के प्रयासों से इस विवाद को खत्म करने के लिये 28 जुलाई 1980 को आधारशिला रखकर मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया था। यह दुर्भाग्य ही है कि 31 साल बाद भी मंदिर का जीर्णोद्धार तो दूर अब तक मंदिर की पूर्ण व्यवस्था तक का प्रबंध नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि भाजपा के दिग्गज नेता एवं तत्कालीन उपमुख्यमंत्री डॉ. मंगलसेन और नंदाजी के प्रयासों से जिस मंदिर के जीर्णोद्धार की मुहिम शुरू हुई थी, उसका अधर में लटका और लापरवाही के कारण उस पवित्र प्राचीन जगह पर कब्जा होना, दुर्भाग्यपूर्ण है।
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बता दें कि पिछले दिनों इस मंदिर की एक दीवार तोड़ कर रास्ता बना लिया गया और भीतर दुकान खोल दी गई। शिव दरबार के भीतर के यह हालात अमर उजाला में उजागर करने के बाद सोमवार को केडीबी ने कब्जा हटाने के साथ मंदिर की व्यवस्था का दावा किया था।
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इधर, मंगलवार को श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के पदाधिकारियों की एक बैठक नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं सभा के मुख्य सलाहकार जयनारायण शर्मा एडवोकेट की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में सभा के अध्यक्ष पवन शर्मा शास्त्री, सभा के प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा, सभा के पूर्व अध्यक्ष यशेंद्र शर्मा और कोषाध्यक्ष विजय शर्मा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि केयू थाने के मेन गेट के निकट ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित प्राचीन दरगाही शाह शिव मंदिर की देखरेख और व्यवस्था का जिम्मा श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा को सौंपा जाए। इस मांग से संबंधित एक ज्ञापन कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन एवं हरियाणा के राज्यपाल और उपाध्यक्ष हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम सौंपे जाएंगे।
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बैठक के बाद शर्मा ने बताया कि सन्निहित सरोवर, ब्रह्मसरोवर सहित कुरुक्षेत्र के कई महत्वपूर्ण तीर्थों और प्राचीन मंदिरों की देखरेख और व्यवस्था कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के गठन से पहले ही नहीं, बल्कि सदियों से सभा कर रही है। उन्होंने बताया कि विकास बोर्ड बनने के बाद नंदा जी ने जहां तीर्थों का जीर्णोद्धार और संरक्षण केडीबी को सौंपा था, वहीं यह भी तय किया था कि मंदिरों की व्यवस्था और प्रबंधन ब्राह्मण सभा के पास ही रहेगा।
ताकि दशकों से हो रही है लापरवाही अब न हो
सभा के प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा के अनुसार श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के लिये केडीबी को बगैर देरी किये मंदिर की व्यवस्था पर गौर करना चाहिये, ताकि यहां विधिवत पूजा अर्चना शुरू हो सके। सभा के कार्यकारिणी सदस्य यशेंद्र शर्मा ने मांग की कि रोजाना पूजा पाठ जरूरी है और इसके लिए इस प्राचीन मंदिर की व्यवस्था का जिम्मा योग्य संस्था को सौंपना होगा। उन्होंने कहा कि इस प्राचीन मंदिर को लेकर अब तक जो लापरवाही बरती गई है, उसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिये।
तब केडीबी से हुआ था टकराव : शास्त्री
सभा के अध्यक्ष पवन शर्मा शास्त्री के मुताबिक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा ब्रह्मसरोवर के दूसरे छोर का जीर्णोद्धार करते समय प्राचीन मंदिर की दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके बाद स्थानीय लोगों के साथ श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा और केडीबी के साथ टकराव के हालात पैदा हुए थे। उन्होंने बताया कि उस समय कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा थी और नंदाजी के प्रयासों से इस विवाद को खत्म करने के लिये 28 जुलाई 1980 को आधारशिला रखकर मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया था। यह दुर्भाग्य ही है कि 31 साल बाद भी मंदिर का जीर्णोद्धार तो दूर अब तक मंदिर की पूर्ण व्यवस्था तक का प्रबंध नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि भाजपा के दिग्गज नेता एवं तत्कालीन उपमुख्यमंत्री डॉ. मंगलसेन और नंदाजी के प्रयासों से जिस मंदिर के जीर्णोद्धार की मुहिम शुरू हुई थी, उसका अधर में लटका और लापरवाही के कारण उस पवित्र प्राचीन जगह पर कब्जा होना, दुर्भाग्यपूर्ण है।