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बॉटनी में स्नात्तकोत्तर के बाद करियर में हैं असीमित संभावनाएं : डॉ. सूद
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग में दो वर्षीय एमएससी बॉटनी (60 सीटें) तथा एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फ्लोरिकल्चर (20 सीटें) के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विज्ञान की चरम सीमा तक उन्नति होने पर भी प्रकृति का पलड़ा सदैव भारी रहता है। प्रकृति के संरक्षण में प्राणी तथा अन्य जीव इस धरा पर परस्पर मेल से रहते हैं।
वनस्पति विज्ञान का विषय इसी सृष्टि से न केवल रुचिकर है, बल्कि महत्वपूर्ण भी है। इस विषय में दाखिला प्राप्त कर प्रकृति के जिज्ञासु विद्यार्थी परिकल्पना तथा प्रयोगात्मक रूप से शिक्षा प्राप्त करते हैं। विभाग की प्रयोगशालाओं एवं केंद्रित उपकरण लैब में विद्यार्थी अनेक विषयों जैसे टैक्सोनामी, प्लांट टिशू कल्चर, फिजियोलॉजी, जैनेटिक्स, इकोलॉजी, जलवायु विज्ञान आदि में उत्तम शिक्षा प्राप्त करते हैं। इसके साथ-साथ विद्यार्थियों को समय-समय पर क्षेत्रीय दर्शन के लिए विभिन्न स्थानों एवं विषय ज्ञान दिया जाता है। इस विभाग में उपयुक्त विशेषताओं के साथ-साथ ग्रीन हाउस, ग्लास हाउस आदि सुविधाएं भी उपलब्ध हैं जो विषय विज्ञान को बढ़ाने में सहयोगी हैं।
विभागाध्यक्षा डॉ. नीलू सूद ने बताया कि विभाग के निजी पुस्तकालय में 2000 से अधिक उत्कृष्ट पुस्तकें विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध रहती है। विभाग में स्वयं का हर्बल तथा बॉटेनिकल गार्डन विकसित किया गया है। इसका उपयोग शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए किया जाता है। इसमें कई औषधीय गुणों वाले तथा दुर्लभ प्रजाति के पौधों को संरक्षित करके रखा गया है। जैसे-जैसे विश्व में हर्बल पदार्थो की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस विषय में शिक्षा प्राप्त करने का चलन बढ़ रहा है। विभाग में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी भी पिछले सत्रों में दाखिला ले चुके हैं।
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डॉ. नीलू सूद ने बताया कि विभाग के 85 से 90 प्रतिशत विद्यार्थी रोजगार पा लेते हैं। उनके पास उत्कृष्ट संस्थानों जैसे वनस्पतिक सर्वेक्षण, आयुष, नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट, सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिसनल एंड ऐरोमैटिक प्लांट्स इत्यादि सरकारी संस्थानों में भी अपार संभावनाएं हैं।
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वनस्पति विज्ञान का विषय इसी सृष्टि से न केवल रुचिकर है, बल्कि महत्वपूर्ण भी है। इस विषय में दाखिला प्राप्त कर प्रकृति के जिज्ञासु विद्यार्थी परिकल्पना तथा प्रयोगात्मक रूप से शिक्षा प्राप्त करते हैं। विभाग की प्रयोगशालाओं एवं केंद्रित उपकरण लैब में विद्यार्थी अनेक विषयों जैसे टैक्सोनामी, प्लांट टिशू कल्चर, फिजियोलॉजी, जैनेटिक्स, इकोलॉजी, जलवायु विज्ञान आदि में उत्तम शिक्षा प्राप्त करते हैं। इसके साथ-साथ विद्यार्थियों को समय-समय पर क्षेत्रीय दर्शन के लिए विभिन्न स्थानों एवं विषय ज्ञान दिया जाता है। इस विभाग में उपयुक्त विशेषताओं के साथ-साथ ग्रीन हाउस, ग्लास हाउस आदि सुविधाएं भी उपलब्ध हैं जो विषय विज्ञान को बढ़ाने में सहयोगी हैं।
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विभागाध्यक्षा डॉ. नीलू सूद ने बताया कि विभाग के निजी पुस्तकालय में 2000 से अधिक उत्कृष्ट पुस्तकें विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध रहती है। विभाग में स्वयं का हर्बल तथा बॉटेनिकल गार्डन विकसित किया गया है। इसका उपयोग शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए किया जाता है। इसमें कई औषधीय गुणों वाले तथा दुर्लभ प्रजाति के पौधों को संरक्षित करके रखा गया है। जैसे-जैसे विश्व में हर्बल पदार्थो की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस विषय में शिक्षा प्राप्त करने का चलन बढ़ रहा है। विभाग में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी भी पिछले सत्रों में दाखिला ले चुके हैं।
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डॉ. नीलू सूद ने बताया कि विभाग के 85 से 90 प्रतिशत विद्यार्थी रोजगार पा लेते हैं। उनके पास उत्कृष्ट संस्थानों जैसे वनस्पतिक सर्वेक्षण, आयुष, नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट, सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिसनल एंड ऐरोमैटिक प्लांट्स इत्यादि सरकारी संस्थानों में भी अपार संभावनाएं हैं।