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किसान, मजदूर, कर्मचारी, कारोबारी और बेरोजगारी के मुद्दों पर सरकार जवाबदेह : हुड्डा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 11:54 PM IST
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Bhupendra singh reach pipli kurukshetra
विधानसभा सत्र के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार किसान, मजदूर, कर्मचारी, कारोबारी और बेरोजगारी के मुद्दों से भाग नहीं सकती। उसे विपक्ष और जनता के सवालों का जवाब देना ही होगा। वे गुरुवार को पिपली पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस मौके पर उनके साथ पूरे मंत्री अशोक अरोड़ा, लाडवा विधायक मेवा सिंह, पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा, पूर्व वित्त मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन जलेश शर्मा, राजीव गोयल और टीकाराम मौजूद रहे।
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इस मौके पर हुड्डा ने कहा कि जिस तरह से 6 साल में एक के बाद एक घोटाले हुए और कोरोना काल में भी मिलीभगत करके करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किए गए, उन सभी की उच्च स्तरीय जांच जरूरी है। अगर सरकार सदन में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करेगी तो वह इस लड़ाई को सड़कों पर लड़ेंगे। हुड्डा ने कहा कि इस बार का विधानसभा सत्र औपचारिकता मात्र साबित हुआ क्योंकि सरकार ने दलील दी कि मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और स्पीकर समेत 8-9 सदस्य और विधानसभा का स्टाफ़ संक्रमित हैं, इसलिए सत्र एक दिन का ही हो सकता है। कांग्रेस ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में मांग रखी थी कि अगर सरकार औपचारिकता पूरी करना चाहती है तो सिर्फ बहुत जरूरी विधायी कार्यों को ही निपटाया जाए। बाकी बिलों, विपक्ष के ध्यानाकर्षण प्रस्तावों, स्थगन प्रस्तावों और प्राइवेट मेंबर बिल पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी में चर्चा की जाए। कांग्रेस ने सदन में तीन नए कृषि अध्यादेशों, घोटालों, पीटीआई की बर्खास्तदी, कर्मचारियों की छंटनी, बेरोजगारी और अपराध पर चर्चा करने के लिए ध्यानाकर्षण और स्थगन प्रस्ताव दिए थे, लेकिन सरकार ने फिलहाल सभी पर चर्चा से इंकार कर दिया।
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनकल्याण की नीतियां बनाने की बजाय इस सरकार का सारा ध्यान घोटाले और कर्मचारियों की छंटनी करने पर है। इसीलिए बार-बार अपील करने के बावजूद सरकार ने बर्खास्त 1983 पीटीआई का दर्द नहीं समझा और भर्ती के लिए परीक्षा करवाई। लेकिन बाकी परीक्षाओं की तरह इस सरकार की पीटीआई परीक्षा का पेपर भी लीक हुआ।
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पीटीआई ही नहीं, इस सरकार ने तो ख़ुद के भर्ती किए खेल कोटे के 1518 ग्रुप-डी कर्मचारियों को भी नौकरी से हटाने की तैयारी कर रखी है। इसके अलावा अलग-अलग महकमों में रोज कर्मचारियों की छटनी की जा रही है। ऊपर से क्लर्क भर्ती का फाइनल रिजल्ट घोषित नहीं किया जा रहा।
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