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Kurukshetra News: कोलाकाता के 10 क्विंटल जाफरी फूलों से होगा भोले का शृंगार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Feb 2025 01:03 AM IST
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Bhole will be decorated with 10 quintals of Jaffrey flowers from Kolkata.
कुरुक्षेत्र। महाशिवरात्रि पर्व के चलते धर्मनगरी में चारों ओर बम भोले की गूंज है। पूरा माहौल शिवमय दिखाई देने लगा है। सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से पर्व के लिए व्यापक तैयारी की जा रही है तो शिवभक्तों में उत्साह है। शिवालयों को सजाया जा रहा है तो कहीं शिव भोले की झांकियां तैयार हो रही हैं।
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ऐसे में इस पर्व को लेकर धर्मनगरी के अति प्राचीन स्थाणेश्वर महादेव मंदिर में भी खास तैयारी की जा रही है, जहां मंदिर के साथ-साथ शिवलिंग का भव्य शृंगार शुरू कर दिया है। कोलकाता से 10 क्विंटल जाफरी फूल मंगाए हैं। रंगाई-पुताई से लेकर हर तरह से मंदिर के साथ-साथ नंदी की सजाया जा रहा है। पिछले करीब 20 दिन से तैयारी की जा रही है।
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स्थाणु शिव के लिंग की हुई थी स्थापना


स्थाणेश्वर महादेव मंदिर धर्मनगरी के अति प्राचीन मंदिरों में है। बताया जाता है कि स्वयं प्रजापति ब्रह्मा की ओर से यहां स्थाणु शिव के लिंग की स्थापना की थी। माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर से पहले यहां पर सरस्वती नदी बहती थी। ये भी कहा जाता है कि पानीपत के तीसरे युद्ध से पहले मराठा राजाओं की स्त्रियों ने स्थाणेश्वर के कई मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया था, जिनमें यह मंदिर भी प्रमुख है।
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यह है मंदिर की मान्यता और इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार मान्यता है कि राजा हर्षवर्धन को एक बार कुष्ठ रोग हो गया था, जिसके कारण उसके सगे-संबधी उससे दूरी बनाने लगे थे। वह बहुत परेशान हुआ जो घूमते-घूमते धर्मनगरी में आ पहुंचा। सरस्वती नदी में पानी पीते समय उसका पैर फिसल गया और उसको कुछ मिट्टी उसके शरीर पर लग गई। घर पहुंचने पर उसके परिजन उससे मिलने आए और बोले कि तुम्हारा शरीर ठीक कैसे हो गया, तो राजा हर्षवर्धन अपने परिजनों को सरस्वती नदी के पास लेकर गया। तभी उनके परिजनों ने उसके शरीर पर नदी की मिट्टी का लेप लगाकर पास में एक वट वृक्ष की छाया में आराम करवाया तो कुछ ही दिनों बाद उनका कुष्ठ रोग ठीक हो गया था। तभी छठी शताब्दी से ही राजा हर्षवर्धन ने स्थाणेश्वर को अपनी राजधानी बनाया और उसी के नाम पर इस शिव मंदिर का नाम स्थाणेश्वर रखा। उनके जाने के बाद उनके पुत्र अनगंपाल ने इस अधूरे निर्माण को पूरा कराया था।


यहीं प्रकट हुए थे भगवान शिव
स्थाणेश्वर मंदिर के सामने बने तालाब में शिव भगवान की बनी मूर्ति की मान्यता है कि शिव भगवान सबसे पहले यही पर प्रकट हुए थे तभी से इस तालाब में मूर्ति को बनाया गया है ये भी मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां आकर स्नान करता है उसके त्वचा से संबंधित रोग ठीक हो जाते हैं। यहां पर वट वृक्ष की वामन पुराण के अनुसार कई मान्यताएं हैं। ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि के रचना काल में इस स्थाणु वट से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र इन चाराें वर्णों की उत्पत्ति हुई। 43वें अध्याय के 38वे श्लोक के अनुसार स्थाणु लिंग के दर्शन और वट वृक्ष के स्पर्श से मुक्ति मिलती है।
महानिर्वाणी श्री पंचायती अखाड़ा के व्यस्थापक महंत लक्ष्मीनारायण पूरी ने बताया कि महा शिवरात्रि को लेकर स्थाणु मंदिर को फूल मालाओं और लड़ियों से सजाया जा रहा है। शिवलिंग और मंदिर की सजावट के लिए कोलकाता से फूल मंगाए हैं।



आज निकाली जाएगी भव्य शोभा यात्रा



शिवरात्रि से दो दिन पहले भगवान भोले की शोभायात्रा मुख्य मार्गाेंं जनता स्कूल के मार्ग से होते हुए रोटरी चौक से पालिका बाजार, आम्बेडकर चौक, सेक्टर-17, कच्चा घेर से होते के लिए गोशाला बाजार से वापिस शोभा यात्रा निकाली जाएगी। शिवभक्त सुनील सचदेवा ने बताया कि 25 फरवरी को यहां स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन श्रीस्थाणु सेवा मंडल की ओर से होगा। इसमें मुख्य अतिथि थानेसर के विधायक अशोक अरोड़ा ज्योति प्रज्वलित करेंगे।
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