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...और सुलझ गई कत्ल की गुत्थी
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नाटक तीन बंदर का मंचन करते मसखरे रंगमंच अंबाला के कलाकार। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की ओर से आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान कला कीर्ति भवन में प्रारंभ किए गए नाट्य मेले में प्रबुद्ध जोशी के गुजराती नाटक ‘तीन बंदर’ का मंचन किया गया। हास्य से भरपूर नाटक में कत्ल की गुत्थी सुलझने के बजाए उलझती चली गई। आखिर में तीन दिव्यांग दोस्त अपने विशेष गुणों की मदद से कत्ल के मसले को सुलझा लेते हैं।
इस नाटक का हिंदी अनुवाद विकास वासुदेव एवं मीनाक्षी वासुदेव और निर्देशन नागेंद्र शर्मा ने किया गया। मसखरे रंगमंच अंबाला के कलाकारों की ओर से अभिनीत हास्य नाटक तीन बंदर एक छात्रावास के कमरे से शुरू होता है, जहां तीन दोस्त फिल्म देखने का प्लान बनाते हैं। लोगों को गुदगुदाते हुए तीनों दोस्त अलग-अलग फिल्मों को देखने की बात करते हैं, लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाते। अंत में उनके प्रोफेसर की सुझाई फिल्म देखने का निर्णय लिया जाता है।
फिल्म देखने के बाद एक छात्र दूसरे कमरे में जाता है। वहां उसका कत्ल हो जाता है। कातिल बड़े शातिर अंदाज में छात्र का खून करता है, लेकिन उस दौरान उस कमरे में बैठी अंधी लड़की नैना उसकी बातों को सुन लेती है और अपने अन्य दो साथियों को इस बारे में बताती है। संयोगवश नैना का साथी सुभाष मूक और श्रवण बधिर होता है, जिसके कारण तीनों को एक दूसरे की बात समझने में मुश्किलें आती रहती है। कत्ल की गुत्थी सुलझने की बजाय उलझती चली जाती है।
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अंत में एक-दूसरे की मदद से तीनों साथी कातिल का पता लगा लेते हैं और पुलिस को पूरी जानकारी दे देते हैं। इस तरह दिव्यांग होते हुए भी तीन दोस्त अपने विशेष गुणों के कारण कत्ल के मसले को सुलझा लेते हैं। नाटक में सुभाष का किरदार स्वयं नाटक निर्देशक नागेंद्र शर्मा ने निभाया, वहीं नैना के किरदार में मनीषा शर्मा तथा श्रवण तरुण जलोटा रहे। अन्य भूमिकाओं में सुकृति शर्मा, इंद्र, अंकुश शिवम, राज किरण, करण रहे। संगीत शिवानी का रहा तथा प्रकाश व्यवस्था मनीष डोगरा ने संभाली। इस मौके पर हरियाणा कला परिषद हिसार मंडल के अतिरिक्त निदेशक महाबीर गुड्डू बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। वही विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ रंगकर्मी बृज शर्मा उपस्थित रहे। संचालन हरियाणा कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने किया।
खामोश नाटक का मंचन छह मई को
27 मार्च से 14 मई तक चलने वाले नाट्य मेले में छह मई को स्थानीय कलाकारों की ओर से बृज शर्मा के निर्देशन में नाटक खामोश का मंचन किया जाएगा। सात मई को गुरुग्राम के कलाकार अशोक भाकरी के निर्देशन में शादत हसन मंटो की कहानी पर आधारित नाटक लाइसेंस मंचित करेंगे। दोनों नाटकों के मंचन का समय शाम 6:30 बजे रहेगा।
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की ओर से आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान कला कीर्ति भवन में प्रारंभ किए गए नाट्य मेले में प्रबुद्ध जोशी के गुजराती नाटक ‘तीन बंदर’ का मंचन किया गया। हास्य से भरपूर नाटक में कत्ल की गुत्थी सुलझने के बजाए उलझती चली गई। आखिर में तीन दिव्यांग दोस्त अपने विशेष गुणों की मदद से कत्ल के मसले को सुलझा लेते हैं।
इस नाटक का हिंदी अनुवाद विकास वासुदेव एवं मीनाक्षी वासुदेव और निर्देशन नागेंद्र शर्मा ने किया गया। मसखरे रंगमंच अंबाला के कलाकारों की ओर से अभिनीत हास्य नाटक तीन बंदर एक छात्रावास के कमरे से शुरू होता है, जहां तीन दोस्त फिल्म देखने का प्लान बनाते हैं। लोगों को गुदगुदाते हुए तीनों दोस्त अलग-अलग फिल्मों को देखने की बात करते हैं, लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाते। अंत में उनके प्रोफेसर की सुझाई फिल्म देखने का निर्णय लिया जाता है।
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फिल्म देखने के बाद एक छात्र दूसरे कमरे में जाता है। वहां उसका कत्ल हो जाता है। कातिल बड़े शातिर अंदाज में छात्र का खून करता है, लेकिन उस दौरान उस कमरे में बैठी अंधी लड़की नैना उसकी बातों को सुन लेती है और अपने अन्य दो साथियों को इस बारे में बताती है। संयोगवश नैना का साथी सुभाष मूक और श्रवण बधिर होता है, जिसके कारण तीनों को एक दूसरे की बात समझने में मुश्किलें आती रहती है। कत्ल की गुत्थी सुलझने की बजाय उलझती चली जाती है।
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अंत में एक-दूसरे की मदद से तीनों साथी कातिल का पता लगा लेते हैं और पुलिस को पूरी जानकारी दे देते हैं। इस तरह दिव्यांग होते हुए भी तीन दोस्त अपने विशेष गुणों के कारण कत्ल के मसले को सुलझा लेते हैं। नाटक में सुभाष का किरदार स्वयं नाटक निर्देशक नागेंद्र शर्मा ने निभाया, वहीं नैना के किरदार में मनीषा शर्मा तथा श्रवण तरुण जलोटा रहे। अन्य भूमिकाओं में सुकृति शर्मा, इंद्र, अंकुश शिवम, राज किरण, करण रहे। संगीत शिवानी का रहा तथा प्रकाश व्यवस्था मनीष डोगरा ने संभाली। इस मौके पर हरियाणा कला परिषद हिसार मंडल के अतिरिक्त निदेशक महाबीर गुड्डू बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। वही विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ रंगकर्मी बृज शर्मा उपस्थित रहे। संचालन हरियाणा कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने किया।
खामोश नाटक का मंचन छह मई को
27 मार्च से 14 मई तक चलने वाले नाट्य मेले में छह मई को स्थानीय कलाकारों की ओर से बृज शर्मा के निर्देशन में नाटक खामोश का मंचन किया जाएगा। सात मई को गुरुग्राम के कलाकार अशोक भाकरी के निर्देशन में शादत हसन मंटो की कहानी पर आधारित नाटक लाइसेंस मंचित करेंगे। दोनों नाटकों के मंचन का समय शाम 6:30 बजे रहेगा।